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History of India
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वर्ष 1913 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में स्थापित 'गदर पार्टी' और इसके क्रांतिकारी अभियानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. गदर पार्टी की स्थापना 'सोहन सिंह भकना' द्वारा की गई थी और इसके साप्ताहिक पत्र 'गदर' का प्रकाशन मुख्य रूप से उर्दू, पंजाबी, गुजराती और पश्तो जैसी विभिन्न भाषाओं में किया जाता था ताकि विभिन्न पृष्ठभूमि के प्रवासियों तक इसे पहुँचाया जा सके।
- 2. लाला हरदयाल इस आंदोलन के प्रमुख बुद्धिजीवियों और संस्थापकों में से एक थे, जिन्होंने 'पैसिफिक कोस्ट हिंदुस्तान एसोसिएशन' के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिसका मुखपत्र बाद में 'गदर' के रूप में प्रसिद्ध हुआ।
- 3. प्रथम विश्व युद्ध के आरंभ होने पर गदर पार्टी के अधिकांश क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह करने के लिए विदेशों से भारत लौटने का आह्वान किया, जिसे 'गदर षड्यंत्र' (Ghadar Mutiny) के रूप में जाना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि गदर पार्टी की स्थापना के समय सोहन सिंह भकना इसके अध्यक्ष थे, किंतु इसके मुख्य संस्थापक और संगठनकर्ता लाला हरदयाल और सोहन सिंह भकना दोनों थे, तथा 'गदर' अखबार मुख्य रूप से गुरुमुखी, उर्दू, गुजराती और पश्तो (मराठी और हिंदी संस्करण भी बाद में) में निकलता था, लेकिन इसकी स्थापना आधिकारिक तौर पर 'पैसिफिक कोस्ट हिंदुस्तान एसोसिएशन' के रूप में हुई थी। कथन 2 और 3 बिल्कुल सही हैं; लाला हरदयाल ने इस आंदोलन को वैचारिक और बौद्धिक आधार दिया तथा प्रथम विश्व युद्ध के दौरान गदर क्रांतिकारियों ने भारत में औपनिवेशिक शासन को उखाड़ फेंकने के लिए 'गदर षड्यंत्र' के तहत भारत वापसी की योजना बनाई थी। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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मराठा साम्राज्य के प्रशासन और छत्रपति शिवाजी महाराज की राजस्व एवं सैन्य व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शिवाजी महाराज की केंद्रीय मंत्रिपरिषद को 'अष्टप्रधान' कहा जाता था, जिसमें प्रत्येक मंत्री सीधे छत्रपति के प्रति उत्तरदायी होता था और इनमें से 'पंडितराव' का मुख्य कार्य धार्मिक मामलों और दान-पुण्य से संबंधित व्यवस्था देखना था, जबकि 'न्यायाधीश' सर्वोच्च अपील न्यायालय का प्रमुख होता था।
2. शिवाजी ने राज्य की आय बढ़ाने और लूटपाट पर अंकुश लगाने के लिए पड़ोसी मुगल प्रांतों और स्वतंत्र क्षेत्रों पर 'चौथ' (कुल राजस्व का एक-चौथाई हिस्सा) और 'सरदेशमुखी' (अतिरिक्त दस प्रतिशत कर) नामक कर लगाए, जिनमें सरदेशमुखी को शिवाजी अपने आपको उस क्षेत्र का मुख्य वतनदार या सरदेशमुख होने के दावे के रूप में वसूलते थे।
3. मराठा घुड़सवार सेना दो प्रमुख श्रेणियों में विभाजित थी—'बरगीर' (जिन्हें राज्य की ओर से घोड़े और हथियार प्रदान किए जाते थे) और 'सिलेदार' (जो स्वयं अपने घोड़े और हथियार का प्रबंध करते थे), तथा सेना में अनुशासन बनाए रखने के लिए सैनिकों को लूट का माल अपने पास रखने की पूर्ण स्वतंत्रता थी।
4. शिवाजी की प्रशासनिक व्यवस्था में जागीरदारी प्रथा को हतोत्साहित किया गया और सैन्य अधिकारियों तथा कारकुनों को वंशानुगत प्रशासनिक जागीरें देने के स्थान पर अधिकांशतः नकद वेतन देने की परंपरा पर बल दिया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मध्यकालीन भारत के इतिहास में 'भक्ति और सूफी आंदोलन' के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. दक्षिण भारत के अलवार (विष्णु भक्त) और नयनार (शिव भक्त) संतों ने भक्ति आंदोलन की नींव रखी थी, जिन्होंने अपनी कविताओं और भजनों में तमिल भाषा का प्रयोग करते हुए जातिगत भेदभाव का कड़ा विरोध किया था।
2. सूफी सिलसिले के अंतर्गत 'चिशती सिलसिला' भारत में सबसे अधिक लोकप्रिय हुआ, जिसकी स्थापना ख्वाजा मोइनुद्दीन चिशती ने अजमेर में की थी, और इस सिलसिले के संतों ने राज्य की सत्ता से दूरी बनाए रखते हुए 'समां' (संगीत गोष्ठियों) को अपनी आध्यात्मिक साधना का प्रमुख अंग माना था।
3. उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन को प्रसारित करने वाले रामानंद ने अपनी शिक्षाओं में ऊंच-नीच के भेद को नकारते हुए कबीर, रैदास और धन्ना जैसे विभिन्न जातियों और पृष्ठफ़ूमियों के शिष्यों को दीक्षित किया था।
4. सूफी संत शेख निजामुद्दीन औलिया के समकालीन अमीर खुसरो ने दिल्ली सल्तनत के सात सुल्तानों का शासनकाल देखा था, तथा उन्हें 'पारसी' और 'हिंदी' दोनों भाषाओं में उनके अद्वितीय योगदान के कारण 'तूतिया-ए-हिंद' (भारत का तोता) कहा जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों—विशेषकर पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा—में हुए घटनाक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पटना में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व एक स्थानीय पुस्तक विक्रेता पीर अली खान ने किया था, जिनके नेतृत्व में हुए संघर्ष में शहर के अफीम एजेंट डॉ. लायेल मारे गए थे, और बाद में कमिश्नर विलियम टेलर के आदेश पर उन्हें सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई थी।
2. दानापुर छावनी के 7वें, 8वें और 40वें नेटिव इन्फैंट्री के सिपाहियों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया और सोन नदी पार करके सीधे बाबू कुंवर सिंह के नेतृत्व में शामिल होने के लिए आरा (शाहाबाद) पहुँच गए।
3. मुजफ्फरपुर और छपरा (सारण) के क्षेत्रों में विद्रोह का प्रसार करने, सैनिकों को संगठित करने तथा अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ स्थानीय जनता का नेतृत्व करने में दानापुर से आए विद्रोही सिपाहियों और स्थानीय अफीम कर्मचारियों ने प्रमुख भूमिका निभाई थी।
4. बाबू कुंवर सिंह ने आरा पर अधिकार करने के पश्चात ब्रिटिश सेना के विरुद्ध छापामार युद्ध (Guerrilla Warfare) की रणनीति अपनाई और अंग्रेजों के खिलाफ अंतिम समय तक संघर्ष करते हुए दिसंबर 1857 में ही वीरगति को प्राप्त हुए थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'आत्मीय सभा' (1815) ने एकेश्वरवाद के प्रचार और मूर्तिपूजा के विरोध का समर्थन किया, जबकि उनके द्वारा 1828 में स्थापित 'ब्रह्म समाज' ने वेदों की अचूकता और उनके दिव्य होने के सिद्धांत को पूरी तरह स्वीकार किया था।
2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और पाखंड खंडनी पताका फहराते हुए मूर्तिपूजा, बहुदेववाद, अवतारवाद तथा जन्मजात जाति व्यवस्था का कड़ा विरोध किया था।
3. प्रार्थना समाज की स्थापना आत्माराम पांडुरंग द्वारा महादेव गोविंद रानाडे और आर.जी. भंडारकर के सहयोग से बंबई में की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य अंतर-जातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह और महिलाओं की शिक्षा को बढ़ावा देना था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भक्ति और सूफी आंदोलन के दार्शनिक तथा सामाजिक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शंकराचार्य द्वारा प्रतिपादित 'अद्वैत वेदांत' के अनुसार ब्रह्म एकमात्र सत्य (परम सत्य) है और जगत मिथ्या है, जिसका खंडन करते हुए रामानुजाचार्य ने 'विशिष्टाद्वैत' दर्शन प्रतिपादित किया, जिसके अनुसार ईश्वर, जीव और जगत पृथक होते हुए भी एक-दूसरे से उसी प्रकार जुड़े हैं जैसे किरणें सूर्य से।
2. सूफी संतों के सिलसिले (संप्रदाय) मुख्य रूप से दो भागों में बंटे थे—'बा-शरा' (जो इस्लामिक शरिया कानून के नियमों का सख्ती से पालन करते थे, जैसे चिश्ती और सुहरावर्दी) और 'बे-शरा' (जो शरिया के बंधनों से मुक्त मस्तों या कलंदरों की तरह जीवन जीते थे)।
3. भारत में चिश्ती सिलसिले की स्थापना ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती ने अजमेर में की थी, जबकि इस सिलसिले के प्रसिद्ध संत निजामुद्दीन औलिया ने सात सुल्तानों का शासनकाल देखा था, किंतु उन्होंने कभी भी किसी सुल्तान के दरबार में जाना स्वीकार नहीं किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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