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History of India
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बौद्ध धर्म एवं जैन धर्म की बौद्धिक और दार्शनिक परंपराओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. बौद्ध धर्म के मध्यम मार्ग (मझिमปฏิपाद) और प्रतीत्यसमुत्पाद के सिद्धांत के अनुसार, संसार की प्रत्येक वस्तु या घटना किसी न किसी कारण से उत्पन्न होती है और यह शाश्वत आत्मा या ईश्वर के अस्तित्व को अनिवार्य रूप से स्वीकार करता है।
- 2. जैन धर्म के श्वेतांबर और दिगंबर दोनों संप्रदायों में यह पूर्ण सहमति है कि जैन धर्म के 19वें तीर्थंकर 'भगवान मल्लिनाथ' एक स्त्री थीं, और स्त्री शरीर से भी कैवल्य (मोक्ष) की प्राप्ति संभव है।
- 3. बौद्ध धर्म की महायान शाखा में भविष्य के बुद्ध के रूप में 'मैत्रेय' (Maitreya) की परिकल्पना की गई है, जो इस संसार में धर्म के पुनरुत्थान के लिए अवतरित होंगे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि बौद्ध धर्म का 'प्रतीत्यसमुत्पाद' (कार्य-कारण सिद्धांत) और 'अनत्मवाद' (Anatta) ईश्वर और शाश्वत आत्मा के अस्तित्व को स्पष्ट रूप से नकारते हैं, जबकि जैन धर्म आत्मा के अस्तित्व को स्वीकार करता है। कथन 2 असत्य है क्योंकि श्वेतांबर संप्रदाय मल्लिनाथ को स्त्री मानता है और स्त्री शरीर से मोक्ष संभव बताता है, किंतु दिगंबर संप्रदाय इसे अस्वीकार करता है और मानता है कि स्त्री शरीर से मोक्ष नहीं मिल सकता। कथन 3 सत्य है; महायान बौद्ध परंपरा में भविष्य के बुद्ध के रूप में 'मैत्रेय' की कल्पना की गई है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन और तदुपरांत प्रारंभ हुए स्वदेशी आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल विभाजन के निर्णय की औपचारिक घोषणा 20 जुलाई 1905 को लॉर्ड कर्जन द्वारा की गई थी, और इसके विरोध में 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में आयोजित ऐतिहासिक बैठक में 'स्वदेशी आंदोलन' का औपचारिक प्रस्ताव पारित किया गया था।
2. विभाजन की प्रभावी तिथि (16 अक्टूबर 1905) को पूरे बंगाल में 'शोक दिवस' के रूप में मनाया गया, जहाँ लोगों ने उपवास रखा, एक-दूसरे के हाथों में राखियाँ बांधीं और रबींद्रनाथ ठाकुर के प्रसिद्ध गीत 'आमार सोनार बांग्ला' को इस आंदोलन का मुख्य प्रेरणास्त्रोत बनाया गया।
3. स्वदेशी आंदोलन के दौरान आर्थिक बहिष्कार और स्वदेशी के प्रचार के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय चेतना जगाने के उद्देश्य से 'राष्ट्रीय शिक्षा परिषद' (National Council of Education) की स्थापना की गई थी, जिसके प्रथम अध्यक्ष महान वैज्ञानिक आर्चाय प्रफुल्ल चंद्र राय थे।
4. इस आंदोलन के दौरान उग्रवादी नेताओं (लाल-बाल-पाल) ने इसे बंगाल की सीमाओं से बाहर पूरे देश में फैलाने का प्रयास किया, जिसके तहत बाल गंगाधर तिलक ने बॉम्बे और पूना में, लाला लाजपत राय ने पंजाब में और सैयद حیدر رضا ने दिल्ली में स्वदेशी आंदोलन का नेतृत्व किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्धन राजवंश एवं दक्षिण भारत के राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) के प्रशासनिक, कलात्मक और राजनीतिक इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हर्षवर्धन के शासनकाल के दौरान कन्नौज सभा का मुख्य उद्देश्य महायान बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार करना था, जिसकी अध्यक्षता चीनी यात्री ह्वेनसांग ने की थी, तथा इस अवसर पर प्रयाग के संगम तट पर प्रत्येक पाँचवें वर्ष 'महामोक्ष परिषद' का आयोजन किया जाता था।
2. बादामी के चालुक्य वंश के प्रसिद्ध शासक पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को पराजित किया था, और इस ऐतिहासिक विजय का विस्तृत विवरण पल्लव वंश के महेंद्रवर्मन प्रथम के 'कुर्मन अभिलेख' में प्राप्त होता है।
3. पल्लव कालीन वास्तुकला में महाबलीपुरम (मामलपुरम) के रथ मंदिरों का निर्माण नरसिंहवर्मन प्रथम (महमल्ल) के शासनकाल में हुआ था, जो एक ही विशाल ग्रेनाइट चट्टान को काटकर (Monolithic Rock-cut) बनाए गए हैं।
4. चोल प्रशासन की सबसे बड़ी विशेषता उसकी स्थानीय स्वशासन प्रणाली थी, जिसका जीवंत प्रमाण 'उत्तरामेरूर अभिलेख' (परान्तक प्रथम के शासनकाल से संबंधित) से मिलता है, जिसमें ग्राम सभा (सभा या महासभा) के सदस्यों के निर्वाचन की लोकतांत्रिक प्रक्रिया का विस्तृत विवरण दिया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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गुप्तकालीन अर्थव्यवस्था, सिक्कों के प्रकार तथा व्यापारिक गतिविधियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गुप्त सम्राटों द्वारा जारी किए गए स्वर्ण सिक्के (जिन्हें 'दीनार' कहा जाता था) कुषाणों के स्वर्ण सिक्कों की तुलना में अधिक शुद्धता और कलात्मक उत्कृष्टता प्रदर्शित करते हैं, तथा स्कंदगुप्त के काल तक आते-आते स्वर्ण सिक्कों में सोने की मात्रा में भारी वृद्धि दर्ज की गई थी।
2. गुप्त काल में भूमि को उपजाऊपन और माप के आधार पर विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता था, जिनमें 'क्षेत्र' (खेती योग्य भूमि), 'वापस' (निवास योग्य भूमि), 'अपराधहत' (बिना जोती गई जंगली भूमि) और 'अपहत' (जंगली भूमि) प्रमुख थीं।
3. इस काल में दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ होने वाले समुद्री व्यापार में भारी प्रगति हुई थी, और ताम्रलिप्टि, भृगुकच्छ (बरूच) तथा कल्याण जैसे बंदरगाह पश्चिमी और पूर्वी देशों के साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार के प्रमुख केंद्र थे।
4. गुप्त शासकों ने अपनी प्रशासनिक और सैन्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए बड़े पैमाने पर सामंतों और अधिकारियों को नकद वेतन देने की परंपरा को बढ़ावा दिया, जिसके कारण मुद्रा अर्थव्यवस्था का अत्यधिक विस्तार हुआ और दैनिक उपयोग के लिए तांबे के सिक्कों का प्रचुर मात्रा में उत्पादन किया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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सविनय अवज्ञा आंदोलन, गोलमेज सम्मेलन और गांधी-इरविन समझौते के घटनाक्रम के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1930 में आयोजित प्रथम गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस ने भाग नहीं लिया था, क्योंकि महात्मा गांधी समेत कांग्रेस के शीर्ष नेता सविनय अवज्ञा आंदोलन के कारण जेल में बंद थे।
2. मार्च 1931 में संपन्न गांधी-इरविन समझौते के तहत ब्रिटिश सरकार ने भारतीय लोगों को अपने व्यक्तिगत और घरेलू उपयोग के लिए समुद्र तटों पर बिना किसी कर के नमक बनाने का कानूनी अधिकार देने पर सहमति व्यक्त की थी।
3. गांधी-इरविन समझौते के उपरांत आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कराची अधिवेशन (1931) में इस समझौते का अनुमोदन किया गया और इसी अधिवेशन में पहली बार कांग्रेस ने 'पूर्ण स्वराज' का प्रस्ताव पारित किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में स्थापित 'आर्य समाज' और उसके सिद्धांतों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा वर्ष 1875 में बंबई में स्थापित 'आर्य समाज' का मूल उद्देश्य वेदों की सत्ता को पुनः स्थापित करना था और उनका प्रसिद्ध नारा 'वेदों की ओर लौटो' था।
2. आर्य समाज ने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद, अवतारवाद, पशुबलि और श्राद्ध जैसी रूढ़ियों का कड़ा विरोध किया, किंतु जन्म आधारित जाति व्यवस्था और बाल विवाह का समर्थन किया।
3. आर्य समाज ने हिंदू समाज के पुनरुत्थान और धर्मांतरित हिंदुओं को पुनः स्वधर्म में वापस लाने के लिए 'शुद्धि आंदोलन' की शुरुआत की थी।
4. दयानंद सरस्वती की प्रमुख कृति 'सत्यार्थ प्रकाश' में आर्य समाज के धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक विचारों का विस्तृत संकलन मिलता है, जिसमें उन्होंने 'स्वराज्य' शब्द का सर्वप्रथम राजनीतिक रूप से प्रयोग किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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