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History of India
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19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में स्थापित 'आर्य समाज' और उसके सिद्धांतों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा वर्ष 1875 में बंबई में स्थापित 'आर्य समाज' का मूल उद्देश्य वेदों की सत्ता को पुनः स्थापित करना था और उनका प्रसिद्ध नारा 'वेदों की ओर लौटो' था।
  2. 2. आर्य समाज ने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद, अवतारवाद, पशुबलि और श्राद्ध जैसी रूढ़ियों का कड़ा विरोध किया, किंतु जन्म आधारित जाति व्यवस्था और बाल विवाह का समर्थन किया।
  3. 3. आर्य समाज ने हिंदू समाज के पुनरुत्थान और धर्मांतरित हिंदुओं को पुनः स्वधर्म में वापस लाने के लिए 'शुद्धि आंदोलन' की शुरुआत की थी।
  4. 4. दयानंद सरस्वती की प्रमुख कृति 'सत्यार्थ प्रकाश' में आर्य समाज के धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक विचारों का विस्तृत संकलन मिलता है, जिसमें उन्होंने 'स्वराज्य' शब्द का सर्वप्रथम राजनीतिक रूप से प्रयोग किया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि स्वामी दयानंद सरस्वती ने 7 अप्रैल 1875 को बंबई में आर्य समाज की स्थापना की थी और उन्होंने वेदों को ही ज्ञान का एकमात्र स्रोत मानते हुए 'वेदों की ओर लौटो' का आह्वान किया था। कथन 2 गलत है क्योंकि आर्य समाज ने जन्म आधारित जाति व्यवस्था (चतुर्वरण व्यवस्था कर्म आधारित होनी चाहिए) और बाल विवाह का पुरजोर विरोध किया था, न कि समर्थन। कथन 3 सही है; आर्य समाज ने 'शुद्धि आंदोलन' के माध्यम से उन लोगों को वापस हिंदू धर्म में दीक्षित करने का कार्य किया जिन्होंने किन्हीं कारणों से अन्य धर्म अपना लिया था। कथन 4 सही है, स्वामी दयानंद सरस्वती की प्रसिद्ध पुस्तक 'सत्यार्थ प्रकाश' है और उन्होंने ही सबसे पहले 'स्वराज्य' शब्द का राजनीतिक रूप से प्रयोग किया था जिसे बाद में लोकमान्य तिलक ने आगे बढ़ाया। विकिपीडिया संदर्भ
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