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History of India
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वैदिक सभ्यता और वैदिक साहित्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. ऋग्वैदिक काल में 'दुहितृ' (जिसका शाब्दिक अर्थ गायहंता या वह है जो दूधोती है) शब्द का प्रयोग पुत्री के लिए किया जाता था, तथा इस समाज में सभा और समिति नामक संस्थाओं में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी थी, जहाँ वे वाद-विवाद में हिस्सा ले सकती थीं।
  2. 2. उत्तर वैदिक काल में वर्ण व्यवस्था जन्म पर आधारित होने लगी और सभा तथा समिति का प्रभाव कम होने लगा, किंतु इस काल में 'गोत्र' प्रथा का उदय हुआ, जिसका मूल अर्थ वह स्थान था जहाँ संपूर्ण कुल का गोधन (गोशाला) पाला जाता था।
  3. 3. शतपथ ब्राह्मण में कृषि की विभिन्न प्रक्रियाओं (जैसे जुताई, बुай, कटाई और मड़ाई) का विस्तृत वर्णन मिलता है, तथा इस ग्रंथ में विदेह माधव की कथा वर्णित है, जो गंडक (सदानिरा) नदी तक आर्य संस्कृति के विस्तार का प्रमाण देती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

वैदिक सभ्यता और साहित्य के इतिहास में ऋग्वैदिक और उत्तर वैदिक समाज की सामाजिक, राजनीतिक तथा आर्थिक संरचनाओं का विशेष महत्व है। ऋग्वैदिक काल में पुत्री को 'दुहितृ' कहा जाता था जिसका अर्थ 'गाय दुहने वाली' होता है, न कि गायहंता। इसके अलावा सभा और समिति जैसी संस्थाओं में महिलाओं की उपस्थिति प्रमाणित है। उत्तर वैदिक काल में गोत्र व्यवस्था का उद्भव हुआ जिसका शाब्दिक अर्थ 'वह स्थान जहाँ पूरे कुल का गोधन रखा जाता था' (गोष्ठ) है। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, शतपथ ब्राह्मण में कृषि कर्मकांडों के साथ-साथ राजा विदेह माधव और पुरोहित गौतम राहुगण द्वारा सदानिरा (वर्तमान गंडक) नदी पार करने की कथा मिलती है, जो पूर्व की ओर आर्यों के भौगोलिक विस्तार को दर्शाती है।
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