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History of India
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दारा शिकोह की प्रसिद्ध रचना "मज्म-उल-बहरीन" का शाब्दिक अर्थ क्या है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
मज्म-उल-बहरीन का अर्थ है दो महासागरों (हिंदू और इस्लाम धर्मों) का मिलन।
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वैदिक सभ्यता और वैदिक साहित्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऋग्वैदिक काल में लोहे के व्यापक प्रयोग (जिसे 'श्याम अयस' कहा गया है) के कारण कृषि अर्थव्यवस्था में भारी क्रांति आई, जिसके फलस्वरूप घुमंतू कबीले स्थायी कृषि बस्तियों में बदल गए।
2. उत्तर वैदिक काल में गोत्र व्यवस्था संस्थागत रूप से स्थापित हुई, जिसका मूल अर्थ वह स्थान था जहाँ समूचे कुल का गोधन पाला जाता था, परंतु बाद में यह एक ही पूर्वज से उत्पन्न लोगों के समूह और अंतर्जातीय विवाह पर प्रतिबंध का द्योतक बन गया।
3. ऋग्वैदिक समाज में वर्ण व्यवस्था मुख्य रूप से जन्म पर आधारित थी, और राजा को जनता से कर वसूलने के लिए 'बलि' नामक स्वेच्छा से दिए जाने वाले उपहार के अतिरिक्त नियमित भू-राजस्व प्रणाली प्राप्त थी।
4. वैदिक साहित्य के अंतर्गत आरण्यकों को 'रहस्यमय पुस्तकें' कहा गया है, जिनकी रचना वनों में एकांत में अध्ययन करने वाले मुनियों और विद्यार्थियों के लिए की गई थी, जो यज्ञों के कर्मकांडीय पक्षों से हटकर दार्शनिक और आध्यात्मिक चिंतन पर बल देते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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महात्मा गांधी के भारत आगमन और उनके शुरुआती सत्याग्रहों—चंपारण (1917) और खेड़ा (1918)—के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटने के पश्चात महात्मा गांधी ने वर्ष 1915 में अहमदाबाद के कोचरब क्षेत्र में अपने 'सत्याग्रह आश्रम' की स्थापना की थी, तथा गोपाल कृष्ण गोखले की सलाह पर उन्होंने देश की राजनीतिक और सामाजिक वास्तविकताओं को समझने के लिए पूरे एक वर्ष तक देश का भ्रमण किया था।
2. वर्ष 1917 के चंपारण सत्याग्रह के दौरान राजकुमार शुक्ल के निमंत्रण पर गांधीजी बिहार गए थे, जहाँ उन्होंने यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर थोपी गई क्रूर 'तीनकठिया पद्धति' (जिसके तहत किसानों को अपनी कुल भूमि के 3/20वें हिस्से पर नील की खेती करना अनिवार्य था) के विरुद्ध सफल सत्याग्रह किया था।
3. वर्ष 1918 के खेड़ा सत्याग्रह में गांधीजी ने फसल खराब होने के बावजूद ब्रिटिश प्रशासन द्वारा लगान पूरी तरह वसूलने के दमनकारी निर्णय के विरुद्ध किसानों का नेतृत्व किया, और इस आंदोलन के दौरान सरदार वल्लभभाई पटेल व इंदुलाल याग्निक जैसे युवा नेताओं ने गांधीजी का सक्रिय रूप से साथ दिया था।
4. खेड़ा सत्याग्रह के दौरान ही ब्रिटिश सरकार ने अंततः एक गुप्त आदेश जारी कर यह स्वीकार किया था कि लगान केवल उन्हीं किसानों से वसूला जाए जो स्वेच्छा से भुगतान करने में समर्थ हैं, और यहीं पर गांधीजी ने पहली बार अपने संपूर्ण राजनीतिक जीवन में 'असहयोग' (Non-Cooperation) के अस्त्र का औपचारिक प्रयोग किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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सिंधु घाटी सभ्यता की कृषि अर्थव्यवस्था, व्यापारिक नेटवर्क और तकनीकी विशिष्टताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हड़प्पा सभ्यता के लोग गेहूँ, जौ, राई और मटर के साथ-साथ नौ किस्म की फसलों का उत्पादन करते थे, तथा लोथल और रंगपुर से चावल की खेती के स्पष्ट पुरातात्विक साक्ष्य (धान की भूसी) प्राप्त हुए हैं।
2. सैंधव वासियों ने कपास का उत्पादन सबसे पहले किया था, जिसे यूनानी लोग 'सिंडन' (Sindon) कहते थे, और मेसोपोटामिया के अभिलेखों में सिंधु क्षेत्र के लिए 'मेलुहा' (Meluhha) शब्द का प्रयोग किया गया है।
3. इस सभ्यता के लोग तांबे और काँसे के निर्माण की तकनीक में अत्यधिक कुशल थे, तथा उन्होंने तांबे और टिन को मिलाकर बड़े पैमाने पर कांसे के औजार और मूर्तियां बनाईं, परंतु वे लोहे की धातु और उसके उपयोग से पूर्णतः अपरिचित थे।
4. सिंधु घाटी सभ्यता के स्थलों से सोने, चांदी, लापीस लाजुली और फिरोजा जैसे बहुमूल्य पत्थरों के व्यापार के प्रमाण मिले हैं, और उनका बाह्य व्यापार मुख्य रूप से सुमेर और मिस्र की सभ्यताओं के साथ थल मार्ग द्वारा होता था, क्योंकि जलमार्ग नौकायन के लिए पूरी तरह अविकसित थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान ब्रिटिश सेना के निम्नलिखित अधिकारियों और उनके संबंधित विद्रोह दमन क्षेत्रों के युग्मों पर विचार कीजिए:
1. जनरल जॉन निकलसन — दिल्ली
2. सर कॉलिन कैंपबेल — कानपुर और लखनऊ
3. मेजर जनरल सर जेम्स आउट्राम — झांसी और ग्वालियर
4. सर ह्यूरोज — केंद्रीय भारत (झांसी एवं कालपी)
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
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मध्यकालीन भारत के भक्ति और सूफी आंदोलनों के दार्शनिक संप्रदायों, उनके प्रमुख आचार्यों तथा उनके वैचारिक दृष्टिकोण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. दक्षिण भारत के वैष्णव संत रामानुजचार्य ने 'विशिष्टाद्वैत' दर्शन का प्रतिपादन किया, जिसके अनुसार जीव और जगत ब्रह्म से भिन्न भी हैं और अभिन्न भी (अंश के रूप में), तथा मोक्ष प्राप्ति के लिए 'प्रपत्ति' (पूर्ण आत्मसमर्पण) मार्ग पर विशेष बल दिया गया।
2. मध्वाचार्य द्वारा प्रतिपादित 'द्वैतवाद' दर्शन के अनुसार ईश्वर, आत्मा और जड़ जगत पूरी तरह से पृथक और स्वतंत्र सत्य हैं, तथा ईश्वर और जीव के बीच कभी भी पूर्ण तदाकारिता या अद्वैत संबंध संभव नहीं है।
3. वल्लभाचार्य द्वारा प्रवर्तित 'शुद्धैतवाद' दर्शन के अनुसार माया का आवरण जीव पर नहीं बल्कि केवल ब्रह्म पर पड़ता है, जिसके कारण ब्रह्म अपनी इच्छा से संसार के रूप में प्रकट होता है और पुष्टि मार्ग के माध्यम से भगवान कृष्ण की अनन्य भक्ति ही मुक्ति का एकमात्र साधन है।
4. सूफी संतों के 'सुहरावर्दी' सिलसिले ने भारत में कठोर तपस्या, एकांत जीवन और राजकीय अनुदानों व जागीरों के पूर्ण बहिष्कार की नीति को अपनाया, जबकि इसके विपरीत 'चिशती' सिलसिले के संतों ने शाही दरबारों के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखे और सुल्तानों से बड़े पैमाने पर भूमि-अनुदान स्वीकार किए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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