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History of India
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अगस्त 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' और सुभाष चंद्र बोस द्वारा संचालित स्वतंत्रता संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. बंबई के अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सत्र में 'भारत छोड़ो' प्रस्ताव पारित होने के पश्चात, महात्मा गांधी द्वारा दिए गए 'करो या मरो' के आह्वान के अगले ही दिन (9 अगस्त 1942 को) ऑपरेशन जीरो आवर के तहत लगभग सभी प्रमुख कांग्रेसी नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया, जिसके फलस्वरूप यह आंदोलन पूरी तरह से नेतृत्वहीन होकर बिखर गया और इसमें किसी भी प्रकार की समानांतर सरकारों का गठन नहीं हुआ।
  2. 2. वर्ष 1941 में ब्रिटिश नजरबंदी से गुप्त रूप से पलायन कर जर्मनी पहुँचे सुभाष चंद्र बोस ने बर्लिन में 'फ्री इंडिया सेंटर' (Free India Center) की स्थापना की और वहीं से पहली बार 'जय हिन्द' का नारा दिया तथा जर्मन विदेशी कार्यालय के सहयोग से 'इंडियन लीजन' (Azad Hind Legion) का गठन किया।
  3. 3. जापान के सहयोग से रास बिहारी बोस द्वारा पुनर्गठित 'इंडियन नेशनल आर्मी' (INA) की कमान जब अक्टूबर 1943 में सुभाष चंद्र बोस को सौंपी गई, तब उन्होंने सिंगापुर में 'आज़ाद हिंद सरकार' (Arzi Hukumat-e-Azad Hind) के गठन की घोषणा की और इसी सरकार के नियंत्रण के अंतर्गत अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का नाम क्रमशः 'शहीद द्वीप' और 'स्वराज द्वीप' रखा गया।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि 9 अगस्त 1942 को प्रमुख नेताओं की गिरफ्तारी के बाद आंदोलन बिखर नहीं गया, बल्कि यह देश का एक 'स्वतः स्फूर्त' (Spontaneous) जन-आंदोलन बन गया जिसमें भूमिगत गतिविधियों के साथ-साथ बलिया, ताम्रलि और सतारा जैसी जगहों पर 'समानांतर सरकारों' (Parallel Governments) का सफल गठन किया गया था। कथन 2 सत्य है; सुभाष चंद्र बोस 1941 में बर्लिन पहुँचे जहाँ उन्होंने 'फ्री इंडिया सेंटर' की स्थापना की, 'जय हिन्द' का नारा दिया और 'इंडियन लीजन' तैयार किया। कथन 3 भी सत्य है; अक्टूबर 1943 में सिंगापुर में 'आज़ाद हिंद सरकार' की स्थापना हुई और अंडमान-निकोबार का नाम 'शहीद और स्वराज द्वीप' रखा गया। इस ऐतिहासिक घटनाक्रम के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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