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History of India
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दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक विकास, राजस्व प्रणालियों और विभिन्न विभागों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. सल्तनत काल में 'दीवान-ए-मुस्तखराज' विभाग की स्थापना अलाउद्दीन खिलजी द्वारा की गई थी, जिसका मुख्य कार्य बकाया राजस्व की वसूली करना और राजस्व अधिकारियों द्वारा किए जाने वाले भ्रष्टाचार तथा गबन की जाँच करना था।
  2. 2. गयासुद्दीन तुगलक ने अपने राजस्व प्रशासन में 'हक-ए-मवेशी' और 'किस्मत-ए-खुती' जैसी पारंपरिक ग्रामीण मुखियाओं (मुकद्दम, खुद और चौधरी) की विशेषाधिकार प्राप्त शक्तियों को पूरी तरह से समाप्त कर दिया ताकि किसानों पर से अतिरिक्त कर का बोझ कम हो सके।
  3. 3. फिरोजशाह तुगलक ने सल्तनत की आय बढ़ाने के लिए सिंचाई पर 'हक-ए-शर्ब' (कुल उपज का 10 प्रतिशत) नामक एक नया सिंचाई कर लगाया, जिसे फिकह (इस्लामी न्यायशास्त्र) के जानकारों की सहमति से लागू किया गया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: अलाउद्दीन खिलजी ने वित्त विभाग के अंतर्गत 'दीवान-ए-मुस्तखराज' नामक नए विभाग की स्थापना की थी, जिसका प्रमुख उद्देश्य मालगुजारी के बकाया अवशेषों की जाँच करना और राजस्व वसूलने वाले कर्मचारियों द्वारा जनता से वसूले गए अवैध धन या गबन का हिसाब लेना था। कथन 2 गलत है: गयासुद्दीन तुगलक ने खुद, मुकद्दम और चौधरी जैसे स्थानीय राजस्व अधिकारियों को उनके पुराने विशेषाधिकार और 'हक-ए-खूती' (खुतों और मुकद्दमों का अधिकार) वापस लौटा दिए थे, जिन्हें अलाउद्दीन खिलजी ने छीन लिया था; उसने किसानों पर से अत्यधिक कर का बोझ तो कम किया लेकिन ग्रामीण अभिजात वर्ग के अधिकारों को समाप्त नहीं किया। कथन 3 सही है: फिरोजशाह तुगलक ने सिंचाई के लिए कई नहरों का निर्माण करवाया और शरियत के नियमों के अनुसार कृषि उपज का 1/10 भाग 'हक-ए-शर्ब' के रूप में सिंचाई कर के रूप में वसूल किया, जिसे उलेमाओं और फिकह के जानकारों की मंजूरी प्राप्त थी। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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