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History of India
Asked 2 months ago · Viewed 21 times

वर्ष 1857 के महान विद्रोह की प्रकृति और उसके वैचारिक स्वरूप का विश्लेषण करते हुए निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. प्रसिद्ध इतिहासकार सर जॉन सीले ने 1857 के विद्रोह को 'पूरी तरह से देशभक्तिहीन और स्वार्थी सिपाही विद्रोह' करार दिया था, जिसका समर्थन करते हुए सर जॉन लॉरेنس ने इसे केवल एक सैनिक असंतोष माना।
  2. 2. बेंजामिन डिजरायली ने ब्रिटिश संसद में इस घटना को केवल एक साधारण सिपाही विद्रोह न मानकर इसे 'राष्ट्रीय विद्रोह' (National Revolt) की संज्ञा दी थी।
  3. 3. मार्क्सवादी इतिहासकार एस.एन. सेन ने अपनी अधिकृत सरकारी रिपोर्ट '१८५७' में यह निष्कर्ष निकाला कि यह विद्रोह प्रारंभ में राष्ट्रीय स्वतंत्रता के लिए एक सुनियोजित राजनीतिक षड्यंत्र के रूप में शुरू हुआ था, जो बाद में प्रतिक्रियावादी सामंती ताकतों के हाथों में चला गया।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि सर जॉन सीले ने 1857 के विद्रोह को 'अति स्वार्थी और देशभक्तिहीन सिपाही विद्रोह' (a wholly unpatriotic and selfish sepoy mutiny) कहा था, और सर जॉन लॉरेنس ने भी इसे मुख्य रूप से एक सैनिक विद्रोह माना था। कथन 2 सही है क्योंकि ब्रिटिश राजनेता बेंजामिन डिजरायली ने हाउस ऑफ कॉमन्स में इस घटना को मात्र एक सैन्य असंतोष मानने से इंकार करते हुए इसे एक 'राष्ट्रीय विद्रोह' (National Revolt) घोषित किया था। कथन 3 गलत है क्योंकि डॉ. एस.एन. सेन ने अपनी पुस्तक 'Eighteen Fifty-Seven' में स्पष्ट रूप से लिखा है कि यह विद्रोह 'न तो प्रथम, न ही राष्ट्रीय और न ही स्वतंत्रता संग्राम था' (It is difficult to avoid the conclusion that the so-called First National War of Independence of 1857 is neither First, nor National, nor a War of Independence)। इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखा जा सकता है।
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