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History of India
Asked 2 months ago · Viewed 14 times

ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों — स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी — के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. बंगाल, बिहार और उड़ीसा में लॉर्ड कॉर्नवालिस द्वारा 1793 में लागू किए गए 'स्थाई बंदोबस्त' (Permanent Settlement) के तहत जमींदारों को भूमि का वास्तविक स्वामी मान लिया गया, जिससे पारंपरिक रूप से भूमि पर खेती करने वाले काश्तकारों (रयतों) के अधिकार समाप्त होकर वे केवल किराएदार बनकर रह गए।
  2. 2. थॉमस मुनरो और कैप्टन रीड द्वारा मुख्य रूप से मद्रास और बॉम्बे प्रेसीडेंसी में विकसित 'रयतवारी व्यवस्था' में सरकार और किसान के बीच सीधा समझौता हुआ, जिसके अंतर्गत भूमि का स्वामित्व व्यक्तिगत किसानों को सौंप दिया गया, लेकिन अकाल या सूखे की स्थिति में भी भू-राजस्व में किसी प्रकार की छूट का कोई प्रावधान नहीं था।
  3. 3. उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब के कुछ हिस्सों में लागू 'महालवारी व्यवस्था' के अंतर्गत व्यक्तिगत किसानों से कर वसूलने के बजाय पूरे गाँव या ग्राम समूह (महाल) को राजस्व इकाई माना गया, तथा इस व्यवस्था का प्रतिपादन मुख्य रूप से मैकेंज़ी द्वारा किया गया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में तीन मुख्य भू-राजस्व प्रणालियाँ लागू की गईं थीं, जिनका मुख्य उद्देश्य अधिकतम राजस्व की वसूली करना था। 1793 में लॉर्ड कॉर्नवालिस द्वारा बंगाल प्रेसीडेंसी में 'स्थाई बंदोबस्त' लागू किया गया, जिसमें जमींदारों को भूस्वामी बनाया गया। थॉमस मुनरो द्वारा शुरू की गई 'रयतवारी व्यवस्था' में किसानों (रयत) के साथ सीधा समझौता हुआ, परंतु अत्यधिक ऊँची राजस्व दरें और सूखे की स्थिति में भी राहत न मिलने के कारण किसान महाजनों के चंगुल में फंस गए। वहीं, हॉल्ट मैकेंज़ी द्वारा परिकल्पित 'महालवारी व्यवस्था' के तहत पूरे महाल (गाँव) को राजस्व भुगतान की इकाई बनाया गया। इस विषय की विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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