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History of India
Asked 2 months ago · Viewed 13 times

वर्ष 1857 के महान विद्रोह की असफलता और उसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 1857 के विद्रोह का तात्कालिक नेतृत्व करने वाले अधिकांश भारतीय शासकों और सामंतों (जैसे नाना साहेब, बेगम हजरत महल और खान बहादुर खान) के पास अपनी व्यक्तिगत रियासतों को बचाने की संकीर्ण और सीमित महत्वकांक्षा थी, जिसके कारण वे पूरे उपमहाद्वीप के स्तर पर अंग्रेजों के विरुद्ध कोई एकीकृत, दीर्घकालिक और अखिल भारतीय रणनीतिक दृष्टि विकसित नहीं कर सके।
  2. 2. दिल्ली में विद्रोहियों के औपचारिक नेता घोषित किए गए मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की अत्यधिक वृद्धावस्था, सैन्य नेतृत्व क्षमता का पूर्ण अभाव और उनके निकटवर्ती दरबारियों तथा राजकुमारों के बीच आपसी अंतर्द्वंद्व व समन्वय की कमी ने विद्रोह को कमजोर कर दिया।
  3. 3. शिक्षित भारतीय मध्यम वर्ग, बड़े व्यापारियों और आधुनिक पश्चिमी शिक्षा प्राप्त बुद्धिजीवियों ने 1857 के विद्रोह में बढ़-चढ़कर सक्रिय भागीदारी की तथा अंग्रेजों के खिलाफ इसे एक राष्ट्रीय और आधुनिक स्वतंत्रता संग्राम के रूप में वैचारिक समर्थन प्रदान किया।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

वर्ष 1857 का विद्रोह अपनी कई आंतरिक कमजोरियों और नेतृत्व के अभाव के कारण असफल हो गया था। कथन 1 और 2 पूरी तरह सही हैं क्योंकि विद्रोहियों के नेतृत्व में सामंती चरित्र की प्रधानता थी और वे अंग्रेजों की आधुनिक सैन्य शक्ति व कूटनीति के मुकाबले कोई सुसंगत अखिल भारतीय योजना नहीं बना पाए। इसके अलावा, बहादुर शाह जफर की वृद्धावस्था और दरबारियों के अंतर्द्वंद्व ने स्थिति को और गंभीर कर दिया। वहीं, कथन 3 असत्य है क्योंकि शिक्षित भारतीय मध्यम वर्ग और आधुनिक बुद्धिजीवियों ने इस विद्रोह से दूरी बनाए रखी थी और वे इसे प्रगतिशील के बजाय प्रतिक्रियावादी एवं सामंती व्यवस्था का पुनरुत्थान मानते थे। इस ऐतिहासिक घटना के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ पढ़ सकते हैं।
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→ दिल्ली में 1857 के विद्रोह के दौरान मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका और विद्रोहियों के संगठनात्मक स्वरूप के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मेरठ के सिपाहियों द्वारा दिल्ली पहुँचकर सम्राट बहादुर शाह जफर को भारत का सम्राट घोषित किए जाने के बाद, सम्राट ने विद्रोहियों के सैन्य और प्रशासनिक मामलों के प्रबंधन के लिए एक 'शासन न्यायालय' (Court of Administration) का गठन किया था, जिसमें दस सदस्यीय परिषद थी और इसके अधिकांश सदस्य सैन्य अधिकारी व नागरिक प्रतिनिधि थे। 2. बहादुर शाह जफर ने स्वेच्छा से इस विद्रोह का नेतृत्व पूरी ऊर्जा और राजनीतिक दूरदर्शिता के साथ स्वीकार किया था, तथा उन्होंने अपनी शाही सेना का प्रत्यक्ष संचालन करते हुए दिल्ली की सुरक्षा के लिए स्वयं युद्ध के मैदान में अंग्रेजों का मुकाबला किया था। 3. ब्रिटिश सेना द्वारा दिल्ली पर पुनः अधिकार प्राप्त करने के पश्चात ब्रिटिश अधिकारी मेजर हडसन ने हुमायूँ के मकबरे से बहादुर शाह जफर को गिरफ्तार किया था और उन पर राजद्रोह का मुकदमा चलाकर उन्हें म्यांमार (बर्मा) की रंगून जेल में निर्वासित कर दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में विद्रोह का दमन करने वाले ब्रिटिश अधिकारियों और उनके संबंधित कार्यक्षेत्रों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. जॉन निकलसन — दिल्ली 2. मेजर जनरल हैवलॉक — लखनऊ 3. कर्नल नील — कानपुर 4. ह्यूरोज — झांसी और ग्वालियर उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से युग्म सही सुमेलित है/हैं? → दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक विकास और विभिन्न राजवंशों के दौरान लागू की गई राजस्व एवं सैन्य प्रणालियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अलाउद्दीन खिलजी ने अपने साम्राज्य में बिस्वा की इकाई के आधार पर भूमि की पैमाइश (विश्वा) अनिवार्य की और उपज का आधा हिस्सा (50 प्रतिशत) भू-राजस्व के रूप में नकद लेने का आदेश दिया, जिसके साथ ही उसने किसानों पर 'घरी कर' (झोपड़ी और घरों पर) और 'चराई कर' (दुधारू पशुओं पर) भी लगाए। 2. मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में दोआब क्षेत्र में कर वृद्धि के तुरंत बाद पड़े भीषण अकाल के कारण उत्पन्न संकट से निपटने के लिए सुल्तान ने एक नया कृषि विभाग 'दीवान-ए-कोही' स्थापित किया, जिसका मुख्य उद्देश्य किसानों को प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता (तकावी ऋण या सौंधार) देकर बंजर भूमि को कृषि योग्य बनाना था। 3. फिरोजशाह तुगलक ने सल्तनत काल में पहली बार ब्राह्मणों पर भी 'जिजिया कर' आरोपित किया और शरीयत के नियमों के विरुद्ध जाकर सभी प्रकार के अवांछित करों को समाप्त करते हुए केवल कुरान द्वारा स्वीकृत चार करों—खराज, खुम्स, जकात और जिजिया—को ही वैध घोषित किया, तथा सिंचाई सुविधा हेतु बड़े पैमाने पर नहरों का निर्माण करवाकर 'हक-ए-शर्ब' (सिंचाई कर) भी वसूला। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → वर्ष 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' और सुभाष चंद्र बोस द्वारा संचालित 'आज़ाद हिंद फौज' (INA) के ऐतिहासिक घटनाक्रमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान देश के कई हिस्सों में 'समांतर सरकारों' (Parallel Governments) की स्थापना की गई थी; जिनमें बलिया में चित्तू पाण्डू के नेतृत्व में, ताम्रलिप्त (बंगाल) में 'जातीय सरकार' के रूप में और सतारा में 'प्रती सरकार' (वाई.बी. चव्हाण और नाना पाटिल के नेतृत्व में) सबसे लंबे समय तक चलने वाली समांतर सरकारों में प्रमुख थीं। 2. सुभाष चंद्र बोस ने वर्ष 1943 में सिंगापुर में 'आज़ाद हिंद सरकार' (Arzi Hukumat-e-Azad Hind) की स्थापना की और जापान के हस्तांतरण के पश्चात अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का नियंत्रण प्राप्त कर क्रमशः उनका नाम 'शहीद द्वीप' और 'स्वराज द्वीप' रखा। 3. जापानी सेना के सहयोग से आगे बढ़ते हुए आज़ाद हिंद फौज की 'गांधी ब्रिगेड', 'सुभाष ब्रिगेड' और महिलाओं की टुकड़ी 'झाँसी की रानी रेजिमेंट' ने इम्फाल और कोहिमा के मोर्चों पर ब्रिटिश सेना के विरुद्ध कड़ा संघर्ष किया, और इस संपूर्ण सैन्य अभियान के दौरान जापानी सेना ने INA को पूर्ण रणनीतिक स्वायत्तता प्रदान करते हुए कभी भी अपनी कमान के अधीन नहीं रखा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं? → महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
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