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History of India
Asked 2 months ago · Viewed 24 times

मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था, केंद्रीय अधिकारियों (तीर्थों) और प्रांतीय प्रशासन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. मौर्य प्रशासन में सर्वोच्च स्तर के अधिकारियों को 'तीर्थ' कहा जाता था, जिनकी संख्या अर्थशास्त्र के अनुसार अठारह थी; इनमें 'समहर्त्ता' आय के संग्रहण और वार्षिक बजट तैयार करने का मुख्य अधिकारी होता था, जबकि 'संनिधातृ' राजकोष और भण्डार गृह का मुख्य संरक्षक था।
  2. 2. अशोक के शासनकाल में प्रांतीय प्रशासन के अंतर्गत साम्राज्य चार प्रमुख प्रांतों में विभाजित था, जिनकी राजधानियाँ तक्षशिला, उज्जैन, सुवर्णगिरि और तोसली थीं, और इन प्रांतों का शासन सामान्यतः शाही परिवार के राजकुमारों (कुमार या आर्यपुत्र) द्वारा चलाया जाता था।
  3. 3. मौर्यकालीन नगर प्रशासन 'मेगास्थनीज' के विवरण के अनुसार छह समितियों में विभाजित था, जिसमें प्रत्येक समिति में पाँच सदस्य होते थे और तीसरी समिति का प्रमुख कार्य जन्म-मृत्यु का पंजीकरण रखना था जो विश्व के शुरुआती जनगणना अभिलेखों में से एक माना जाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए तीनों कथन मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था के संबंध में पूर्णतः सत्य हैं। कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' के अनुसार मौर्य केंद्रीय प्रशासन में 18 महत्वपूर्ण अधिकारी होते थे जिन्हें 'तीर्थ' कहा जाता था। 'समहर्त्ता' राजस्व संग्रह का प्रभारी था और 'संनिधातृ' कोषाध्यक्ष एवं भण्डागार का अधिकारी था। अशोक के काल में प्रांतों (चक्र) की संख्या पाँच हो गई थी (उत्तरापथ की राजधानी तक्षशिला, अवंती की उज्जैन, प्राच्य की पाटलिपुत्र, कलिंग की तोसली और दक्षिणापथ की सुवर्णगिरि)। मेगास्थनीज की 'इंडिका' के अनुसार पाटलिपुत्र का नगर प्रशासन 30 सदस्यों की एक सभा द्वारा चलाया जाता था जो छह समितियों (प्रत्येक में 5 सदस्य) में बंटी हुई थी; इसमें जन्म-मृत्यु का लेखा-जोखा रखना तीसरी समिति का मुख्य कार्य था। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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