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History of India
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मराठा साम्राज्य के सैन्य प्रशासन, अष्टप्रधान व्यवस्था और शिवाजी के उत्तरवर्ती काल में पेशवाओं के अंतर्गत प्रशासनिक परिवर्तनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. शिवाजी की 'अष्टप्रधान' मंत्रिपरिषद में 'पंडितराव' और 'न्यायाधीश' को छोड़कर शेष सभी छह मंत्रियों को सैन्य अभियानों का नेतृत्व करने और युद्ध भूमि में प्रत्यक्ष रूप से भाग लेने की अनिवार्यता थी।
  2. 2. शिवाजी के काल में मराठा सेना की रीढ़ 'पागा' घुड़सवार सेना थी, जिन्हें राज्य की ओर से घोड़े और अस्त्र-शस्त्र दिए जाते थे, जबकि 'सिलहदार' वे घुड़सवार सैनिक थे जो अपने स्वयं के घोड़े और हथियार लेकर युद्ध में सम्मिलित होते थे।
  3. 3. बालाजी बाजीराव (नानी साहब) के कार्यकाल में हुई 'संगोला की संधि' (1750) के पश्चात छत्रपति की स्थिति केवल नाममात्र की रह गई और मराठा साम्राज्य की वास्तविक शक्ति पूरी तरह से पेशवा के हाथ में केंद्रित हो गई, तथा पुणे पेशवाओं के प्रशासनिक केंद्र के रूप में स्थापित हुआ।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि शिवाजी की अष्टप्रधान मंत्रिपरिषद में मंत्रियों को जागीरें नहीं दी जाती थीं और अधिकांश प्रशासनिक अधिकारियों (पंडितराव और न्यायाधीश को छोड़कर) को भी प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ आवश्यकता पड़ने पर सैन्य नेतृत्व करना पड़ता था, किंतु यह कोई कठोर नियम नहीं था कि 'शेष सभी छह मंत्रियों को अनिवार्य रूप से युद्ध भूमि में भाग लेना ही होगा' (वे अधिकांशतः प्रशासनिक और राजस्व कार्यों से जुड़े थे)। कथन 2 बिल्कुल सही है; मराठा घुड़सवार सेना दो श्रेणियों में विभाजित थी—'पागा' (जिन्हें राज्य द्वारा घोड़े और शस्त्र मिलते थे) और 'सिलहदार' (जो अपने घोड़े और हथियार स्वयं रखते थे)। कथन 3 सही है; वर्ष 1750 में हुई विकिपीडिया संदर्भ 'संगोला की संधि' के माध्यम से छत्रपति मराठा साम्राज्य के केवल नाममात्र के प्रमुख रह गए और सारी शक्तियां पेशवा के हाथों में आ गईं।
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