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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5-11) के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों और नागरिकता (संशोधन) अधिनियमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 8 के अनुसार भारत के बाहर रहने वाले भारतीय मूल के कुछ व्यक्तियों (Persons of Indian Origin) के नागरिकता के अधिकारों का उपबंध किया गया है, जिसके तहत यदि कोई व्यक्ति या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी में से कोई ऐसा व्यक्ति भारत शासन अधिनियम, 1935 में परिभाषित भारत में जन्मा था, तो वह भारत का नागरिक बन सकता है, बशर्ते उसने भारत के कूटनीतिक या कांसular प्रतिनिधि के पास पंजीकरण कराया हो।
  2. 2. नागरिकता अधिनियम, 1955 के अंतर्गत 'देशीकरण द्वारा नागरिकता' (By Naturalization) प्राप्त करने के लिए यह आवश्यक है कि वह व्यक्ति भारत सरकार के प्रति निष्ठा की शपथ ले और कम से कम पिछले 14 वर्षों से (यानी आवेदन से ठीक पहले के 12 महीने और उससे पूर्व के 14 वर्षों में से कुल मिलाकर 11 वर्ष) भारत में निवास कर रहा हो या भारत सरकार की सेवा में रहा हो।
  3. 3. संविधान के अनुच्छेद 10 के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति, जो इस भाग के पूर्वगामी प्रावधानों में से किसी के अधीन भारत का नागरिक है या समझा जाता है, संसद द्वारा बनाए गए किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए, भारत का नागरिक बना रहेगा, जिसका तात्पर्य यह है कि संसद किसी साधारण कानून द्वारा भी नागरिकों की नागरिकता को बिना किसी विधिक प्रक्रिया के पूर्णतः समाप्त कर सकती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 8 के अनुसार, भारत के बाहर रहने वाले भारतीय मूल के व्यक्तियों के नागरिकता के अधिकारों का प्रावधान किया गया है। यदि कोई व्यक्ति, जिसके माता-पिता या दादा-दादी में से कोई भारत शासन अधिनियम, 1935 द्वारा परिभाषित भारत में जन्मा था, और वह भारत के बाहर किसी देश में निवास कर रहा है, तो वह भारत का नागरिक बन सकता है यदि उसने भारत के कूटनीतिक या कांसुलर प्रतिनिधि के पास आवेदन कर पंजीकरण कराया हो।

कथन 2 सही है: नागरिकता अधिनियम, 1955 की तीसरी अनुसूची के तहत 'देशीकरण द्वारा नागरिकता' प्राप्त करने के लिए यह शर्त है कि आवेदक पिछले 14 वर्षों में से कुल 11 वर्ष (आवेदन से ठीक पहले के 12 महीने लगातार सहित) भारत में रहा हो या सरकार की सेवा में रहा हो।

कथन 3 गलत है: अनुच्छेद 10 यह उपबंध करता है कि प्रत्येक व्यक्ति जो इस भाग के प्रावधानों के तहत नागरिक है, संसद द्वारा बनाए गए विधि के अधीन रहते हुए नागरिक बना रहेगा। इसका अर्थ यह नहीं है कि संसद बिना किसी विधाई और संवैधानिक प्रक्रिया के मनमाने ढंग से किसी नागरिक की नागरिकता समाप्त कर सकती है; बल्कि नागरिकता की समाप्ति अनुच्छेद 9 (स्वेच्छा से विदेशी नागरिकता लेना) या नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत निर्धारित विशिष्ट आधारों (वंचित किया जाना, त्याग करना आदि) पर ही हो सकती है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पढ़ें।
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