BaalVikas
Menu
Indian Polity
Asked 2 months ago · Viewed 21 times

भारतीय संविधान के भाग IV-क के अंतर्गत समाहित 'मूल कर्तव्यों' (Fundamental Duties) और स्वर्ण सिंह समिति (Swaran Singh Committee) की सिफारिशों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. मूल कर्तव्यों को मूल संविधान में स्थान नहीं दिया गया था, बल्कि इन्हें वर्ष 1976 में 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा सरदार स्वर्ण सिंह समिति की अनुशंसा पर संविधान में जोड़ा गया, जिसमें समिति ने मूल रूप से नागरिकों के लिए करों का भुगतान (Payment of Taxes) करने को भी एक अनिवार्य कर्तव्य बनाने की संस्तुति की थी।
  2. 2. संविधान के अनुच्छेद 51-क के अंतर्गत वर्तमान में कुल 11 मूल कर्तव्य हैं, जिनमें से 11वाँ कर्तव्य (6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को शिक्षा के अवसर प्रदान करना) 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा जोड़ा गया था, तथा यह प्रावधान किया गया कि ये कर्तव्य नागरिकों के साथ-साथ भारत के राज्यक्षेत्र में निवास करने वाले विदेशी नागरिकों पर भी समान रूप से लागू होंगे।
  3. 3. यद्यपि मूल कर्तव्यों की प्रकृति न्यायोचित (Non-justiciable) है और इनके उल्लंघन पर सीधे न्यायालय द्वारा कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकती, तथापि संसद को यह विधाई शक्ति प्राप्त है कि वह कानून बनाकर इनके क्रियान्वयन को सुनिश्चित कर सकती है और अवहेलना की स्थिति में शास्ति (Penalty) या दंड का प्रावधान कर सकती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: मूल संविधान में कोई मूल कर्तव्य नहीं था। आपातकाल (1975-77) के दौरान सरदार स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा भाग IV-क (अनुच्छेद 51-क) जोड़ा गया। स्वर्ण सिंह समिति ने कर अदायगी को भी मूल कर्तव्य बनाने का सुझाव दिया था, जिसे कांग्रेस पार्टी ने स्वीकार नहीं किया था। कथन 2 गलत है: मूल कर्तव्य केवल और केवल 'भारतीय नागरिकों' के लिए हैं, ये भारत में निवास करने वाले विदेशी नागरिकों पर लागू नहीं होते हैं। कथन 3 सही है: मूल कर्तव्यों की प्रकृति गैर-न्यायोचित (Non-justiciable) है, लेकिन संसद विधि निर्माण के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम आदि के जरिए इन्हें प्रभावी बना सकती है और दंडित कर सकती है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
Share:
अगला प्रश्न → भारतीय निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) की स्वतंत्रता, संरचना तथा… ← पिछला प्रश्न भारतीय संसद की विधाई प्रक्रिया और सदनों की कार्यप्रणाली के…

Related Questions

→ भारत के महान्यायवादी (Attorney General) और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) के संवैधानिक पदों, उनकी शक्तियों तथा कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार भारत के महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है, जिसके लिए यह आवश्यक है कि वह सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए अर्हित (Qualified) हो, तथा उसे भारत के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार प्राप्त होने के साथ-साथ संसद के दोनों सदनों की बैठकों में बोलने और भाग लेने का अधिकार होता है, किंतु उसे किसी भी मामले में मतदान करने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं होता है। 2. अनुच्छेद 148 के अंतर्गत भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा की जाती है, और उसे उसके पद से केवल उसी रीति और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति और जिन आधारों पर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, तथा CAG अपने पद पर छह वर्ष की अवधि या पैंसठ वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने तक (इनमें से जो भी पहले हो) बने रहते हैं। 3. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) केंद्र सरकार के लेखाओं से संबंधित अपनी वार्षिक रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंपता है, जिसे राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखवाते हैं, जबकि किसी राज्य के लेखाओं से संबंधित उसकी रिपोर्ट सीधे प्रधानमंत्री को सौंपी जाती है ताकि वह संबंधित राज्य के विधानमंडल में प्रस्तुत की जा सके। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5-11) के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों और नागरिकता (संशोधन) अधिनियमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 8 के अनुसार भारत के बाहर रहने वाले भारतीय मूल के कुछ व्यक्तियों (Persons of Indian Origin) के नागरिकता के अधिकारों का उपबंध किया गया है, जिसके तहत यदि कोई व्यक्ति या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी में से कोई ऐसा व्यक्ति भारत शासन अधिनियम, 1935 में परिभाषित भारत में जन्मा था, तो वह भारत का नागरिक बन सकता है, बशर्ते उसने भारत के कूटनीतिक या कांसular प्रतिनिधि के पास पंजीकरण कराया हो। 2. नागरिकता अधिनियम, 1955 के अंतर्गत 'देशीकरण द्वारा नागरिकता' (By Naturalization) प्राप्त करने के लिए यह आवश्यक है कि वह व्यक्ति भारत सरकार के प्रति निष्ठा की शपथ ले और कम से कम पिछले 14 वर्षों से (यानी आवेदन से ठीक पहले के 12 महीने और उससे पूर्व के 14 वर्षों में से कुल मिलाकर 11 वर्ष) भारत में निवास कर रहा हो या भारत सरकार की सेवा में रहा हो। 3. संविधान के अनुच्छेद 10 के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति, जो इस भाग के पूर्वगामी प्रावधानों में से किसी के अधीन भारत का नागरिक है या समझा जाता है, संसद द्वारा बनाए गए किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए, भारत का नागरिक बना रहेगा, जिसका तात्पर्य यह है कि संसद किसी साधारण कानून द्वारा भी नागरिकों की नागरिकता को बिना किसी विधिक प्रक्रिया के पूर्णतः समाप्त कर सकती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत शहरी स्थानीय शासन (नगरपालिकाओं) के प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 243-Q के अनुसार प्रत्येक राज्य में सभी शहरी क्षेत्रों के लिए एक ही प्रकार की एकरूपता स्थापित करते हुए अनिवार्य रूप से 'नगर निगम' (Municipal Corporation) का ही गठन किया जाएगा, चाहे उस क्षेत्र की जनसंख्या का आकार या आर्थिक महत्व कुछ भी क्यों न हो। 2. अनुच्छेद 243-W के अंतर्गत नगरपालिकाओं को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं तैयार करने तथा उन्हें लागू करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसके तहत बारहवीं अनुसूची में कुल 18 कार्यात्मक विषयों को शामिल किया गया है। 3. अनुच्छेद 243-Y के प्रावधानों के अनुसार प्रत्येक राज्य में गठित 'राज्य वित्त आयोग' (State Finance Commission) का यह दायित्व है कि वह राज्यपाल को यह सिफारिश करे कि पंचायतों के साथ-साथ नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति को सुधारने के लिए राज्य की संचित निधि से अनुदान देने के क्या उपाय किए जाने चाहिए। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के ऐतिहासिक विकास के अंतर्गत ब्रिटिश संसद द्वारा पारित विभिन्न अधिनियमों (Acts) के प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 के माध्यम से बंगाल के गवर्नर को 'बंगाल का गवर्नर-जनरल' पदनाम दिया गया तथा उसकी सहायता के लिए चार सदस्यीय कार्यकारी परिषद का गठन किया गया, और इसी अधिनियम के तहत वर्ष 1774 में कलकत्ता में एक उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की स्थापना की गई जिसमें एक मुख्य न्यायाधीश और तीन अन्य न्यायाधीश शामिल थे। 2. पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 द्वारा कंपनी के राजनीतिक और वाणिज्यिक कार्यों को पृथक् कर दिया गया, जिसके तहत 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' (Board of Control) का गठन किया गया जो कंपनी के राजनीतिक मामलों और ब्रिटिश नियंत्रण की देखरेख करता था, जबकि 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर' (Court of Directors) को वाणिज्यिक मामलों के प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी गई। 3. चार्टर अधिनियम, 1833 ने भारत में केंद्रीय प्रशासन की नींव रखी, जिसके तहत बंगाल के गवर्नर-जनरल को 'भारत का गवर्नर-जनरल' बना दिया गया और देश की पहली बार ऐसी विधाई शक्ति का केंद्रीकरण किया गया जिसके द्वारा मद्रास और बॉम्बे के गवर्नरों की विधाई शक्तियों को पूरी तरह छीन लिया गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के भाग-IV के अंतर्गत वर्णित 'राज्य के नीति निर्देशक तत्वों' (DPSP - अनुच्छेद 36-51) की प्रकृति, संशोधनों और न्यायिक व्याख्या के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 39(b) और 39(c) के अंतर्गत निहित नीति निर्देशक सिद्धांतों को प्रभावी बनाने के लिए संसद या राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाई गई किसी विधि को इस आधार पर असंवैधानिक घोषित नहीं किया जा सकता कि वह अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को छीनती या न्यून करती है, और यह संरक्षण मूल संविधान में ही निहित था जिसे बाद में 42वें संविधान संशोधन द्वारा विस्तारित किया गया था। 2. निर्देशक तत्वों को न्यायपालिका द्वारा अपरिवर्तनीय (Non-justiciable) घोषित किया गया है, किंतु सर्वोच्च न्यायालय ने अपने कई ऐतिहासिक निर्णयों (जैसे मिनर्वा मिल्स वाद, 1980) में यह स्पष्ट किया है कि मूल अधिकार और नीति निर्देशक तत्व एक-दूसरे के पूरक हैं और इनके बीच का संतुलन संविधान के 'मूल ढाँचे' (Basic Structure) का एक अनिवार्य हिस्सा है। 3. अनुच्छेद 48 के तहत राज्य कृषि और पशुपालन को आधुनिक और वैज्ञानिक प्रणालियों से संगठित करने के प्रयास करेगा, और विशेष रूप से गायों और बछड़ों तथा अन्य दुधारू और वाहक पशुओं की नस्लों के परीक्षण और सुधार के लिए तथा उनके वध का प्रतिषेध करने के लिए कदम उठाएगा, और यह एक समाजवादी विचारधारा पर आधारित नीति निर्देशक तत्व है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के भाग I के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) और नए राज्यों के निर्माण या सीमा परिवर्तन की विधायी प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 2 के अंतर्गत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना ऐसे निबंधनों और शर्तों पर कर सके जो वह ठीक समझे, जबकि अनुच्छेद 3 के तहत संसद को मौजूदा राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन करने की शक्ति प्रदान की गई है। 2. अनुच्छेद 3 के तहत नए राज्यों के निर्माण या किसी राज्य के क्षेत्र, सीमा या नाम में परिवर्तन करने वाला कोई भी विधेयक संसद के किसी भी सदन में केवल तभी प्रस्तुत किया जा सकता है जब राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश प्राप्त हो, और राष्ट्रपति द्वारा ऐसा विधेयक संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसकी राय जानने के लिए भेजा जाना संवैधानिक रूप से अनिवार्य है, भले ही राज्य विधानमंडल द्वारा दी गई राय को मानना संसद के लिए बाध्यकारी न हो। 3. अनुच्छेद 4 के स्पष्ट प्रावधान के अनुसार, अनुच्छेद 2 या अनुच्छेद 3 के तहत नए राज्यों के प्रवेश, स्थापना, या राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित किए गए कानून संविधान के अनुच्छेद 368 के प्रयोजन के लिए 'संविधान संशोधन' माने जाएंगे, जिसके लिए संसद के विशेष बहुमत तथा आधे राज्यों के विधानमंडलों के अनुसमर्थन की अनिवार्य आवश्यकता होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.