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Indian Polity
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भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 और शहरी स्थानीय शासन के प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 243-S के अनुसार प्रत्येक नगरपालिका क्षेत्र के भीतर वार्डों या अन्य क्षेत्रीय क्षेत्रों के गठन के लिए 'वार्ड समितियों' (Ward Committees) का गठन किया जाना अनिवार्य है, और यह प्रावधान केवल उन्हीं नगरपालिकाओं पर लागू होता है जिनकी जनसंख्या तीन लाख या उससे अधिक है।
  2. 2. अनुच्छेद 243-ZF के अंतर्गत यह प्रावधान किया गया है कि इस संशोधन के लागू होने के समय (जून 1993) राज्यों में पहले से विद्यमान सभी नगरपालिका विधियाँ तब तक प्रवृत्त बनी रहेंगी जब तक कि वे इस संशोधन के उपबंधों के असंगत होने के कारण किसी सक्षम विधानमंडल या अन्य प्राधिकारी द्वारा निरस्त या संशोधित नहीं कर दी जातीं, अथवा इस अधिनियम के प्रारंभ से एक वर्ष की अवधि समाप्त नहीं हो जाती।
  3. 3. अनुच्छेद 243-ZE के प्रावधानों के तहत प्रत्येक राज्य में एक महानगर योजना समिति (Metropolitan Planning Committee) का गठन किया जाएगा, जिसका मुख्य कार्य महानगर क्षेत्र के लिए विकास योजना तैयार करना है, और इस समिति के कुल सदस्यों में से कम से कम दो-तिहाई (66.66%) सदस्य उस महानगर क्षेत्र की नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों और पंचायतों के अध्यक्षों द्वारा अपने में से ही चुने जाएंगे।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 243-S के अनुसार वार्ड समितियों का गठन उस नगरपालिका क्षेत्र के भीतर किया जाता है जिसकी जनसंख्या **तीन लाख या उससे अधिक** है, लेकिन यह केवल 'एक या अधिक वार्डों' को मिलाकर बनाई जा सकती है, न कि संपूर्ण नगरपालिका क्षेत्र के भीतर सभी वार्डों के लिए अनिवार्य रूप से एक ही प्रकार की सार्वभौमिक वार्ड समिति। कथन 2 सही है; अनुच्छेद 243-ZF के तहत पुरानी विधियों को एक वर्ष की अवधि (या जब तक संशोधित न किया जाए) तक बनाए रखने का प्रावधान है। कथन 3 सही है; अनुच्छेद 243-ZE के तहत महानगर योजना समिति के कम से कम दो-तिहाई सदस्य नगरपालिकाओं और पंचायतों के निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा अपने में से चुने जाते हैं। अधिक विस्तृत अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर जा सकते हैं।
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