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Indian Polity
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भारत के निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) और चुनावी सुधारों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 324 के खंड (2) के अनुसार निर्वाचन आयोग मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों (यदि कोई हों) से मिलकर बनेगा, और इनकी नियुक्ति संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के अधीन राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, तथा आयोग को सहायता प्रदान करने के लिए क्षेत्रीय आयुक्तों की नियुक्ति का अधिकार भी संसद के पास सुरक्षित है।
  2. 2. वर्ष 1993 में सर्वोच्च न्यायालय ने 'इन्द्रजीत बरुवा बनाम भारत संघ' मामले के ऐतिहासिक निर्णय में यह स्पष्ट किया था कि चुनाव आयोग की बहु-सदस्यीय प्रकृति में मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों के पास मतदान के अधिकारों के मामले में समान शक्तियाँ होती हैं, और किसी भी मतभेद की स्थिति में निर्णय बहुमत के आधार पर लिया जाता है, न कि केवल मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सहमति से।
  3. 3. निर्वाचन आयोग के व्यय भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) पर भारित (Charged) होते हैं, ठीक उसी तरह जैसे उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों और भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) के वेतन व भत्ते होते हैं, ताकि आयोग की वित्तीय स्वायत्तता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 324(2) के अनुसार मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के अधीन नहीं, बल्कि सीधे **राष्ट्रपति** द्वारा की जाती है (यद्यपि हालिया विधायी संशोधनों के बाद चयन समिति का प्रावधान जोड़ा गया है, किंतु मूल संवैधानिक मूलपाठ में संसद की विधि का ऐसा कोई पूर्व बंधन नहीं था जो राष्ट्रपति की नियुक्ति को सीमित करता हो, तथा क्षेत्रीय आयुक्तों की नियुक्ति का अधिकार राष्ट्रपति के पास है)। कथन 2 बिल्कुल सही है; वर्ष 1993 के पश्चात (जब आयोग को बहु-सदस्यीय बनाया गया) मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की शक्तियां, वेतन और निर्णय लेने के अधिकार (बहुमत के आधार पर) समान कर दिए गए। कथन 3 गलत है क्योंकि निर्वाचन आयोग के व्यय भारत की संचित निधि पर **भारित (Charged)** नहीं होते हैं, बल्कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों के वेतन आदि संचित निधि पर भारित होते हैं, किंतु संपूर्ण आयोग का प्रशासनिक व्यय भारत की संचित निधि से वार्षिक बजट के माध्यम से अनुमानित होता है (यह यूपीएससी और पीसीएस स्तर की परीक्षाओं का एक अति सूक्ष्म और महत्वपूर्ण अंतर है)। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
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