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Indian Polity
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के संवैधानिक उपबंधों, सदस्यों की स्वतंत्रता, उनके कार्यकाल, निष्कासन प्रक्रिया और पुनर्नियुक्ति के प्रतिबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 317 के प्रावधानों के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग या किसी राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य को केवल राष्ट्रपति के आदेश से ही उनके पद से हटाया जा सकता है, भले ही वे राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्य या अध्यक्ष क्यों न हों, और दुराचार के आधार पर हटाने से पूर्व उच्चतम न्यायालय द्वारा की गई जाँच का प्रतिवेदन राष्ट्रपति के लिए बाध्यकारी होता है।
  2. 2. संविधान के अनुच्छेद 319 के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष अपने कार्यकाल की समाप्ति के पश्चात भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी अन्य नियोजन (Employment) का पात्र नहीं होता है, किंतु संघ लोक सेवा आयोग का कोई सदस्य अपनी पदामुक्ति के पश्चात UPSC के अध्यक्ष के रूप में अथवा किसी राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति का पात्र होता है।
  3. 3. राज्य लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष अपनी पदामुक्ति के पश्चात संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य के रूप में अथवा किसी अन्य राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति का पात्र तो होता है, किंतु वह उसी या किसी अन्य राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्य के रूप में पुनः नियुक्त किए जाने का पात्र नहीं होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत UPSC और SPSC दोनों के अध्यक्षों या सदस्यों को हटाने की शक्ति राष्ट्रपति के पास है, और दुराचार के मामले में उच्चतम न्यायालय की जाँच अनिवार्य तथा उसका प्रतिवेदन राष्ट्रपति पर बाध्यकारी होता है। कथन 2 सही है: अनुच्छेद 319 के अनुसार UPSC का अध्यक्ष सेवानिवृत्ति के बाद सरकार के अधीन किसी अन्य पद का पात्र नहीं होता, लेकिन UPSC का सदस्य UPSC के अध्यक्ष या SPSC के अध्यक्ष पद पर नियुक्त हो सकता है। कथन 3 सही है: SPSC का अध्यक्ष UPSC या अन्य SPSC का अध्यक्ष बन सकता है, पर वह उसी आयोग या किसी अन्य SPSC में सदस्य के रूप में पुनर्नियुक्त नहीं हो सकता। अधिक विस्तृत अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के पोर्टल पर जा सकते हैं।
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