त्वरित लिंक्स
Indian Polity
11 views
भारतीय संविधान के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों (अनुच्छेद 5-11) और नागरिकता अधिनियम, 1955 के विभिन्न संशोधनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 8 के अनुसार, भारत से बाहर रहने वाले भारतीय मूल के कुछ व्यक्तियों को नागरिकता के अधिकार प्रदान किए गए हैं, किंतु इसके लिए यह आवश्यक है कि ऐसे व्यक्ति या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी में से कोई भी भारत शासन अधिनियम, 1935 में परिभाषित भारत में जन्मा हो और उसने भारत के डोमिनियन के उस समय के राजनयिक या कौंसलिया प्रतिनिधि के पास भारत की नागरिकता के लिए आवेदन किया हो।
- 2. नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत 'पंजीकरण द्वारा नागरिकता' (Citizenship by Registration) प्राप्त करने के लिए किसी भी व्यक्ति को भारत में सामान्यतः निवास करने की न्यूनतम अवधि के रूप में आवेदन करने से ठीक पहले कम से कम सात वर्षों तक लगातार भारत में रहना अनिवार्य होता है, और इसमें किसी भी प्रकार की छूट का प्रावधान नहीं है।
- 3. वर्ष 2003 के नागरिकता (संशोधन) अधिनियम द्वारा भारत में 'प्रवासी भारतीय' (OCI - Overseas Citizen of India) कार्डधारक योजना की शुरुआत की गई थी, और इसके तहत किसी भी OCI कार्डधारक को भारत में मतदान करने का संवैधानिक अधिकार तथा देश के किसी भी संवैधानिक पद (जैसे राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति) पर निर्वाचन लड़ने का पूर्ण अधिकार प्राप्त होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 8 के अनुसार, भारत से बाहर रहने वाले भारतीय मूल के व्यक्तियों (PIO) की नागरिकता का प्रावधान किया गया है, जिसके तहत यदि व्यक्ति, उसके माता-पिता या दादा-दादी में से कोई भारत शासन अधिनियम, 1935 द्वारा परिभाषित भारत में जन्मा था और उसने निर्धारित राजनयिक प्रतिनिधि के समक्ष आवेदन किया था, तो वह भारत का नागरिक समझा जा सकता है। कथन 2 गलत है क्योंकि नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत पंजीकरण द्वारा नागरिकता के लिए सामान्य निवास की अवधि (मूल रूप से या समय-समय पर संशोधनों के पश्चात) कुछ श्रेणियों के लिए अलग हो सकती है और इसमें केंद्र सरकार द्वारा विशेष छूट भी दी जा सकती है। कथन 3 गलत है क्योंकि OCI (Overseas Citizen of India) कार्डधारकों को भारत में मतदान करने का अधिकार, लोकसभा/राज्यसभा चुनाव लड़ने का अधिकार, तथा राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, उच्चतम/उच्च न्यायालय के न्यायाधीश या राज्यपाल जैसे उच्च संवैधानिक पदों पर आसीन होने का कोई अधिकार प्राप्त नहीं होता है। आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के विस्तृत अध्ययन के माध्यम से इन प्रावधानों को और अधिक गहराई से समझ सकते हैं।
Related Questions
→
राज्यसभा का अध्यक्ष कौन होता है?
→
भारतीय संविधान के प्रथम भाग के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) और राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 2 के अंतर्गत संसद को विधि द्वारा ऐसे निबंधनों और शर्तों पर, जो वह ठीक समझे, संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना करने की शक्ति प्रदान की गई है, जबकि अनुच्छेद 3 के तहत मौजूदा राज्यों के पुनर्गठन, उनके क्षेत्रों में परिवर्तन या नाम बदलने की शक्ति संसद में निहित है।
2. अनुच्छेद 3 के अधीन किसी नए राज्य के निर्माण या उसके क्षेत्र में परिवर्तन से संबंधित कोई भी विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश के बिना संसद के किसी भी सदन में पुनः स्थापित नहीं किया जा सकता, तथा राष्ट्रपति द्वारा ऐसा विधेयक संबंधित राज्य के विधानमंडल को उसके विचार जानने के लिए भेजा जाना अनिवार्य है और राज्य विधानमंडल द्वारा व्यक्त किया गया विचार संसद के लिए पूर्ण रूप से बाध्यकारी होता है।
3. सर्वोच्च न्यायालय के 'बेरुबारी यूनियन वाद' (1960) में दिए गए परामर्श के अनुसार, भारतीय संघ के किसी भी भू-भाग (क्षेत्र) को किसी विदेशी राज्य को सौंपने के लिए अनुच्छेद 3 के तहत साधारण बहुमत से विधि बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संविधान संशोधन अधिनियम पारित करना अनिवार्य है, जिसे बाद में नौवें संविधान संशोधन (1960) द्वारा कार्यान्वित किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) और चुनाव सुधारों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग एक बहु-सदस्यीय निकाय के रूप में स्थापित किया गया था, जिसमें मूल रूप से एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दो अन्य निर्वाचन आयुक्तों के प्रावधान की व्यवस्था संविधान निर्माताओं द्वारा की गई थी।
2. दिनेश गोस्वामी समिति (1990) ने चुनाव सुधारों पर अपनी सिफारिश देते हुए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के प्रयोग, सरकारी धन व विज्ञापनों के दुरुपयोग को रोकने तथा राजनीतिक दलों के वैतनिक ऑडिट (Auditing of Accounts) का सुझाव दिया था।
3. जनप्रतिनिधि अधिनियम, 1951 (Representation of the People Act, 1951) की धारा 77 के तहत चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों द्वारा चुनाव प्रचार के दौरान किए जाने वाले खर्च की अधिकतम सीमा तय की जाती है, और इस सीमा का उल्लंघन करने पर उम्मीदवार को अयोग्य ठहराया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य विधानमंडल—विधानसभा और विधान परिषद—की संरचना, गठन और विधायी शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 169 के अंतर्गत संसद किसी राज्य में विधान परिषद के सृजन या उत्सादन के लिए कानून बना सकती है, बशर्ते संबंधित राज्य की विधानसभा ने उस राज्य के कुल सदस्यों के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से इस आशय का एक संकल्प पारित कर दिया हो, और ऐसा संकल्प पारित होने पर संसद के लिए उस राज्य में विधान परिषद का गठन करना संवैधानिक रूप से अनिवार्य हो जाता है।
2. विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या उस राज्य की विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती है, किंतु किसी भी परिस्थिति में विधान परिषद के सदस्यों की कुल संख्या चालीस से कम नहीं होनी चाहिए (अपवादस्वरूप जम्मू-कश्मीर के समय स्थिति भिन्न थी)।
3. विधान परिषद के सदस्यों के निर्वाचन और मनोनयन के संबंध में, इसके कुल सदस्यों का 1/12 भाग ऐसे स्नातकों द्वारा चुना जाता है जो उस राज्य के भीतर कम से कम तीन वर्ष पूर्व ग्रेजुएट हो चुके हैं, तथा 1/6 भाग राज्यपाल द्वारा साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारिता आंदोलन और समाज सेवा के क्षेत्र में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखने वाले व्यक्तियों में से मनोनीत किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत भारत के राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियों और अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 123 के अनुसार राष्ट्रपति को अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति प्राप्त है, और राष्ट्रपति द्वारा जारी यह अध्यादेश संसद के पुनः समवेत होने की तिथि से छह सप्ताह की अवधि समाप्त होने पर निष्प्रभावी हो जाता है, तथा इस अध्यादेश को वापस लेने के लिए राष्ट्रपति को केंद्रीय मंत्रिपरिषद की सलाह की आवश्यकता नहीं होती है, वह अपने एकांतिक विवेक (Discretion) का प्रयोग करता है।
2. अनुच्छेद 356 के अधीन राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा उसकी जारी होने की तिथि से दो महीने के भीतर साधारण बहुमत (Simple Majority) द्वारा अनुमोदित किया जाना अनिवार्य है, और एक बार अनुमोदित होने के बाद यह अधिकतम तीन वर्षों की अवधि तक चल सकता है, बशर्ते प्रत्येक छह महीने पर संसद का पुनः अनुमोदन प्राप्त किया जाए।
3. राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) की उद्घोषणा के दौरान राष्ट्रपति को यह अधिकार प्राप्त है कि वह अनुच्छेद 359 के अंतर्गत भाग III द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए न्यायालयों में जाने के अधिकार को निलंबित कर सकता है, किंतु अनुच्छेद 20 और 21 द्वारा प्रदत्त अधिकारों के प्रवर्तन को निलंबित करने का आदेश किसी भी स्थिति में नहीं दिया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.