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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत भारत के राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियों और अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 123 के अनुसार राष्ट्रपति को अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति प्राप्त है, और राष्ट्रपति द्वारा जारी यह अध्यादेश संसद के पुनः समवेत होने की तिथि से छह सप्ताह की अवधि समाप्त होने पर निष्प्रभावी हो जाता है, तथा इस अध्यादेश को वापस लेने के लिए राष्ट्रपति को केंद्रीय मंत्रिपरिषद की सलाह की आवश्यकता नहीं होती है, वह अपने एकांतिक विवेक (Discretion) का प्रयोग करता है।
  2. 2. अनुच्छेद 356 के अधीन राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा उसकी जारी होने की तिथि से दो महीने के भीतर साधारण बहुमत (Simple Majority) द्वारा अनुमोदित किया जाना अनिवार्य है, और एक बार अनुमोदित होने के बाद यह अधिकतम तीन वर्षों की अवधि तक चल सकता है, बशर्ते प्रत्येक छह महीने पर संसद का पुनः अनुमोदन प्राप्त किया जाए।
  3. 3. राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) की उद्घोषणा के दौरान राष्ट्रपति को यह अधिकार प्राप्त है कि वह अनुच्छेद 359 के अंतर्गत भाग III द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए न्यायालयों में जाने के अधिकार को निलंबित कर सकता है, किंतु अनुच्छेद 20 और 21 द्वारा प्रदत्त अधिकारों के प्रवर्तन को निलंबित करने का आदेश किसी भी स्थिति में नहीं दिया जा सकता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि राष्ट्रपति को अध्यादेश जारी करने या वापस लेने की शक्ति मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह (अनुच्छेद 74) के अधीन होती है। राष्ट्रपति अपने एकांतिक विवेक (Discretion) से अध्यादेश वापस नहीं ले सकता, बल्कि वह मंत्रिपरिषद के परामर्श पर ही ऐसा करता है। कथन 2 सत्य है; अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा दो महीने के भीतर अनुमोदित किया जाना आवश्यक है और इसे अधिकतम तीन वर्षों तक बढ़ाया जा सकता है (प्रत्येक छह माह पर अनुमोदन के साथ)। कथन 3 सत्य है; 44वें संविधान संशोधन 1978 के पश्चात अनुच्छेद 359 के तहत अनुच्छेद 20 और 21 के प्रवर्तन को निलंबित नहीं किया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पढ़ें।
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किस अनुच्छेद को संविधान की 'हृदय और आत्मा' कहा गया? भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण संशोधनों और आपातकालीन उपबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा केवल 'युद्ध' या 'बाह्य आक्रमण' के आधार पर की जा सकती है, और 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) शब्द को मूल संविधान के 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) शब्द के स्थान पर जोड़ा गया, साथ ही इसके लिए मंत्रिमंडल की लिखित संस्तुति को भी राष्ट्रपति द्वारा उद्घोषणा जारी करने से पूर्व अनिवार्य बना दिया गया। 2. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा भाग XVIII में अनुच्छेद 352 के तहत यह जोड़ा गया कि राष्ट्रपति द्वारा की गई राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा को देश के केवल किसी एक विशेष भाग तक ही सीमित रखा जा सकता है, संपूर्ण भारत पर लागू करना अब अनिवार्य नहीं रहा। 3. आपातकाल के दौरान मूल अधिकारों के निलंबन के संबंध में व्यवस्था यह है कि अनुच्छेद 359 के तहत राष्ट्रपति आदेश द्वारा भाग III में प्रदत्त अधिकारों (अनुच्छेद 20 और 21 को छोड़कर) के प्रवर्तन को निलंबित कर सकता है, किंतु 44वें संशोधन के बाद से आपातकाल के दौरान भी अनुच्छेद 20 और अनुच्छेद 21 द्वारा प्रदत्त अधिकारों को किसी भी परिस्थिति में निलंबित नहीं किया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) और अधीनस्थ न्यायालयों (Subordinate Courts) की शक्तियों, संरचना तथा क्षेत्राधिकार के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 227 के अनुसार प्रत्येक उच्च न्यायालय को अपने प्रादेशिक क्षेत्राधिकार के भीतर सभी न्यायालयों और अधिकरणों (Tribunals) पर अधीक्षण (Superintendence) करने की शक्ति प्राप्त है, और इस शक्ति में केवल प्रशासनिक नियंत्रण ही शामिल है, जबकि न्यायिक अधीक्षण या पुनरीक्षण (Judicial Superintendence) का अधिकार उच्च न्यायालय के पास नहीं होता है। 2. संविधान के अनुच्छेद 233 के अंतर्गत किसी राज्य में जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और पदोन्नति उस राज्य के राज्यपाल द्वारा राज्य के उच्च न्यायालय से परामर्श करके की जाती है, तथा जिला न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने वाले व्यक्ति के लिए यह आवश्यक है कि वह कम से कम सात वर्ष तक अधिवक्ता या प्लीडर रहा हो और संघ या राज्य की न्यायिक सेवा में पहले से सेवारत न हो। 3. अनुच्छेद 239 नहीं बल्कि संविधान के अनुच्छेद 236 के निर्वचन के तहत 'जिला न्यायाधीश' की परिभाषा में नगर सिविल न्यायालय का न्यायाधीश, अपर जिला न्यायाधीश, संयुक्त जिला न्यायाधीश, सहायक जिला न्यायाधीश, लघु वाद न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश, मुख्य प्रजि magistrate और सत्र न्यायाधीश आदि सम्मिलित किए गए हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के प्रथम भाग के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) और राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 2 के अंतर्गत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह विधि द्वारा संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना ऐसे निबंधनों और शर्तों पर कर सके जो वह ठीक समझे, जबकि अनुच्छेद 3 के तहत नए राज्यों के निर्माण, मौजूदा राज्यों के क्षेत्रों या सीमाओं में परिवर्तन तथा उनके नामों में परिवर्तन करने की संसद की अनन्य शक्ति का प्रावधान किया गया है। 2. अनुच्छेद 3 के अंतर्गत किसी नए राज्य के निर्माण या उसके क्षेत्र में परिवर्तन से संबंधित कोई भी विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश के बिना संसद के किसी भी सदन में पुनः स्थापित नहीं किया जा सकता है, तथा राष्ट्रपति को ऐसा विधेयक उस राज्य के विधानमंडल के पास उसके विचार भेजने की आवश्यकता होती है, और राज्य विधानमंडल द्वारा व्यक्त किया गया कोई भी विचार संसद के लिए पूर्णतः बाध्यकारी होता है। 3. सर्वोच्च न्यायालय ने 'बेरुबारी यूनियन वाद' (1960) में यह अभिनिर्धारित किया था कि भारतीय क्षेत्र के किसी भू-भाग को किसी विदेशी देश को सौंपने (Cession of territory) के लिए अनुच्छेद 3 के अंतर्गत साधारण बहुमत से विधि बनाने की शक्ति पर्याप्त है, और इसके लिए किसी संवैधानिक संशोधन की आवश्यकता नहीं होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? राज्यसभा सीटें?
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