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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग IV में वर्णित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) और उनके न्यायिक प्रवर्तन तथा संशोधनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान का अनुच्छेद 37 यह स्पष्ट रूप से उपबंधित करता है कि नीति निर्देशक तत्व देश के शासन में मूलभूत हैं और विधि बनाने में इन तत्वों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा, किंतु ये किसी भी न्यायालय द्वारा न्यायोचित (Justiciable) नहीं हैं, अर्थात इनके उल्लंघन पर न्यायालय द्वारा इन्हें प्रवर्तित नहीं कराया जा सकता है।
- 2. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा नीति निर्देशक तत्वों में कुछ नए निर्देश जोड़े गए, जिनमें बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए अवसरों को सुरक्षित करना (अनुच्छेद 39), समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता (अनुच्छेद 39A), उद्योगों के प्रबंधन में श्रमिकों की भागीदारी (अनुच्छेद 43A) तथा पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन तथा वन एवं वन्यजीवों की रक्षा (अनुच्छेद 48A) शामिल हैं।
- 3. 'मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ' (1980) वाद में उच्चतम न्यायालय ने यह निर्धारित किया कि भारतीय संविधान की नींव मूल अधिकारों और नीति निर्देशक तत्वों के संतुलन पर टिकी है, और इनमें से किसी एक को दूसरे पर सर्वोच्चता देने से संविधान का मूल ढांचा (Basic Structure) खंडित हो सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 37 के अनुसार नीति निर्देशक तत्व देश के शासन में मौलिक (Fundamental) हैं और कानून बनाते समय इन्हें लागू करना राज्य का कर्तव्य है, लेकिन ये गैर-न्यायोज्य (Non-justiciable) हैं। कथन 2 सही है क्योंकि 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा अनुच्छेद 39, 39A, 43A और 48A जैसे महत्वपूर्ण नीति निर्देशक तत्वों को जोड़ा गया था। कथन 3 भी सही है; 'मिनर्वा मिल्स वाद' (1980) में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मूल अधिकार और DPSP एक ही रथ के दो पहिए हैं और उनके बीच संतुलन संविधान की मूल संरचना का हिस्सा है। भारतीय संविधान के संपूर्ण अध्ययन के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर क्लिक करें।
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भारतीय संविधान सभा के गठन और उसके सदस्यों के निर्वाचन तथा कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कैबिनेट मिशन योजना (1946) के तहत संविधान सभा के सदस्यों का निर्वाचन प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से किया गया था, जिसमें ब्रिटिश प्रांतों और मुख्य कमिश्नरी क्षेत्रों की सीटों को प्रमुख रूप से मुस्लिम, सिख और सामान्य - इन तीन समुदायों में विभाजित किया गया था।
2. संविधान सभा के लिए हुए चुनावों में रियासतों (Princely States) को कुल 93 सीटें आवंटित की गई थीं, किंतु रियासतों के शासकों ने प्रारंभ में ही संविधान सभा से दूरी बनाए रखी और उन्होंने इसके चुनावों में भाग लेने या अपने प्रतिनिधियों को मनोनीत करने से पूरी तरह इंकार कर दिया था, जिसके कारण सभा की प्रारंभिक बैठकों में कोई भी रियासती प्रतिनिधि शामिल नहीं हुआ था।
3. संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को आयोजित की गई थी, जिसमें मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान की मांग को लेकर इस बैठक का पूर्ण बहिष्कार किया था, और फ्रांस की संसदीय परिपाटी के अनुरूप सभा के सबसे वरिष्ठ सदस्य डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को संविधान सभा का अस्थायी अध्यक्ष (Provisional President) चुना गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत शहरी स्थानीय शासन और नगरपालिकाओं के वित्तीय तथा प्रशासनिक प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 243-Y के प्रावधानों के अनुसार प्रत्येक राज्य का राज्यपाल, हर पांच वर्ष की समाप्ति पर एक वित्त आयोग का गठन करेगा जो नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करेगा, और यह आयोग राज्य की संचित निधि से नगरपालिकाओं को दिए जाने वाले अनुदानों के निर्धारण के लिए सिद्धांतों की संस्तुति करता है।
2. अनुच्छेद 243-ZE के तहत प्रत्येक राज्य में एक जिला योजना समिति (District Planning Committee) का गठन किया जाना अनिवार्य है, जो जिले के लिए विकास योजनाएं तैयार करेगी, तथा इस समिति के कुल सदस्यों में से कम से कम चार-तिहाई (3/4) सदस्य जिले की पंचायतों और नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा अपने में से ही चुने जाते हैं।
3. अनुच्छेद 243-W के अंतर्गत राज्य विधानमंडल विधि द्वारा नगरपालिकाओं को ऐसी शक्तियां और प्राधिकार प्रदान कर सकता है जिससे वे ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध विषयों पर आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं तैयार करने और उन्हें क्रियान्वित करने का उत्तरदायित्व संभाल सकें।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राष्ट्रपति की अध्यादेश निर्माण की शक्ति (अनुच्छेद 123) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रपति की अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति संसद की विधि निर्माण की शक्ति के समतुल्य होती है, किंतु यह शक्ति स्वविवेक पर आधारित नहीं है, बल्कि इसके लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले मंत्रिमंडल की लिखित सलाह अनिवार्य होती है।
2. अध्यादेश अधिकतम छह सप्ताह तक प्रभावी रह सकता है यदि संसद द्वारा इसका अनुमोदन न किया जाए, तथा यदि संसद के दोनों सदन अलग-अलग तिथियों पर पुनः समवेत होते हैं, तो छह सप्ताह की यह अवधि बाद में पुनर्समवेत होने वाले सदन की तिथि से गिनी जाएगी।
3. सर्वोच्च न्यायालय ने 'डी.सी. वाधवा वाद (1987)' में यह स्पष्ट रूप से निर्धारित किया था कि अध्यादेशों को बार-बार लगातार प्रख्यापित करना (ordinance raj) संविधान की भावना के प्रतिकूल है और यह कार्यपालिका द्वारा विधायी शक्ति का अतिक्रमण तथा न्यायपालिका की समीक्षा के दायरे में आता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान सभा के गठन और उसकी निर्माण प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान सभा के सदस्यों का निर्वाचन प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष चुनाव पद्धति (Proportional Representation by means of Single Transferable Vote) के माध्यम से किया गया था, जिसमें ब्रिटिश प्रांतों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में कुल 296 सीटें आवंटित की गई थीं।
2. रियासतें (Princely States) संविधान सभा में सम्मिलित नहीं हुई थीं, क्योंकि रियासतों के शासकों ने कैबिनेट मिशन योजना का पूर्ण रूप से बहिष्कार करने का निर्णय लिया था और सभा के चुनाव में भाग लेने से स्पष्ट मना कर दिया था।
3. संविधान सभा की अंतिम बैठक 24 जनवरी 1950 को आयोजित की गई थी, जिस दिन संविधान सभा ने औपचारिक रूप से 'भारत के संविधान' पर हस्ताक्षर किए और सभा का अस्तित्व समाप्त होने के पश्चात इसे अंतरिम संसद (Provisional Parliament) में परिवर्तित कर दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारत के निर्वाचन आयोग और उससे संबंधित चुनाव सुधारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 324 के खंड (2) के अनुसार मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा संसद द्वारा इस निमित्त बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन की जाती है, और सुप्रीम कोर्ट के 'अनूप बर्नवाल बनाम भारत संघ (2023)' के निर्णय के पश्चात इनकी नियुक्ति प्रधानमंत्री, लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष और भारत के मुख्य न्यायाधीश (या उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश) की एक उच्च-स्तरीय चयन समिति की संस्तुति पर राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
2. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 33(7) के अंतर्गत किसी भी उम्मीदवार को लोकसभा या राज्य विधानसभा के किसी आम चुनाव या उपचुनाव में एक साथ अधिकतम दो निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ने की वैधानिक अनुमति प्राप्त है, किंतु वर्ष 2024 में निर्वाचन आयोग द्वारा इस कानूनी प्रावधान को पूर्णतः असंवैधानिक घोषित कर दिया गया है क्योंकि यह एक से अधिक सीट जीतने की स्थिति में उप-चुनाव के अनावश्यक वित्तीय बोझ को बढ़ाता है।
3. 'वोटर वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल' (VVPAT) मशीन के उपयोग को वैधानिक मान्यता प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2013 में 'संचालन (संशोधन) नियम, 2013' के माध्यम से 'कंडक्ट ऑफ़ इलेक्शन रूल्स, 1961' में संशोधन किया था, और सर्वोच्च न्यायालय ने 'सुब्रमण्यम स्वामी बनाम भारत संघ (2013)' वाद में यह स्पष्ट किया था कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के लिए ईवीएम के साथ वीवीपैट का प्रयोग अनिवार्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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