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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राजभाषा के प्रावधानों, अनुसूचियों और राजनीतिक दलों की कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के भाग XVII के अनुच्छेद 348 के अनुसार उच्चतम न्यायालय और प्रत्येक उच्च न्यायालय में सभी कार्रवाइयाँ अंग्रेजी भाषा में होंगी, जब तक कि संसद विधि द्वारा अन्य प्रावधान न करे, और किसी राज्य का राज्यपाल, राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से, राज्य के उच्च न्यायालय की कार्रवाइयों में हिंदी भाषा या राज्य के शासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त किसी अन्य भाषा के प्रयोग को प्राधिकृत कर सकता है।
- 2. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें बाद में विभिन्न संशोधनों के माध्यम से जोड़ा गया; जैसे कि सिंधी भाषा को 21वें संविधान संशोधन द्वारा, कोंकणी, मणिपुरी और नेपाली को 71वें संशोधन द्वारा, तथा बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली को 92वें संविधान संशोधन द्वारा शामिल किया गया, जिससे वर्तमान में इस अनुसूची में कुल 22 भाषाएँ हैं।
- 3. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत निर्वाचन आयोग द्वारा राजनीतिक दलों का पंजीकरण किया जाता है, किंतु निर्वाचन आयोग के पास किसी राजनीतिक दल को दिए गए पंजीकरण या उसकी मान्यता को वापस लेने या रद्द करने की कोई संविधित (statutory) शक्ति प्राप्त नहीं है, और इसके लिए केवल सिविल न्यायालय में वाद दायर किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 348 के अनुसार उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों की सभी कार्यवाही अंग्रेजी में होती है। साथ ही, राज्यपाल राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से उच्च न्यायालय की कार्यवाही में हिंदी या अन्य प्रादेशिक भाषा का प्रयोग प्राधिकृत कर सकता है।
कथन 2 सही है: संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं। 21वें संशोधन (1967) से सिंधी, 71वें संशोधन (1992) से कोंकणी, मणिपुरी व नेपाली, तथा 92वें संशोधन (2003) से बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली जोड़ी गईं, जिससे कुल संख्या 22 हो गई है।
कथन 3 गलत है: भारतीय निर्वाचन आयोग के पास जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत राजनीतिक दलों को पंजीकृत करने की शक्ति तो है, किंतु सुप्रीम कोर्ट (भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस बनाम इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल वेलफेयर वाद, 2002) के अनुसार निर्वाचन आयोग के पास धोखाधड़ी या असंवैधानिक तरीकों से पंजीकृत दलों का पंजीकरण रद्द करने की अंतर्निहित (inherent) शक्ति होती है। इसके अलावा, कथन में यह कहना कि आयोग के पास कोई शक्ति नहीं है, विधि सम्मत नहीं है।
विस्तृत अध्ययन के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
कथन 2 सही है: संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं। 21वें संशोधन (1967) से सिंधी, 71वें संशोधन (1992) से कोंकणी, मणिपुरी व नेपाली, तथा 92वें संशोधन (2003) से बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली जोड़ी गईं, जिससे कुल संख्या 22 हो गई है।
कथन 3 गलत है: भारतीय निर्वाचन आयोग के पास जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत राजनीतिक दलों को पंजीकृत करने की शक्ति तो है, किंतु सुप्रीम कोर्ट (भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस बनाम इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल वेलफेयर वाद, 2002) के अनुसार निर्वाचन आयोग के पास धोखाधड़ी या असंवैधानिक तरीकों से पंजीकृत दलों का पंजीकरण रद्द करने की अंतर्निहित (inherent) शक्ति होती है। इसके अलावा, कथन में यह कहना कि आयोग के पास कोई शक्ति नहीं है, विधि सम्मत नहीं है।
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Related Questions
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भारतीय संविधान के प्रथम भाग के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) और राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 2 के अंतर्गत संसद को विधि द्वारा ऐसे निबंधनों और शर्तों पर, जो वह ठीक समझे, संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना करने की शक्ति प्राप्त है, और इसके तहत किसी विदेशी अर्जित भू-भाग (Acquired Territory) को भारत में शामिल करने के लिए भी अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन करना अनिवार्य होता है।
2. अनुच्छेद 3 के तहत संसद किसी राज्य के क्षेत्र को बढ़ाने या घटाने, उसके नाम या सीमा में परिवर्तन करने के लिए कोई विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश के बिना संसद में पुनः स्थापित नहीं कर सकती है, तथा राष्ट्रपति द्वारा ऐसा विधेयक संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसका विचार जानने के लिए भेजा जाना अनिवार्य है, किंतु राज्य विधानमंडल द्वारा व्यक्त किया गया विचार राष्ट्रपति या संसद पर किसी भी प्रकार से बाध्यकारी नहीं होता है।
3. 'बेरूबारी यूनियन वाद (1960)' में उच्चतम न्यायालय ने यह प्रतिपादित किया था कि भारतीय संघ के किसी भू-भाग को किसी विदेशी देश को सौंपने के लिए अनुच्छेद 3 के अंतर्गत साधारण बहुमत से कानून बनाना पर्याप्त है, और इसके लिए संविधान संशोधन की कोई आवश्यकता नहीं होती है।
4. 100वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2015 के माध्यम से भारत और बांग्लादेश के बीच कुछ भू-भागों की अदला-बदली (Land Boundary Agreement) की गई थी, जिसे लागू करने के लिए संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन करना आवश्यक था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत शहरी स्थानीय शासन और नगरपालिकाओं के वित्तीय तथा प्रशासनिक प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 243-Y के प्रावधानों के अनुसार प्रत्येक राज्य का राज्यपाल, हर पांच वर्ष की समाप्ति पर एक वित्त आयोग का गठन करेगा जो नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करेगा, और यह आयोग राज्य की संचित निधि से नगरपालिकाओं को दिए जाने वाले अनुदानों के निर्धारण के लिए सिद्धांतों की संस्तुति करता है।
2. अनुच्छेद 243-ZE के तहत प्रत्येक राज्य में एक जिला योजना समिति (District Planning Committee) का गठन किया जाना अनिवार्य है, जो जिले के लिए विकास योजनाएं तैयार करेगी, तथा इस समिति के कुल सदस्यों में से कम से कम चार-तिहाई (3/4) सदस्य जिले की पंचायतों और नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा अपने में से ही चुने जाते हैं।
3. अनुच्छेद 243-W के अंतर्गत राज्य विधानमंडल विधि द्वारा नगरपालिकाओं को ऐसी शक्तियां और प्राधिकार प्रदान कर सकता है जिससे वे ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध विषयों पर आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं तैयार करने और उन्हें क्रियान्वित करने का उत्तरदायित्व संभाल सकें।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति की निर्वाचन पद्धति, पद की शक्तियों और प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद के संवैधानिक उपबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों (निर्वाचित और मनोनीत दोनों सदस्यों) के सदस्यों से मिलकर बनने वाले निर्वाचक गण के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है, जिसमें राज्य विधानसभाओं के सदस्यों को कोई भूमिका नहीं होती है।
2. संविधान के अनुच्छेद 75(1A) के अनुसार प्रधानमंत्री सहित मंत्रिपरिषद के सदस्यों की कुल संख्या लोकसभा की कुल सदस्य संख्या के पंद्रह प्रतिशत से अधिक नहीं होगी, और यह प्रतिबंध केवल केंद्र सरकार पर लागू होता है, राज्य सरकारों के मंत्रिपरिषद की संख्या पर इसका कोई संवैधानिक प्रभाव नहीं है।
3. केंद्रीय मंत्रिपरिषद के सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्धांत (Collective Responsibility) के तहत यदि लोकसभा द्वारा किसी एक कैबिनेट मंत्री के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित कर दिया जाता है, तो पूरी मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के भाग I के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) के प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 2 के अंतर्गत संसद को विधि द्वारा ऐसे निबंधनों और शर्तों पर, जो वह ठीक समझे, संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना करने की शक्ति प्राप्त है, जबकि अनुच्छेद 3 संसद को किसी राज्य के भू-भाग को बढ़ाने, घटाने या उसके नाम और सीमा में परिवर्तन करने की शक्ति देता है।
2. अनुच्छेद 3 के तहत किसी नए राज्य के निर्माण या मौजूदा राज्य की सीमाओं में परिवर्तन से संबंधित कोई भी विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश के बिना संसद के किसी भी सदन में पुनः स्थापित नहीं किया जा सकता, तथा राष्ट्रपति इस विधेयक को संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसके विचार जानने के लिए भेजते हैं, जिसके द्वारा दी गई प्रत्येक सलाह या सिफारिश को मानना संसद के लिए संवैधानिक रूप से बाध्यकारी होता है।
3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'बेरूबारी यूनियन वाद' (1960) में यह प्रतिपादित किया गया था कि अनुच्छेद 3 के अंतर्गत संसद को प्राप्त 'क्षेत्र में परिवर्तन करने की शक्ति' में किसी भारतीय राज्य के भू-भाग को किसी विदेशी देश को सौंपना (Cession) भी शामिल है, और इसके लिए संसद द्वारा साधारण बहुमत से ही संविधान संशोधन किया जा सकता है।
4. भारत और बांग्लादेश के बीच हुए भूमि सीमा समझौते (Land Boundary Agreement, 2015) को लागू करने के लिए संसद को संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत 100वें संविधान संशोधन अधिनियम का सहारा लेना पड़ा था, क्योंकि किसी भारतीय भू-भाग को विदेशी राज्य को सौंपने के लिए साधारण बहुमत पर्याप्त नहीं होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) की संरचना, निर्वाचन और आरक्षण के प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 243C के अनुसार राज्य का विधानमंडल, विधि द्वारा, पंचायतों की संरचना के संबंध में उपबंध कर सकता है, किंतु इस बात का प्रावधान अनिवार्यतः किया गया है कि किसी भी राज्य के पंचायत के सभी स्तरों पर सदस्यों का निर्वाचन प्रत्यक्ष रूप से उस पंचायत क्षेत्र के क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों से सीधे लोगों द्वारा किया जाएगा, जबकि पंचायत के अध्यक्षों का निर्वाचन प्रत्येक स्तर पर अनिवार्य रूप से अप्रत्यक्ष पद्धति से ही होगा।
2. संविधान के अनुच्छेद 243D के अंतर्गत पंचायतों के सभी स्तरों पर महिलाओं के लिए कुल विहित स्थानों (Seats) की संख्या के कम से कम एक-तिहाई (यानि 33 प्रतिशत) स्थान अनिवार्य रूप से आरक्षित होंगे, तथा यह आरक्षण प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों ही रूपों में चुने जाने वाले अध्यक्षों के कार्यालयों पर भी लागू होता है।
3. 73वें संविधान संशोधन द्वारा पंचायतों की अवधि पांच वर्ष निर्धारित की गई है, और यदि किसी पंचायत का विघटन समय से पूर्व हो जाता है, तो विघटन की तिथि से छह महीने की अवधि के भीतर नए निर्वाचन कराए जाने अनिवार्य हैं, किंतु यदि बची हुई अवधि छह महीने से कम की है, तो नई पंचायत का गठन करना आवश्यक नहीं होगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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