त्वरित लिंक्स
Indian Polity
8 views
भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की शक्तियों, क्षेत्राधिकारों और संवैधानिक स्थिति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 131 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय का मूल और अनन्य (Original and Exclusive) क्षेत्राधिकार उन विवादों तक विस्तृत है जो केंद्र और एक या अधिक राज्यों के बीच अथवा दो या अधिक राज्यों के बीच उत्पन्न होते हैं, बशर्ते यह विवाद किसी ऐसे प्राग्-संविधान (Pre-constitution) संधि या समझौते से उत्पन्न हुआ हो जिसके नियमन में कोई अपवाद न हो।
- 2. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति को उच्चतम न्यायालय से परामर्श करने की शक्ति प्राप्त है, और यदि लोक महत्व का कोई प्रश्न उत्पन्न होता है, तो उच्चतम न्यायालय राष्ट्रपति को अपनी राय देने के लिए बाध्य है, तथा न्यायालय द्वारा दी गई यह परामर्शकारी सलाह (Advisory Opinion) सरकार के लिए पूर्ण रूप से बाध्यकारी होती है।
- 3. उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों को उनके पद से हटाने की प्रक्रिया अत्यंत कठोर है, जिसके लिए संसद के प्रत्येक सदन द्वारा अपनी कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत द्वारा समर्थित समावेदन राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत किया जाना आवश्यक होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 131 के तहत उच्चतम न्यायालय के मूल क्षेत्राधिकार में यह शर्त है कि ऐसा विवाद किसी ऐसे समझौते, संविदा या सनद से उत्पन्न न हुआ हो जिसमें इसके विपरीत कोई उपबंध हो, साथ ही यह अनन्य क्षेत्राधिकार कुछ मामलों (जैसे अंतर-राज्यीय जल विवाद या वित्त आयोग के संदर्भ) में वर्जित भी है। कथन 2 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 143 के अंतर्गत राष्ट्रपति द्वारा मांगे गए परामर्श पर उच्चतम न्यायालय राय देने के लिए बाध्य नहीं है (विशेषकर पूर्व-संविधान संधियों के मामलों में यह विवेकाधीन है) और न्यायालय द्वारा दी गई सलाह राष्ट्रपति के लिए किसी भी प्रकार से बाध्यकारी नहीं होती है। कथन 3 बिल्कुल सही है; उच्चतम न्यायालय के किसी न्यायाधीश को साबित कदाचार या असमर्थता के आधार पर हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत (कुल सदस्यों का बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का 2/3 बहुमत) से प्रस्ताव पारित किया जाना अनिवार्य है। विषय की अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था का अध्ययन करें।
Related Questions
→
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के भाग XIV के अंतर्गत अनुच्छेद 315 से 323 तक संघ लोक सेवा आयोग और राज्य लोक सेवा आयोग की संरचना, सदस्यों की नियुक्ति, कार्यकाल और उनकी स्वतंत्रता से संबंधित प्रावधानों का विस्तार से वर्णन किया गया है।
2. संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य को उनके पद से केवल राष्ट्रपति द्वारा ही हटाया जा सकता है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य को उसके पद से हटाने की शक्ति केवल संबंधित राज्य के राज्यपाल के पास होती है, भले ही उनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की गई हो।
3. संघ लोक सेवा आयोग के सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और आयोग के संविधान के अनुसार आयोग के कम से कम आधे सदस्य ऐसे व्यक्ति होने चाहिए जो भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन कम से कम दस वर्ष तक पद पर रहे हों।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
राज्य विधानमंडल के अंतर्गत विधानसभा और विधान परिषद के गठन, उनकी संरचना, तथा विधायी शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 171 के अनुसार विधान परिषद के सदस्यों की कुल संख्या उस राज्य की विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती है, किंतु किसी भी स्थिति में विधान परिषद के सदस्यों की कुल संख्या 40 से कम नहीं हो सकती है (जम्मू-कश्मीर इसका अपवाद था)।
2. साधारण विधियों (Ordinary Bills) के पारित होने की प्रक्रिया में, यदि विधानसभा द्वारा पारित कोई विधेयक विधान परिषद द्वारा अस्वीकार कर दिया जाता है या विधान परिषद उसमें ऐसे संशोधन करती है जिन्हें विधानसभा स्वीकार नहीं करती है, तो विधानसभा द्वारा दूसरी बार विधेयक पारित किए जाने के पश्चात विधान परिषद उसे अधिकतम 3 महीने (प्रथम बार में 3 महीने और दूसरी बार में 1 महीना) तक ही और रोक सकती है।
3. राज्य की विधान परिषद को धन विधेयकों (Money Bills) के संबंध में अत्यंत सीमित शक्तियां प्राप्त हैं; विधानसभा द्वारा पारित धन विधेयक जब विधान परिषद के पास भेजा जाता है, तो विधान परिषद को उसे बिना किसी संशोधन के अधिकतम 21 दिनों के भीतर अपनी सिफारिशों के साथ या बिना सिफारिशों के विधानसभा को वापस लौटाना अनिवार्य होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
राज्य की कार्यपालिका और मुख्यमंत्री की शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 167 के अनुसार राज्य के मुख्यमंत्री का यह कर्तव्य है कि वह राज्य के प्रशासन से संबंधित और विधान विषयक प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राज्यपाल को संसूचित करे तथा राज्यपाल द्वारा माँगी गई सभी सूचनाएँ उन्हें प्रदान करे।
2. यदि मुख्यमंत्री विधानसभा में विश्वास मत खो देता है या उसका त्यागपत्र हो जाता है, तो मंत्रिपरिषद स्वतः विघटित हो जाती है और राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह के बिना अपने स्वविवेक से नए मुख्यमंत्री की नियुक्ति कर सकता है, बशर्ते सदन में किसी अन्य नेता के पास बहुमत का स्पष्ट दावा हो।
3. राज्य के महाधिवक्ता (Advocate General) की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है और वह अपने पद पर राज्यपाल के प्रसादपर्यंत (During the pleasure of the Governor) धारण करता है, किंतु महाधिवक्ता को राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों में बोलने और भाग लेने का अधिकार तो है, परंतु उसे मतदान का अधिकार प्राप्त नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारत के निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) और चुनाव सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, और संसद द्वारा इस संबंध में कोई विधि न बनाए जाने की स्थिति में मुख्य निर्वाचन आयुक्त को अन्य आयुक्तों की तुलना में विशेष शक्तियाँ प्राप्त होती हैं, क्योंकि बहु-सदस्यीय आयोग होने की स्थिति में निर्णय केवल मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सहमति से ही वैध माने जाते हैं।
2. दिनेश गोस्वामी समिति (1990) ने चुनाव सुधारों पर अपनी सिफारिश देते हुए यह सुझाव दिया था कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए सरकारी फंडिंग (State Funding) की व्यवस्था की जानी चाहिए, तथा निर्वाचन आयोग के सदस्यों की नियुक्ति के लिए एक कॉलेजियम प्रणाली अपनाई जानी चाहिए जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल हों।
3. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 33(7) के अंतर्गत किसी उम्मीदवार को अधिकतम दो निर्वाचन क्षेत्रों से लोकसभा या विधानसभा चुनाव लड़ने की अनुमति है, और यदि कोई अभ्यर्थी दोनों सीटों पर विजयी हो जाता है, तो उसे छह महीने के भीतर एक सीट खाली करनी होती है, तथा उप-निर्वाचन का संपूर्ण खर्च उस विजयी उम्मीदवार से वसूल किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
मूल रूप से भारतीय संविधान में कुल कितने मौलिक अधिकार थे?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.