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Indian Polity
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के भाग XIV के अंतर्गत अनुच्छेद 315 से 323 तक संघ लोक सेवा आयोग और राज्य लोक सेवा आयोग की संरचना, सदस्यों की नियुक्ति, कार्यकाल और उनकी स्वतंत्रता से संबंधित प्रावधानों का विस्तार से वर्णन किया गया है।
- 2. संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य को उनके पद से केवल राष्ट्रपति द्वारा ही हटाया जा सकता है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य को उसके पद से हटाने की शक्ति केवल संबंधित राज्य के राज्यपाल के पास होती है, भले ही उनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की गई हो।
- 3. संघ लोक सेवा आयोग के सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और आयोग के संविधान के अनुसार आयोग के कम से कम आधे सदस्य ऐसे व्यक्ति होने चाहिए जो भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन कम से कम दस वर्ष तक पद पर रहे हों।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि भारतीय संविधान के भाग XIV में अनुच्छेद 315 से 323 तक संघ और राज्य लोक सेवा आयोगों की स्वतंत्रता, शक्तियों, कार्यों और सदस्यों की नियुक्ति व निष्कासन का प्रावधान किया गया है। कथन 2 गलत है क्योंकि राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है, किंतु उन्हें हटाने की शक्ति केवल भारत के राष्ट्रपति के पास होती है, राज्यपाल के पास नहीं। कथन 3 गलत है क्योंकि संविधान में UPSC के सदस्यों की संख्या या उनके अनुभव के संबंध में कोई विशेष संख्या या प्रतिशत (जैसे आधे सदस्य) का उल्लेख नहीं किया गया है, हालांकि यह आवश्यक है कि आयोग के आधे सदस्यों के पास केंद्र या राज्य सरकार के अधीन कम से कम 10 वर्ष तक सेवा का अनुभव हो। अधिक अध्ययन के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर विजिट करें।
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अनुच्छेद 32 को आत्मा किसने कहा?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत 'मूल कर्तव्यों' (Fundamental Duties) के प्रावधानों, उनकी वैधिक स्थिति और स्वर्ण सिंह समिति की संस्तुतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल कर्तव्यों को मूल संविधान में स्वर्ण सिंह समिति की संस्तुति के आधार पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा भाग IV-A के अनुच्छेद 51A के तहत शामिल किया गया था, और समिति ने यह भी संस्तुति की थी कि मूल कर्तव्यों का पालन न करने पर संसद को दंड या कर आरोपित करने की विधि बनाने की शक्ति होनी चाहिए, जिसे इंदिरा गांधी सरकार ने संविधान में अनिवार्य रूप से लागू कर दिया था।
2. स्वर्ण सिंह समिति ने केवल 8 मूल कर्तव्यों को जोड़ने की संस्तुति की थी, किंतु 42वें संविधान संशोधन के माध्यम से कुल 10 मूल कर्तव्य जोड़े गए, तथा वर्ष 2002 में 86वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा 11वाँ मूल कर्तव्य जोड़ा गया।
3. वर्मा समिति (1999) ने कुछ विशिष्ट मूल कर्तव्यों के कार्यान्वयन के लिए कानूनी प्रावधानों की पहचान की थी, जैसे कि राष्ट्रगान और राष्ट्रीय ध्वज के अनादर को रोकने के लिए 'राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971' प्रवृत्त है, जो यह सिद्ध करता है कि मूल कर्तव्य प्रकृति से केवल नैतिक नहीं बल्कि कई मायनों में विधिनियत भी हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान में 'संशोधन' की प्रक्रिया किस देश से ली गई है?
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भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधनों और आपातकालीन उपबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा के आधार के रूप में 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) शब्द को हटाकर उसके स्थान पर 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) शब्द को जोड़ा गया, तथा यह भी प्रावधान किया गया कि राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा केवल तभी की जा सकती है जब मंत्रिमंडल (Cabinet) द्वारा लिखित रूप में इसका निर्णय राष्ट्रपति को संसूचित किया जाए।
2. राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) के दौरान अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकार स्वतः निलंबित हो जाते हैं, किंतु 44वें संविधान संशोधन द्वारा यह स्पष्ट कर दिया गया कि अनुच्छेद 20 और अनुच्छेद 21 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को आपातकाल के दौरान भी किसी भी परिस्थिति में निलंबित नहीं किया जा सकता है।
3. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा भाग XVIII में अनुच्छेद 352A को जोड़कर देश के किसी विशिष्ट भाग तक राष्ट्रीय आपातकाल के प्रवर्तन को सीमित करने की क्षेत्रीय आपातकाल की शक्ति राष्ट्रपति को प्रदान की गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संसद की विधाई प्रक्रिया और लोकसभा व राज्यसभा की शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 109 के अंतर्गत धन विधेयक (Money Bill) केवल लोकसभा में ही पुनःस्थापित किया जा सकता है और राज्यसभा इसे अस्वीकार या संशोधित नहीं कर सकती है, तथा राज्यसभा को इस पर अपनी सिफारिशें देने के लिए अधिकतम 14 दिनों का समय मिलता है, जिसे यदि राज्यसभा उस अवधि में नहीं लौटाती है, तो उस विधेयक को दोनों सदनों द्वारा उस रूप में पारित मान लिया जाता है जिस रूप में वह लोकसभा द्वारा पारित किया गया था।
2. अनुच्छेद 108 के तहत राष्ट्रपति द्वारा आहूत की जाने वाली दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (Joint Sitting) की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष द्वारा की जाती है, और यदि लोकसभा अध्यक्ष अनुपस्थित हैं, तो लोकसभा का उपाध्यक्ष या राज्यसभा का उपसभापति (उस क्रम में) इस बैठक की अध्यक्षता करता है, किंतु यदि ये सभी अनुपस्थित हों, तो उपस्थित सदस्यों द्वारा अपने में से चुने गए किसी अन्य व्यक्ति द्वारा इसकी अध्यक्षता की जा सकती है।
3. संविधान संशोधन विधेयक (Constitutional Amendment Bill), जो अनुच्छेद 368 के तहत लाया जाता है, के संबंध में लोकसभा और राज्यसभा दोनों को समान शक्तियाँ प्राप्त हैं, और ऐसे किसी विधेयक पर दोनों सदनों के बीच गतिरोध उत्पन्न होने पर अनुच्छेद 108 के अंतर्गत संयुक्त बैठक बुलाए जाने का प्रावधान स्पष्ट रूप से संविधान में किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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