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Indian Polity
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भारतीय निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) और चुनाव सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य आयुक्तों की नियुक्ति संसद द्वारा बनाई गई विधि के अधीन राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, और संविधान में निर्वाचन आयोग के सदस्यों की अहर्ताओं या योग्यताओं का उल्लेख स्पष्ट रूप से किया गया है।
  2. 2. 'मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यालय की अवधि) अधिनियम, 2023' के प्रावधानों के अनुसार, चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता (या सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता) और प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं।
  3. 3. निर्वाचन आयोग को यह संवैधानिक और विधिक अधिकार प्राप्त है कि वह चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों द्वारा अपने घोषणापत्रों (Manifesto) में किए जाने वाले वादों की वित्तीय और आर्थिक व्यवहार्यता की अनिवार्य रूप से पूर्व-जांच कर सके तथा अव्यवहारिक वादों को आचार संहिता के उल्लंघन के रूप में प्रतिबंधित कर सके।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि हालांकि अनुच्छेद 324 के तहत निर्वाचन आयोग के सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, किंतु मूल संविधान में चुनाव आयोग के सदस्यों की विशिष्ट अहर्ताओं (Qualifications) या योग्यताओं का कोई उल्लेख नहीं किया गया है। कथन 2 सत्य है; वर्ष 2023 के नए अधिनियम के अनुसार चयन समिति में प्रधानमंत्री (अध्यक्ष), लोकसभा में विपक्ष के नेता और एक कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं। कथन 3 असत्य है क्योंकि निर्वाचन आयोग के पास वर्तमान दिशा-निर्देशों के तहत राजनीतिक दलों के घोषणापत्रों के वादों की आर्थिक व्यवहार्यता की पूर्व-जांच करने की कोई विधिक शक्ति नहीं है, हालांकि वह आचार संहिता के दिशा-निर्देशों के दायरे में युक्तियुक्त परामर्श दे सकता है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर अध्ययन करें।
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