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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग III (मूल अधिकार) के अंतर्गत 'समानता के अधिकार' (अनुच्छेद 14-18) और उससे संबंधित न्यायिक निर्णयों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 14 में प्रयुक्त 'विधि के समक्ष समता' (Equality before Law) के विचार को ब्रिटिश संविधान से लिया गया है जो एक नकारात्मक अवधारणा है, जिसका तात्पर्य किसी भी व्यक्ति के पक्ष में विशिष्ट विशेषाधिकारों के अभाव से है, जबकि 'विधियों का समान संरक्षण' (Equal protection of the laws) के अमेरिकी अवधारणा को सकारात्मक माना जाता है जिसके अंतर्गत समान परिस्थितियों वाले व्यक्तियों के साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए।
- 2. सर्वोच्च न्यायालय ने 'इंदिरा साहनी वाद' (1992) में यह स्पष्ट किया था कि पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण की व्यवस्था केवल प्रारंभिक नियुक्तियों (Initial Appointments) तक ही सीमित है और इसे संविधान के अनुच्छेद 16(4) के तहत पदोन्नति (Promotion) में लागू नहीं किया जा सकता है, जिसे बाद में संसद ने संविधान संशोधन के माध्यम से अप्रभावी कर दिया।
- 3. अनुच्छेद 18 के अंतर्गत उपाधि (Titles) के अंत का प्रावधान किया गया है, जिसके तहत राज्य सेना या विद्या संबंधी सम्मान के अलावा अन्य कोई उपाधि प्रदान नहीं कर सकता है, और भारत का कोई भी नागरिक किसी विदेशी राज्य से राष्ट्रपति की पूर्व सहमति के बिना कोई भी उपाधि या भेंट स्वीकार नहीं कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि 'विधि के समक्ष समता' ब्रिटिश मूल की एक नकारात्मक अवधारणा है जो किसी विशेषाधिकार के अभाव को दर्शाती है, जबकि 'विधियों का समान संरक्षण' अमेरिकी संविधान से ली गई एक सकारात्मक अवधारणा है जो समानों में समान व्यवहार की बात करती है। कथन 2 गलत है क्योंकि 'इंदिरा साहनी वाद' (1992) में सर्वोच्च न्यायालय ने यह निर्णय दिया था कि आरक्षण केवल प्रारंभिक नियुक्तियों में दिया जा सकता है, पदोन्नति में नहीं; किंतु इसके पश्चात संसद ने 77वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1995 के माध्यम से अनुच्छेद 16(4A) जोड़कर पदोन्नति में भी आरक्षण का प्रावधान वैध कर दिया था। कथन 3 बिल्कुल सही है, अनुच्छेद 18 सैन्य और शैक्षणिक उपाधियों को छोड़कर अन्य सभी उपाधियों का अंत करता है तथा नागरिकों को विदेशी राज्य से उपाधि लेने हेतु राष्ट्रपति की सहमति अनिवार्य बनाता है। भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के विस्तृत अध्ययन के लिए इस पोर्टल का संदर्भ लें।
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भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद 'न्यायिक समीक्षा' (Judicial Review) की शक्ति प्रदान करता है?
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भारत के महान्यायवादी (Attorney General) और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार, महान्यायवादी को संसद के दोनों सदनों या उनकी संयुक्त बैठकों में बोलने और भाग लेने का पूर्ण अधिकार प्राप्त है, किंतु उसे संसद की किसी भी समिति की कार्यवाही में मतदान करने का कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है।
2. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) का कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) तक होता है, और वह अपने पद से सेवा निवृत्त होने के पश्चात भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी अन्य लाभ के पद पर या नियोजन के पात्र नहीं होता है।
3. भारत का महान्यायवादी पूर्णकालिक सरकारी कर्मचारी होता है और उसके निजी विधिक अभ्यास (Private Legal Practice) पर संविधान द्वारा पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है, जिससे वह सरकार के विरुद्ध किसी भी मामले में पैरवी नहीं कर सकता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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संविधान का कौन सा भाग निर्वाचन से संबंधित है?
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अस्पृश्यता (Untouchability) का उन्मूलन किस अनुच्छेद द्वारा किया गया है?
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भारतीय संविधान के भाग-IVक के अंतर्गत समाविष्ट 'मूल कर्तव्यों' (Fundamental Duties) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल कर्तव्यों को मूल संविधान का हिस्सा नहीं बनाया गया था, बल्कि इन्हें स्वर्ण सिंह समिति (Swaran Singh Committee) की संस्तुतियों के आधार पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में जोड़ा गया था, तथा वर्तमान में अनुच्छेद 51क के तहत कुल 11 मूल कर्तव्य नागरिकों पर आरोपित हैं।
2. ये मूल कर्तव्य केवल भारतीय नागरिकों पर ही लागू होते हैं, विदेशी नागरिकों पर नहीं, और प्रकृति से ये सभी कर्तव्य न्यायोचित (Justiciable) हैं, जिसका अर्थ है कि इनके उल्लंघन या अनुपालन न किए जाने की स्थिति में न्यायालय द्वारा सीधे रिट याचिका के माध्यम से इन्हें प्रवर्तित कराया जा सकता है।
3. 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 के माध्यम से संविधान में 11वाँ मूल कर्तव्य जोड़ा गया, जिसके अंतर्गत छह से चौदh वर्ष की आयु के बीच के अपने बालक या प्रतिपाल्य (ward) को शिक्षा के अवसर प्रदान करने का कर्तव्य प्रत्येक ऐसे माता-पिता या संरक्षक का होगा जो स्वयं इस आयु वर्ग में साक्षरता प्राप्त कर चुके हों।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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