त्वरित लिंक्स
Indian Polity
5 views
भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधनों और आपातकालीन उपबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा के आधार के रूप में 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) शब्द को हटाकर उसके स्थान पर 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) शब्द को जोड़ा गया, तथा यह भी प्रावधान किया गया कि राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा केवल तभी की जा सकती है जब मंत्रिमंडल (Cabinet) द्वारा लिखित रूप में इसका निर्णय राष्ट्रपति को संसूचित किया जाए।
- 2. राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) के दौरान अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकार स्वतः निलंबित हो जाते हैं, किंतु 44वें संविधान संशोधन द्वारा यह स्पष्ट कर दिया गया कि अनुच्छेद 20 और अनुच्छेद 21 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को आपातकाल के दौरान भी किसी भी परिस्थिति में निलंबित नहीं किया जा सकता है।
- 3. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा भाग XVIII में अनुच्छेद 352A को जोड़कर देश के किसी विशिष्ट भाग तक राष्ट्रीय आपातकाल के प्रवर्तन को सीमित करने की क्षेत्रीय आपातकाल की शक्ति राष्ट्रपति को प्रदान की गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा 'आंतरिक अशांति' शब्द को हटाकर 'सशस्त्र विद्रोह' जोड़ा गया और मंत्रिमंडल की लिखित सलाह को अनिवार्य बनाया गया। कथन 2 सही है: अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रीय आपातकाल में अनुच्छेद 19 स्वतः निलंबित हो जाता है, और 44वें संशोधन के अनुसार अनुच्छेद 20 व 21 कभी निलंबित नहीं किए जा सकते। कथन 3 गलत है क्योंकि देश के किसी भाग में आपातकाल लागू करने की शक्ति (क्षेत्रीय आपातकाल) 42वें संशोधन द्वारा नहीं, बल्कि 42वें संशोधन में कुछ अन्य बदलाव किए गए थे जबकि क्षेत्रीय आपातकाल का प्रावधान 42वें संशोधन द्वारा ही जोड़ा गया था, किंतु अनुच्छेद 352A नाम से नहीं बल्कि अनुच्छेद 352 के खंड (3) में संशोधन करके किया गया था। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था का अध्ययन करें।
Related Questions
→
रिट क्षेत्राधिकार (Writ Jurisdiction) का विस्तार कौन कर सकता है?
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों (अनुच्छेद 5-11) और नागरिकता से संबंधित विधायी शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 9 के स्पष्ट प्रावधान के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता प्राप्त कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता अनुच्छेद 8 या 9 के तहत स्वतः समाप्त हो जाएगी, किंतु यह नियम उन मामलों पर लागू नहीं होता जहाँ आपातकाल की उद्घोषणा लागू हो।
2. अनुच्छेद 11 संसद को नागरिकता के अर्जन और समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों के संबंध में विधि बनाने की संपूर्ण और अनन्य शक्ति प्रदान करता है, और इस संवैधानिक शक्ति के तहत संसद द्वारा बनाए गए किसी भी कानून को इस आधार पर असंवैधानिक घोषित नहीं किया जा सकता कि वह भारत के बाहर उत्पन्न परिस्थितियों पर भी नियंत्रण रखता है।
3. जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम और नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 के उपबंधों के तहत, भारत में देशीयकरण (Naturalisation) के माध्यम से नागरिकता प्राप्त करने के लिए आवेदक को आवेदन देने से ठीक पहले कम से कम बारह महीने भारत में निवास करना अनिवार्य होता है, और उससे पहले के चौदह वर्षों में से कुल मिलाकर कम से कम ग्यारह वर्ष भारत में बिताए होने चाहिए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
उच्च न्यायालयों की स्थापना से संबंधित प्रावधान किस अनुच्छेद में है?
→
भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) और उसके ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा 13 दिसंबर 1946 को संविधान सभा में प्रस्तुत और 22 जनवरी 1947 को सर्वसम्मति से स्वीकृत 'उद्देश्य प्रस्ताव' (Objectives Resolution) ही भारतीय संविधान की प्रस्तावना का आधार बना, जिसमें मूल रूप से 'संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न लोकतांत्रिक गणराज्य' की परिकल्पना की गई थी।
2. प्रस्तावना में उल्लिखित 'न्याय' (सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक) के आदर्श को रूस की क्रांति (1917) से प्रेरित होकर शामिल किया गया था, जबकि 'स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व' के आदर्शों को अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम से ग्रहण किया गया है।
3. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा प्रस्तावना में पहली और एकमात्र बार संशोधन किया गया जिसके तहत इसमें 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष' और 'अखंडता' शब्दों को जोड़ा गया, और सर्वोच्च न्यायालय ने 'केशवानंद भारती वाद' (1973) में यह स्पष्ट किया था कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है तथा इसमें संशोधन किया जा सकता है बशर्ते इसके मूल ढांचे (Basic Structure) का उल्लंघन न हो।
4. संविधान की प्रस्तावना देश के नागरिकों के लिए न्याय, स्वतंत्रता और समता की गारंटी देती है, किंतु यह स्वयं न्यायालयों में गैर-न्याययोचित (Non-justiciable) है, जिसका अर्थ है कि इसके प्रावधानों को किसी न्यायालय द्वारा सीधे प्रवर्तित नहीं कराया जा सकता और यह विधायिका की शक्तियों पर न तो कोई प्रतिबंध लगाती है और न ही उसे कोई अतिरिक्त शक्ति प्रदान करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति कौन थे?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.