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Indian Polity
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भारतीय संविधान सभा के गठन और उसकी निर्माण प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान सभा के सदस्यों का निर्वाचन प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के माध्यम से एकल संक्रमणीय मत द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से किया गया था, जिसमें ब्रिटिश प्रांतों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में सीटें आवंटित की गई थीं।
  2. 2. संविधान सभा में रियासतों (Princely States) के प्रतिनिधियों का चयन संबंधित रियासतों के शासकों द्वारा परामर्श के आधार पर किया जाना था, किंतु रियासतों ने संविधान सभा की बैठकों का बहिष्कार किया जिसके कारण वे शुरू में संविधान सभा में शामिल नहीं हुईं।
  3. 3. संविधान सभा के लिए जुलाई-अगस्त 1946 में हुए चुनावों में कांग्रेस ने 208 सीटें जीती थीं, जबकि मुस्लिम लीग को 73 सीटें प्राप्त हुई थीं, और इस सभा में महात्मा गांधी तथा मोहम्मद अली जिन्ना दोनों ही इसके औपचारिक सदस्य के रूप में शामिल रहे थे।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: संविधान सभा के सदस्यों का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा किया गया था। ब्रिटिश प्रांतों को उनकी जनसंख्या के अनुपात (लगभग 10 लाख की जनसंख्या पर 1 सीट) में सीटें दी गई थीं। कथन 2 सही है: रियासतों के प्रतिनिधियों का चयन रियासतों के शासकों द्वारा किया जाना था और प्रारंभ में रियासतों ने संविधान सभा से दूरी बनाए रखी तथा वे तुरंत इसमें शामिल नहीं हुईं। कथन 3 गलत है: महात्मा गांधी और मोहम्मद अली जिन्ना दोनों ही संविधान सभा के सदस्य नहीं थे। हालांकि गांधीजी के विचार सभा के निर्माण में मार्गदर्शक रहे, लेकिन वे इसके प्रत्यक्ष या औपचारिक सदस्य नहीं बने थे। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान की प्रस्तावना में अब तक केवल एक बार वर्ष 1976 में 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा संशोधन किया गया है, जिसके माध्यम से इसमें 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष' और 'अखंडता' शब्द जोड़े गए थे, और इन शब्दों को जोड़ने से प्रस्तावना के मूल ढांचे (Basic Structure) में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। 2. सर्वोच्च न्यायालय के 'बेरुबारी यूनियन वाद (1960)' में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट रूप से अभिनिर्धारित किया था कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है, और संसद को अनुच्छेद 368 के तहत प्रस्तावना में संशोधन करने की पूर्ण शक्ति प्राप्त है, बशर्ते वह संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन न करे। 3. 'केशवानंद भारती वाद (1973)' के ऐतिहासिक निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने अपने पूर्व के मत को बदलते हुए यह स्वीकार किया कि प्रस्तावना संविधान का भाग है तथा इसमें संशोधन किया जा सकता है, किंतु प्रस्तावना में उल्लेखित 'प्रभुत्व संपन्न', 'लोकतांत्रिक' और 'गणराज्य' जैसे शब्द इसके मूल ढांचे का हिस्सा हैं जिन्हें सामान्य संवैधानिक संशोधनों द्वारा भी समाप्त नहीं किया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSC) के कार्यों, स्वतंत्रता और उनके वित्तीय व्यय के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 321 के अनुसार संसद या राज्य का विधानमंडल विधि द्वारा संघ लोक सेवा आयोग या राज्य लोक सेवा आयोग को अपने-अपने क्षेत्राधिकार के अधीन आने वाले स्थानीय प्राधिकारियों या अन्य निगमों (Corporations) अथवा सार्वजनिक संस्थाओं की सेवाओं से संबंधित कृत्यों को भी सौंप सकता है। 2. लोक सेवा आयोगों के सदस्यों या कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और पेंशन सहित सभी प्रशासनिक और व्यय भार, भारत की संचित निधि (या राज्य की संचित निधि) पर 'भारित व्यय' (Charged Expenditure) घोषित किए गए हैं, जिसका अर्थ है कि इन पर राज्य विधानमंडल या संसद में मतदान नहीं कराया जा सकता है। 3. संघ लोक सेवा आयोग अपने कार्यप्रकाशन की वार्षिक रिपोर्ट सीधे राष्ट्रपति को सौंपता है, जिसे राष्ट्रपति संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाता है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग अपनी वार्षिक प्रतिवेदन रिपोर्ट संबंधित राज्य के राज्यपाल को सौंपता है, और राज्यपाल उसे राज्य विधानमंडल के समक्ष प्रस्तुत करवाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारत के महान्यायवादी (Attorney General) और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) के संवैधानिक पदों, अधिकारों और कृत्यों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार भारत के महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है, तथा उसके लिए यह संवैधानिक रूप से अनिवार्य है कि वह अपने पद पर रहते हुए किसी भी आपराधिक मामले या निजी प्रैक्टिस में भारत सरकार के विरुद्ध विधिक सलाह न दे। 2. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) को भारत के संचित निधि से किए जाने वाले सभी व्ययों की लेखापरीक्षा करने की शक्ति प्राप्त है, किंतु उसे राज्यों की संचित निधियों से होने वाले व्ययों की लेखापरीक्षा करने का कोई संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है, क्योंकि राज्यों के लेखाओं का परीक्षण संबंधित राज्य के महालेखाकार द्वारा किया जाता है। 3. महान्यायवादी को संसद के दोनों सदनों या उनकी संयुक्त बैठकों में बोलने और भाग लेने का अधिकार प्राप्त है, किंतु उसे मतदान करने का कोई अधिकार नहीं है; जबकि CAG संसद की लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee) के एक 'मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक' (Friend, Philosopher and Guide) के रूप में कार्य करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के ऐतिहासिक विकास के संदर्भ में, '1773 के रेगुलेटिंग एक्ट' (Regulating Act of 1773) के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस अधिनियम द्वारा बंगाल के गवर्नर को 'बंगाल का गवर्नर-जनरल' पदनाम दिया गया और उसकी सहायता के लिए एक चार सदस्यीय कार्यकारी परिषद का गठन किया गया, जिसमें पहले गवर्नर-जनरल वॉरेन हेस्टिंग्स थे। 2. इस अधिनियम के अंतर्गत कलकत्ता के फोर्ट विलियम में वर्ष 1774 में एक उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की स्थापना की गई, जिसमें एक मुख्य न्यायाधीश और तीन अन्य न्यायाधीश शामिल थे, तथा इस न्यायालय के निर्णयों के विरुद्ध सीधे प्रिवी काउंसिल में अपील की जा सकती थी। 3. इस अधिनियम ने कंपनी के कर्मचारियों को निजी व्यापार करने और भारतवासियों से किसी भी प्रकार की रिश्वत या उपहार लेने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया, जिससे कंपनी के प्रशासन पर ब्रिटिश संसदीय नियंत्रण का मार्ग प्रशस्त हुआ। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद 'धन विधेयक' के संबंध में विशेष प्रक्रिया का वर्णन करता है?
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