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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत अंतर-राज्यीय परिषद् (Inter-State Council) और केंद्र-राज्य वित्तीय व प्रशासनिक संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 263 के तहत राष्ट्रपति को लोक हित में अंतर-राज्यीय परिषद् की स्थापना करने की शक्ति प्राप्त है, और इस परिषद् का मुख्य कार्य राज्यों के बीच उत्पन्न विवादों की जाँच करना, उन पर सलाह देना तथा ऐसे विषयों की जाँच करना जिनमें राज्यों के समान हित निहित हैं।
  2. 2. अंतर-राज्यीय परिषद् एक स्थायी संवैधानिक निकाय है जिसके पदेन अध्यक्ष भारत के प्रधानमंत्री होते हैं, तथा इसमें सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री तथा राष्ट्रपति शासन वाले राज्यों के राज्यपाल (या प्रशासक) इसके सदस्य होते हैं।
  3. 3. सरकारीिया आयोग (Sarkaria Commission) की संस्तुति के आधार पर वर्ष 1990 में राष्ट्रपति के आदेश से अंतर-राज्यीय परिषद् का गठन किया गया था, और इस परिषद् द्वारा लिए जाने वाले सभी निर्णय सर्वसम्मति से ही लिए जाने अनिवार्य होते हैं, बहुमत के आधार पर कोई निर्णय मान्य नहीं होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 263 के अंतर्गत राष्ट्रपति को संघ और राज्यों के बीच तथा राज्यों के आपसी समन्वय के लिए अंतर-राज्यीय परिषद् स्थापित करने की शक्ति दी गई है। कथन 2 सही है क्योंकि अंतर-राज्यीय परिषद् के अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं और इसमें सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, प्रशासक तथा कुछ केंद्रीय मंत्री इसके सदस्य होते हैं। कथन 3 आंशिक रूप से गलत है क्योंकि सरकारीिया आयोग की संस्तुति पर 1990 में इसका गठन हुआ था, किंतु इसके नियम यह प्रावधान करते हैं कि परिषद् में निर्णय सामान्यतः सर्वसम्मति से लेने का प्रयास किया जाता है, फिर भी यदि मतदान की स्थिति आए तो यहाँ प्रश्नों का निर्णय उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के बहुमत से होता है, न कि केवल सर्वसम्मति की अनिवार्यता से। केंद्र-राज्य संबंधों और संस्थागत तंत्रों के बारे में अधिक जानने के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के विस्तृत अध्यायों को पढ़ सकते हैं।
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राज्य विधानमंडल के अंतर्गत विधानसभा और विधान परिषद के गठन, उनकी संरचना, तथा विधायी शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 171 के अनुसार विधान परिषद के सदस्यों की कुल संख्या उस राज्य की विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती है, किंतु किसी भी स्थिति में विधान परिषद के सदस्यों की कुल संख्या 40 से कम नहीं हो सकती है (जम्मू-कश्मीर इसका अपवाद था)। 2. साधारण विधियों (Ordinary Bills) के पारित होने की प्रक्रिया में, यदि विधानसभा द्वारा पारित कोई विधेयक विधान परिषद द्वारा अस्वीकार कर दिया जाता है या विधान परिषद उसमें ऐसे संशोधन करती है जिन्हें विधानसभा स्वीकार नहीं करती है, तो विधानसभा द्वारा दूसरी बार विधेयक पारित किए जाने के पश्चात विधान परिषद उसे अधिकतम 3 महीने (प्रथम बार में 3 महीने और दूसरी बार में 1 महीना) तक ही और रोक सकती है। 3. राज्य की विधान परिषद को धन विधेयकों (Money Bills) के संबंध में अत्यंत सीमित शक्तियां प्राप्त हैं; विधानसभा द्वारा पारित धन विधेयक जब विधान परिषद के पास भेजा जाता है, तो विधान परिषद को उसे बिना किसी संशोधन के अधिकतम 21 दिनों के भीतर अपनी सिफारिशों के साथ या बिना सिफारिशों के विधानसभा को वापस लौटाना अनिवार्य होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के भाग-IV के अंतर्गत वर्णित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) और उनसे संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 39A में 'समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता' (Equal Justice and Free Legal Aid) का प्रावधान किया गया है, जिसे मूल संविधान में शामिल नहीं किया गया था, बल्कि इसे 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा अंतःस्थापित किया गया था। 2. अनुच्छेद 43B के अनुसार राज्य, सहकारी समितियों के स्वैच्छिक गठन, स्वायत्त कामकाज, लोकतांत्रिक नियंत्रण और पेशेवर प्रबंधन को बढ़ावा देने का प्रयास करेगा, और इस अनुच्छेद को 97वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2011 द्वारा नीति निर्देशक तत्वों में जोड़ा गया था। 3. नीति निर्देशक तत्वों के अंतर्गत उल्लिखित पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन तथा वन एवं वन्यजीवों की रक्षा से संबंधित प्रावधान मूल संविधान के अनुच्छेद 48 में ही निहित थे, जिन्हें किसी भी संवैधानिक संशोधन द्वारा परिवर्तित नहीं किया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 249' के अंतर्गत राज्य सूची के विषयों पर संसद की कानून बनाने की शक्ति (Power of Parliament to legislate with respect to a matter in the State List in the national interest) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संसद को राज्य सूची के किसी विषय पर तब कानून बनाने की शक्ति प्राप्त होती है जब राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से एक संकल्प पारित करे कि राष्ट्रीय हित में ऐसा करना आवश्यक या expedient है। 2. इस प्रकार संसद द्वारा पारित कानून अनिश्चितकाल के लिए प्रवृत्त रहता है और तब तक लागू रहता है जब तक कि संसद खुद उसे निरस्त न कर दे, भले ही राज्य सभा द्वारा पारित संकल्प की अवधि समाप्त हो चुकी हो। 3. अनुच्छेद 249 के अंतर्गत राज्य सभा द्वारा पारित ऐसा संकल्प एक बार में अधिकतम दो वर्ष की अवधि के लिए ही प्रवृत्त रहता है, हालांकि इसे आगे बढ़ाने के लिए नए संकल्प बार-बार पारित किए जा सकते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) और चुनाव सुधारों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग की स्थापना एक स्थायी और स्वतंत्र निकाय के रूप में की गई है, जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के अधीन (संसदीय अधिनियम के विनियमन के अधीन) की जाती है। 2. वर्ष 1993 में संसद द्वारा अधिनियमित संशोधन के पश्चात मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य दो निर्वाचन आयुक्तों को समान शक्तियाँ प्राप्त हो गईं तथा निर्वाचन आयोग के भीतर किसी निर्णय पर मतभेद होने की स्थिति में बहुमत के आधार पर निर्णय लेने की वैधानिक व्यवस्था की गई है। 3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'अनूप बरनवाल बनाम भारत संघ (2023)' मामले में दिए गए ऐतिहासिक निर्णय के अनुसार, जब तक संसद इस विषय पर कोई विशिष्ट कानून नहीं बनाती, तब तक प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) से मिलकर बनी एक उच्च-स्तरीय उच्चाधिकार प्राप्त समिति की सलाह पर राष्ट्रपति द्वारा मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति की जाएगी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के प्रथम भाग के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 2 के तहत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना ऐसे निबंधनों और शर्तों पर कर सके जो वह ठीक समझे, और इस शक्ति के अंतर्गत भारतीय संघ में किसी विदेशी भू-भाग को शामिल करने के लिए संविधान संशोधन करना अनिवार्य होता है। 2. अनुच्छेद 3 के अंतर्गत संसद को किसी राज्य के क्षेत्र को बढ़ाने, घटाने, उसके नाम या सीमा में परिवर्तन करने की शक्ति प्राप्त है, किंतु इस प्रकार का कोई भी अध्यादेश या विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश के बिना संसद के किसी भी सदन में पुनः स्थापित नहीं किया जा सकता है, तथा राष्ट्रपति इस विधेयक को संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसका मत जानने के लिए भेजता है, जो राष्ट्रपति या संसद पर बाध्यकारी होता है। 3. 'बेरूबारी संघ मामला (1960)' में उच्चतम न्यायालय ने यह निर्धारित किया था कि भारतीय संघ के किसी भू-भाग को किसी अन्य देश को सौंपने (Cession of territory) के लिए अनुच्छेद 3 के अंतर्गत संसद द्वारा साधारण बहुमत से साधारण विधि पारित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन अधिनियम पारित करना अनिवार्य है। 4. संविधान के अनुच्छेद 4 के अनुसार अनुच्छेद 2 और अनुच्छेद 3 के अधीन नए राज्यों के प्रवेश, स्थापना, सीमा परिवर्तन आदि से संबंधित विधियों को अनुच्छेद 368 के प्रयोजन के लिए संविधान का संशोधन नहीं माना जाएगा, जिसका अर्थ है कि ऐसी विधियाँ साधारण बहुमत और सामान्य विधायी प्रक्रिया द्वारा ही पारित की जा सकती हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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