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BPSC TRE 4.0
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1757 से 1857 के मध्य भारत में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध हुए अन्य जन आंदोलनों और जनजातीय विद्रोहों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 'संथाल विद्रोह' (1855-56) के प्रमुख नेता सिद्धू, कान्हू, चांद और भैरव थे, जिन्होंने राजमहल की पहाड़ियों के क्षेत्र (दामिन-ए-कोह) में महाजनों, साहूकारों और ब्रिटिश अधिकारियों के दमन के विरुद्ध पारंपरिक हथियारों के साथ सशस्त्र संघर्ष किया था।
  2. 2. 'पागल पंथी विद्रोह' एक अर्ध-धार्मिक संप्रदाय था, जिसकी स्थापना करम शाह ने की थी, परंतु इस विद्रोह का सर्वाधिक उग्र और व्यापक रूप उनके पुत्र टीटू मीर के नेतृत्व में बंगाल के शेरपुर क्षेत्र में जमींदारों के भारी करों के विरुद्ध देखने को मिला था।
  3. 3. 'कोल विद्रोह' (1831-32)छोटा नागपुर क्षेत्र में हुआ एक प्रमुख जनजातीय आंदोलन था, जिसका नेतृत्व बुद्ध भगत, जोआ भगत और मदारा सिंह जैसे नेताओं ने किया था, तथा यह विद्रोह मुख्य रूप से उनकी भूमि पर बाहरी लोगों (दिकुओं) के प्रवेश और लगान वृद्धि के विरोध में था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सत्य है क्योंकि 1855-56 का संथाल विद्रोह (जिसे हूल विद्रोह भी कहा जाता है) सिद्धू और कान्हू के नेतृत्व में दामिन-ए-कोह क्षेत्र में महाजनों और पुलिस के अत्याचारों के खिलाफ हुआ था। कथन 2 असत्य है क्योंकि पागल पंथी विद्रोह के उग्र चरण का नेतृत्व टीपू (टीटू नहीं, टीपू शाह) ने किया था, जबकि टीटू मीर (मीर निसार अली) ने बंगाल में 'वहाबी आंदोलन' से जुड़े 'तितू मीर का नारियल आंदोलन' या बारसात विद्रोह का नेतृत्व किया था। कथन 3 सत्य है क्योंकि 1831-32 का कोल विद्रोह छोटा नागपुर के बुद्ध भगत के नेतृत्व में बाहरी लोगों (दिकुओं) के विरुद्ध हुआ था। अधिक अभ्यास और अध्ययन सामग्री के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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