त्वरित लिंक्स
BPSC TRE 4.0
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मेण्डल के वंशागति के नियमों (Laws of Inheritance) और आनुवंशिकी के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. मेण्डल के स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम (Law of Independent Assortment) इस मान्यता पर आधारित है कि जब दो या दो से अधिक लक्षणों के जोड़े एक साथ क्रॉस कराए जाते हैं, तो एक लक्षण की वंशागति दूसरे लक्षण की वंशागति से पूरी तरह स्वतंत्र होती है, जो मुख्य रूप से द्वि-संकर क्रॉस (Dihybrid Cross) के 9:3:3:1 के लक्षणप्ररूप (Phenotypic) अनुपात में परिलक्षित होती है।
- 2. 'जीन विनिमय' (Crossing Over) की प्रक्रिया अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) के दौरान पैचिटीन (Pachytene) अवस्था में समजात गुणसूत्रों (Homologous Chromosomes) के गैर-सिस्टर क्रोमैटिड्स के बीच आनुवंशिक सामग्री के आदान-प्रदान के कारण होती है, जिससे संतानों में नई विविधताओं (Variations) का जन्म होता है।
- 3. अपूर्ण प्रभाविता (Incomplete Dominance) का उत्कृष्ट उदाहरण 'मिराबिलिस जलापा' (4 बजे का पौधा) है, जिसमें समयुग्मजी लाल और सफेद फूलों के संकरण से प्रथम पीढ़ी ($F_1$) में गुलाबी रंग के फूल प्राप्त होते हैं, जो मेण्डल के प्रभाविता के नियम का पूर्ण अपवाद प्रस्तुत करता है।
- 4. सह-प्रभाविता (Co-dominance) के अंतर्गत मानव में 'एबीओ रक्त समूह' (ABO Blood Group) का निर्धारण होता है, जहाँ एलील $I^A$ और $I^B$ दोनों ही एक साथ अपने प्रभाव को सह-प्रभावी रूप से प्रदर्शित करते हैं, किंतु इसमें बहुयुग्मविकल्पी (Multiple Allelism) की कोई भूमिका नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए कथनों में कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। मेण्डल का स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम द्वि-संकर क्रॉस पर आधारित है और 9:3:3:1 का अनुपात देता है। जीन विनिमय अर्धसूत्री विभाजन की पैचिटीन अवस्था में होता है। अपूर्ण प्रभाविता 'मिराबिलिस जलापा' में देखी जाती है। कथन 4 असत्य है क्योंकि ABO रक्त समूह बहुयुग्मविकल्पी (Multiple Allelism) का भी एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें तीन एलील ($I^A, I^B, i$) शामिल होते हैं। ऐसी उच्चस्तरीय तैयारी के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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1757 से 1857 के मध्य भारत में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध हुए अन्य जन आंदोलनों और जनजातीय विद्रोहों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'संथाल विद्रोह' (1855-56) के प्रमुख नेता सिद्धू, कान्हू, चांद और भैरव थे, जिन्होंने राजमहल की पहाड़ियों के क्षेत्र (दामिन-ए-कोह) में महाजनों, साहूकारों और ब्रिटिश अधिकारियों के दमन के विरुद्ध पारंपरिक हथियारों के साथ सशस्त्र संघर्ष किया था।
2. 'पागल पंथी विद्रोह' एक अर्ध-धार्मिक संप्रदाय था, जिसकी स्थापना करम शाह ने की थी, परंतु इस विद्रोह का सर्वाधिक उग्र और व्यापक रूप उनके पुत्र टीटू मीर के नेतृत्व में बंगाल के शेरपुर क्षेत्र में जमींदारों के भारी करों के विरुद्ध देखने को मिला था।
3. 'कोल विद्रोह' (1831-32)छोटा नागपुर क्षेत्र में हुआ एक प्रमुख जनजातीय आंदोलन था, जिसका नेतृत्व बुद्ध भगत, जोआ भगत और मदारा सिंह जैसे नेताओं ने किया था, तथा यह विद्रोह मुख्य रूप से उनकी भूमि पर बाहरी लोगों (दिकुओं) के प्रवेश और लगान वृद्धि के विरोध में था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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किस वायसराय के कार्यकाल में 'बंगाल विभाजन' (Partition of Bengal) हुआ था?
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