शिक्षा दर्शन एवं शिक्षा चिंतक
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19वीं शताब्दी के दौरान भारत में हुए सामाजिक एवं सांस्कृतिक सुधार आंदोलनों और उनके संस्थापकों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. राजा राममोहन राय द्वारा वर्ष 1815 में स्थापित 'आत्मीय सभा' और वर्ष 1828 में स्थापित 'ब्रह्म समाज' का मुख्य उद्देश्य मूर्तिपूजा का विरोध, एकेश्वरवाद का प्रचार तथा हिंदू समाज की कुप्रथियों (जैसे सती प्रथा) का उन्मूलन करना था।
- 2. वर्ष 1867 में केशव चंद्र सेन की प्रेरणा से मुंबई में आत्माराम पांडुरंग द्वारा 'प्रार्थना समाज' की स्थापना की गई, जिसका मुख्य ध्यान अंतरजातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह और महिला शिक्षा को बढ़ावा देने के साथ-साथ महाराष्ट्र के सामाजिक ताने-बाने को सुधारना था।
- 3. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा वर्ष 1875 में बॉम्बे में स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और पाखंड तथा मूर्तिपूजा का खंडन करते हुए 'शुद्धि आंदोलन' की शुरुआत की, जिसके माध्यम से उन हिंदुओं को पुनः हिंदू धर्म में वापस लाया गया जिन्होंने किन्हीं कारणों से अन्य धर्म अपना लिया था।
- 4. यंग बंगाल आंदोलन के प्रणेता हेनरी विवियन डेरोज़ियो ने कलकत्ता के हिंदू कॉलेज में शिक्षण कार्य के दौरान अपने विद्यार्थियों को स्वतंत्र रूप से सोचने, तार्किक विश्लेषण करने और तत्कालीन सामाजिक परंपराओं तथा रूढ़ियों पर खुलकर प्रश्न उठाने के लिए प्रेरित किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन 19वीं शताब्दी के सामाजिक एवं सांस्कृतिक जागरण के संदर्भ में पूर्णतः सत्य हैं। राजा राममोहन राय ने 'आत्मीय सभा' (1815) और 'ब्रह्म समाज' (1828) के माध्यम से धार्मिक सुधारों की नींव रखी। प्रार्थना समाज (1867) ने महाराष्ट्र में सामाजिक सुधार के कार्य किए। स्वामी दयानंद सरस्वती के आर्य समाज (1875) ने वेदों के पुनरुत्थान और शुद्धि आंदोलन को बढ़ावा दिया, जबकि हेनरी विवियन डेरोज़ियो का 'यंग बंगाल आंदोलन' तार्किक सोच और बौद्धिक क्रांति का प्रतीक था। इस तरह के अन्य उच्च-स्तरीय प्रश्नों का अभ्यास करने के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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19वीं शताब्दी में भारत में हुए सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आंदोलनों के संदर्भ…
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बंगाल विभाजन (1905) एवं स्वदेशी आंदोलन के संदर्भ में…
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बिहार के इतिहास और विविध सांस्कृतिक परिदृश्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रसिद्ध यूनानी राजदूत मेगास्थनीज, जो मौर्य सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में आया था, ने अपनी पुस्तक 'इंडिका' में पाटलिपुत्र नगर प्रशासन का विस्तृत वर्णन किया है, जिसके अनुसार नगर का प्रशासन 30 सदस्यों की एक सभा द्वारा संचालित होता था जो छह समितियों में विभाजित थी।
2. प्राचीन बिहार में स्थित तक्षशिला विश्वविद्यालय मौर्य साम्राज्य के पतन के पश्चात गुप्त काल में भी उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र बना रहा, जहाँ आर्यभट्ट और चाणक्य जैसे महान विद्वानों ने अध्ययन और अध्यापन कार्य किया था।
3. मध्यकालीन बिहार के संदर्भ में, सूफी संत मखैरूम-उल-मुल्क (या हज़रत शरफुद्दीन अहमद मनेरी) का फिरदौसी सिलसिला बिहार में सर्वाधिक लोकप्रिय रहा, और उनका मुख्य केंद्र मनेर तथा बिहार शरीफ (खानकाह) था।
4. ब्रिटिश काल में 1921 में स्थापित 'बिहार विद्यापीठ' के प्रथम कुलपति (चांसलर) महात्मा गांधी थे, जबकि इसके प्राचार्य के रूप में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने संस्था के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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19वीं शताब्दी के सामाजिक एवं सांस्कृतिक सुधार आंदोलनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा 1815 में स्थापित 'आत्मीय सभा' और 1828 में स्थापित 'ब्रह्म समाज' का मुख्य उद्देश्य मूर्तिपूजा का खंडन, एकेश्वरवाद का प्रचार तथा हिंदू समाज में व्याप्त कुरीतियों (जैसे सती प्रथा और बहुविवाह) का विरोध करना था।
2. वर्ष 1867 में केशव चंद्र सेन की प्रेरणा से मुंबई में आत्माराम पांडुरंग द्वारा स्थापित 'प्रार्थना समाज' का मुख्य ध्यान अंतरजातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह और महिलाओं की शिक्षा पर था, तथा इसके प्रमुख विचारकों में महादेव गोविंद रानाडे भी शामिल थे।
3. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और इन्होंने रूढ़िवादी पौराणिक हिंदू धर्म की आलोचना करते हुए पाखंड खंडनी पताका फहराई तथा शुद्धि आंदोलन की शुरुआत की।
4. यंग बंगाल आंदोलन के प्रणेता हेनरी विवियन डेरोज़ियो ने पारंपरिक हिंदू कॉलेज की शिक्षा प्रणाली के अंतर्गत सामाजिक रूढ़ियों का समर्थन किया और ब्रिटिश शासन की नीतियों की खुली प्रशंसा करते हुए राजनीतिक सुधारों का पुरजोर विरोध किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार में 1970 के दशक के छात्र आंदोलन और जयप्रकाश नारायण (जेपी) की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मार्च 1974 में छात्रों द्वारा बिहार में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, खाद्यान्न संकट और प्रशासनिक भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू किए गए आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए जब छात्रों ने जयप्रकाश नारायण से अनुरोध किया, तो उन्होंने इसे 'सम्पूर्ण क्रांति' (Total Revolution) का रूप देने की शर्त पर स्वीकार किया।
2. जयप्रकाश नारायण ने पटना के गांधी मैदान में एक ऐतिहासिक जनसभा में 'सम्पूर्ण क्रांति' का आह्वान किया था, जिसमें सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, वैचारिक और शैक्षणिक क्षेत्रों में आमूल-चूल परिवर्तन का लक्ष्य रखा गया था।
3. जेपी आंदोलन के दौरान ही बिहार विधानसभा को भंग करने की मांग को लेकर 'बिहार बंद' और 'घेरा डालो' जैसे कार्यक्रम चलाए गए थे, और इसी आंदोलन की पृष्ठभूमि ने आगे चलकर देश में वर्ष 1975 में आपातकाल (Emergency) की घोषणा का मार्ग प्रशस्त किया था।
4. जयप्रकाश नारायण द्वारा संचालित इस छात्र आंदोलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं की कोई भी सहभागिता नहीं थी, क्योंकि जेपी ने वामपंथियों और दक्षिणपंथियों दोनों को इस आंदोलन से पूरी तरह दूर रखा था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बंगाल विभाजन (1905) और इसके परिणामस्वरूप शुरू हुए स्वदेशी आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल विभाजन के निर्णय की आधिकारिक घोषणा 20 जुलाई 1905 को लॉर्ड कर्जन द्वारा की गई थी, और इसके विरोध में 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में ऐतिहासिक बैठक आयोजित की गई जहाँ 'स्वदेशी आंदोलन' का औपचारिक प्रस्ताव पारित किया गया था।
2. बंगाल विभाजन औपचारिक रूप से 16 अक्टूबर 1905 को प्रभावी हुआ, जिस दिन पूरे बंगाल में 'शोक दिवस' के रूप में मनाया गया, लोगों ने उपवास रखा, बंगाली समाज के बीच एकता के प्रतीक के रूप में एक-दूसरे की कलाई पर 'राखी बांधी गई', और रवींद्रनाथ टैगोर के आह्वान पर 'आमार सोनार बांग्ला' गीत गाया गया।
3. स्वदेशी आंदोलन के दौरान आर्थिक बहिष्कार और आत्मनिर्भरता पर विशेष जोर दिया गया, जिसके तहत बंगाल में राष्ट्रीय शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 1906 में 'नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशन' (राष्ट्रीय शिक्षा परिषद) की स्थापना की गई थी।
4. कलकत्ता के बाहर देश के अन्य हिस्सों में स्वदेशी आंदोलन का नेतृत्व करने वाले प्रमुख नेताओं में पंजाब में लाला लाजपत राय, मद्रास में चिदंबरम पिल्लै और उत्तर प्रदेश में सैयद حیدر رضا (Syed Haidar Raza) शामिल थे, जबकि बंबई प्रेसीडेंसी में इस आंदोलन का नेतृत्व बाल गंगाधर तिलक द्वारा किया गया था।
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चंपारण सत्याग्रह (1917) और स्वतंत्रता आंदोलन में बिहार की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजकुमार शुक्ल के विशेष अनुरोध पर महात्मा गांधी चंपारण आए थे, जहाँ 'तीनकथा पद्धति' के अंतर्गत यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों से उनकी कुल भूमि के 3/20वें हिस्से पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करने का अनुबंध कराया जाता था, जिसके विरुद्ध यह सत्याग्रह भारत में गांधीजी का पहला सफल सविनय प्रयोग बना।
2. चंपारण जाँच समिति (Champarana Agrarian Committee) के एक सदस्य के रूप में ब्रिटिश सरकार द्वारा महात्मा गांधी को भी इस आयोग का सदस्य मनोनीत किया गया था, तथा इस समिति की संस्तुतियों के आधार पर 'चंपारण कृषि अधिनियम, 1917' पारित किया गया, जिसके तहत तीनकथा प्रथा को कानूनी रूप से समाप्त कर दिया गया और अवैध रूप से वसूले गए धन का एक हिस्सा किसानों को वापस लौटाया गया।
3. चंपारण सत्याग्रह की सफलता के दौरान महात्मा गांधी के साथ बराज किशोर प्रसाद, राजेंद्र प्रसाद, अनुग्रह नारायण सिंह, आचार्य कृपलानी और मधुलि जैसे स्थानीय प्रबुद्ध वकीलों और नेताओं ने महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया, जिससे बिहार में राष्ट्रीय राजनीति की एक मजबूत नींव पड़ी।
4. वर्ष 1921 में असहयोग आंदोलन के आगमन के समय बिहार में विद्यार्थियों के लिए शिक्षा के वैकल्पिक संस्थानों के रूप में 'बिहार नेशनल कॉलेज' की स्थापना की गई, जिसके प्राचार्य के रूप में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कार्य किया, और इसी काल में सदाकत आश्रम से मजहरुल हक के संपादन में 'द मदरलैंड' अखबार निकाला गया।
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इनमें से किसने अपनी रिपोर्ट में 'शिक्षा के चार स्तंभों' की बात की है?
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