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BPSC TRE 4.0
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भारतीय अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति (Inflation), मौद्रिक नीति और केन्द्र-राज्य वित्तीय संबंधों (Fiscal Federalism) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा संचालित मौद्रिक नीति समिति (MPC) का मुख्य वैधानिक लक्ष्य उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-Combined) के आधार पर मुद्रास्फीति को 4% के लक्ष्य पर केंद्रित रखना है, जिसमें +/- 2% की सहिष्णुता सीमा (Tolerance Band) निर्धारित की गई है।
- 2. संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत गठित वित्त आयोग (Finance Commission) केन्द्र और राज्यों के बीच करों के शुद्ध आगमों के वितरण की संस्तुति करता है, तथा राज्यों की राजकोषीय क्षमता और आवश्यकताओं में संतुलन स्थापित करने के लिए ऊर्ध्वाधर (Vertical) और क्षैतिज (Horizontal) हस्तांतरण के सिद्धांतों का निर्धारण करता है।
- 3. राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम, 2003 के संशोधित प्रावधानों के तहत केंद्र सरकार के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वह मध्यम अवधि में राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 3% तक सीमित करे, जिसे हाल के वर्षों में वैश्विक आर्थिक झटकों के कारण और अधिक लचीला बनाया गया है।
- 4. जब सरकार अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए अपने सार्वजनिक व्यय में भारी कटौती करती है और कराधान में वृद्धि करती है, तो इसे 'विस्तारवादी राजकोषीय नीति' (Expansionary Fiscal Policy) कहा जाता है, जो समग्र मांग को बढ़ाने में सहायक होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सत्य है क्योंकि आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) का लक्ष्य उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित मुद्रास्फीति को 4% (2% के सहिष्णुता बैंड के साथ) रखना है। कथन 2 सत्य है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत वित्त आयोग केंद्र और राज्यों के बीच करों के उर्ध्व और क्षैतिज वितरण की सिफारिश करता है। कथन 3 सत्य है क्योंकि FRBM अधिनियम के अंतर्गत राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने का प्रावधान है। कथन 4 असत्य है क्योंकि सार्वजनिक व्यय में कटौती और करों में वृद्धि को 'संकुचनकारी राजकोषीय नीति' (Contractionary Fiscal Policy) कहा जाता है, न कि विस्तारवादी। अधिक विस्तृत अध्ययन और बिहार शिक्षक परीक्षा की तैयारी के लिए आप बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर जा सकते हैं।
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बिहार के इतिहास में 'जयप्रकाश नारायण (जेपी आंदोलन)' और 'छात्र आंदोलन' (1974) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1974 में छात्र आंदोलन की शुरुआत मुख्य रूप से बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, खाद्यान्नों की कमी और शैक्षणिक संस्थानों में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ पटना विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा 'बिहार छात्र संघर्ष समिति' के गठन के साथ हुई थी।
2. जयप्रकाश नारायण ने इस आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए दो शर्तें रखी थीं—पहला यह कि आंदोलन पूरी तरह से अहिंसक रहेगा और दूसरा यह कि इसका प्रभाव केवल बिहार तक सीमित न रहकर पूरे देश में 'संपूर्ण क्रांति' (Total Revolution) का रूप लेगा।
3. 5 जून 1974 को पटना के गांधी मैदान में आयोजित ऐतिहासिक रैली में जयप्रकाश नारायण ने इंदिरा गांधी की सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए 'समग्र क्रांति' या 'संपूर्ण क्रांति' का आह्वाहन किया था, जिसमें सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिवर्तन का लक्ष्य रखा गया था।
4. जेपी आंदोलन के दौरान ही आपातकाल (Emergency) की पृष्ठभूमि तैयार हुई थी, और इसी आंदोलन की प्रतिक्रिया स्वरूप केंद्र सरकार ने वर्ष 1977 के आम चुनावों में भारी बहुमत प्राप्त किया था जिससे जनता पार्टी की पहली गैर-कांग्रेस सरकार केंद्र में बनी थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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भारतीय संविधान में प्रदत्त मूल अधिकार, राज्य के नीतिनिदेशक तत्वों (DPSP) और मूल कर्तव्यों के अंतर्संबंधों तथा उनके न्यायिक पुनरावलोकन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. केशवानंद भारती मामले (1973) के पश्चात न्यायपालिका ने यह स्पष्ट किया कि यद्यपि मौलिक अधिकार और नीतिनिदेशक तत्व एक-दूसरे के पूरक हैं, तथापि किसी भी स्थिति में संसद अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन करके नीतिनिदेशक तत्वों को लागू करने के लिए भाग III (मूल अधिकारों) के प्रावधानों को पूर्णतः निष्प्रभावी या समाप्त नहीं कर सकती यदि वह संविधान के 'मूल ढांचा' (Basic Structure) का उल्लंघन करता हो।
2. स्वर्ण सिंह समिति की संस्तुतियों के आधार पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में जोड़े गए अनुच्छेद 31-C के अंतर्गत यह प्रावधान किया गया कि अनुच्छेद 39(b) और 39(c) में वर्णित नीतिनिदेशक तत्वों को प्रभावी बनाने के लिए बनाए गए किसी भी कानून को इस आधार पर शून्य घोषित नहीं किया जा सकता कि वह अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों का उल्लंघन करता है।
3. वर्ष 2002 में 86वें संविधान संशोधन अधिनियम के माध्यम से जोड़े गए 11वें मूल कर्तव्य (अनुच्छेद 51A(k)) के अंतर्गत 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों के माता-पिता या संरक्षक का यह कर्तव्य बनाया गया कि वे अपने बच्चों को शिक्षा के अवसर प्रदान करें, तथा इसी संशोधन द्वारा संविधान में अनुच्छेद 21A जोड़कर शिक्षा के अधिकार को मौलिक अधिकार का दर्जा दिया गया।
4. मूल कर्तव्य, जो कि मुख्य रूप से आयरिश संविधान से प्रेरित होकर भारतीय संविधान के भाग IV-A में शामिल किए गए हैं, प्रकृति में न्यायोचित (Justiciable) हैं, अर्थात उनके उल्लंघन की स्थिति में देश के उच्च न्यायालयों या उच्चतम न्यायालय द्वारा रिट (Writ) जारी करके इन्हें प्रवर्तित कराया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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