भारतीय अर्थव्यवस्था में आर्थिक नियोजन (Economic Planning), बजट निर्माण और राजकोषीय नीति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारत में पंचवर्षीय योजनाओं की रूपरेखा तैयार करने की अंतिम स्वीकृति राष्ट्रीय विकास परिषद (NDC) द्वारा दी जाती थी, जिसकी स्थापना वर्ष 1952 में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में की गई थी और इसमें सभी राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल होते थे।
- 2. 'शून्य आधार बजट' (Zero-Base Budgeting - ZBB) की अवधारणा के अंतर्गत प्रत्येक वित्तीय वर्ष में नए बजट के खर्चों का मूल्यांकन पिछले वर्ष के बजट आवंटन को आधार बनाकर किया जाता है, जिसमें पुराने खर्चों को स्वतः स्वीकृत मान लिया जाता है।
- 3. राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम, 2003 का मुख्य उद्देश्य देश में वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करना है, जिसके तहत केंद्र सरकार के लिए राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के एक निश्चित लक्ष्य तक सीमित करने का प्रावधान किया गया है।
- 4. भारत सरकार द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले वार्षिक वित्तीय विवरण (बजट) का उल्लेख भारतीय संविधान के अनुच्छेद 112 में किया गया है, जिसके अनुसार संसद की पूर्व अनुमति के बिना संचित निधि से कोई भी धन नहीं निकाला जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
Detailed Explanation
कथन 1 सत्य है क्योंकि राष्ट्रीय विकास परिषद (NDC) की स्थापना 6 अगस्त 1952 को पंचवर्षीय योजनाओं के अनुमोदन के लिए की गई थी। कथन 2 असत्य है क्योंकि 'शून्य आधार बजट' (Zero-Base Budgeting) में पिछले बजट के खर्चों को आधार नहीं बनाया जाता, बल्कि हर नए साल के बजट को बिल्कुल 'शून्य' से शुरू हुआ मानकर प्रत्येक खर्च के औचित्य को नए सिरे से परखा जाता है। कथन 3 सत्य है, FRBM अधिनियम 2003 वित्तीय अनुशासन और राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने के लिए है। कथन 4 सत्य है, संविधान के अनुच्छेद 112 के अनुसार वार्षिक वित्तीय विवरण (बजट) संसद में प्रस्तुत किया जाता है और संचित निधि से व्यय के लिए विनियोग विधेयक पारित करना अनिवार्य है। अपनी तैयारी को और मजबूत करने के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर जाएँ।