BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

BPSC TRE 4.0
9 views

अकार्बनिक रसायन (Inorganic Chemistry) के अंतर्गत संक्रमण धातुओं (Transition Metals), उनके परिसरों (Complex Compounds) और समन्वय रसायन (Coordination Chemistry) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. वर्नर के उपसहसंयोजन सिद्धांत (Werner's Coordination Theory) के अनुसार, संक्रमण धातु आयनों में दो प्रकार की संयोजकताएँ पाई जाती हैं - प्राथमिक संयोजकता (जो आयननीय होती है और ऑक्सीकरण संख्या को दर्शाती है) तथा द्वितीयक संयोजकता (जो अनआयननीय होती है और समन्वय संख्या को निर्धारित करती है)।
  2. 2. क्रिस्टल फील्ड सिद्धांत (Crystal Field Theory - CFT) के अनुसार, जब लिगेंड धातु आयन के संपर्क में आते हैं, तो धातु की 'd' कक्षकों का अपभ्रंश (Degeneracy) समाप्त हो जाता है और वे ऊर्जा के आधार पर विभाजित (Split) हो जाते हैं, जिसमें ऑक्टाहेड्रल (अष्टफलकीय) क्षेत्र में $t_{2g}$ कक्षक उच्च ऊर्जा स्तर पर और $e_g$ कक्षक निम्न ऊर्जा स्तर पर चले जाते हैं।
  3. 3. 'प्रभावी परमाणु क्रमांक' (Effective Atomic Number - EAN) नियम के अनुसार, कई समन्वय यौगिकों में धातु आयन और लिगेंडों द्वारा साझा किए गए इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या निकटतम अक्रिय गैस (Noble Gas) के परमाणु क्रमांक के बराबर होने पर यौगिक अत्यधिक स्थायी हो जाता है।
  4. 4. काइरैलिटी (Chirality) और ऑप्टिकल आइसोमेरिज्म (प्रकाशिक समावयवता) मुख्य रूप से उन अष्टफलकीय परिसरों में देखी जाती है जो सममित (Symmetrical) प्रकृति के होते हैं और जिनमें समतल (Plane of symmetry) या केंद्र (Center of symmetry) विद्यमान होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सत्य है क्योंकि वर्नर के सिद्धांत के अनुसार प्राथमिक संयोजकता आयननीय (ionisable) होती है जो ऑक्सीकरण अवस्था को संतुष्ट करती है, जबकि द्वितीयक संयोजकता अनआयननीय (non-ionisable) होती है जो समन्वय संख्या को निर्धारित करती है। कथन 2 असत्य है क्योंकि ऑक्टाहेड्रल क्षेत्र में कम ऊर्जा वाले कक्षक $t_{2g}$ होते हैं और उच्च ऊर्जा वाले कक्षक $e_g$ होते हैं (न कि इसके विपरीत)। कथन 3 सत्य है, प्रभावी परमाणु क्रमांक (EAN) नियम के तहत धातु आयन के इलेक्ट्रॉनों की संख्या और लिगेंडों से प्राप्त इलेक्ट्रॉनों का योग निकटतम अक्रिय गैस के समान होने पर स्थिरता बढ़ती है। कथन 4 असत्य है क्योंकि प्रकाशिक समावयवता के लिए परिसर में सममित नहीं बल्कि असममित (Asymmetrical) होना और समतल/केंद्र का अनुपस्थित होना आवश्यक है। बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा की तैयारी के लिए अकार्बनिक रसायन के ऐसे उन्नत प्रश्नों का अभ्यास करना अत्यंत आवश्यक है।
Share:

Related Questions

भगत सिंह, सुखदेव तथा राजगुरु को कब फांसी दी गई थी? राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (BSDMA) की रूपरेखा तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी हालिया रिपोर्टों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत देश में आपदा प्रबंधन के लिए त्रि-स्तरीय संस्थागत ढांचा स्थापित किया गया है, जिसके अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में NDMA, राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में BSDMA, तथा जिला स्तर पर जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) कार्य करते हैं। 2. बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (BSDMA) द्वारा अपनाए गए 'सुरक्षित बिहार, विकसित बिहार' के दृष्टिकोण के तहत जलवायु परिवर्तन और आपदा जोखिम न्यूनीकरण (DRR) के लिए 'बिहार आपदा जोखिम न्यूनीकरण रोडमैप' तैयार किया गया है, जिसके तहत वज્રपात (Lightning) और बाढ़ से बचाव के लिए 'इन्द्र वज्र' ऐप जैसे तकनीकी समाधानों का उपयोग किया जाता है। 3. भारत की नवीनतम पर्यावरण स्थिति रिपोर्ट (State of Environment Report) के अनुसार, देश में जलवायु परिवर्तन के कारण चरम मौसमी घटनाओं (Extreme Weather Events) की आवृत्ति में लगातार वृद्धि हुई है, जिसमें बिहार देश के उन राज्यों में शामिल है जो बाढ़ और सूखे दोनों ही आपदाओं से अत्यधिक संवेदनशील रूप से प्रभावित होते हैं। 4. पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी 'इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट' (ISFR) के अनुसार, बिहार के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल में वनावरण और वृक्षावरण का कुल प्रतिशत राष्ट्रीय औसत (24.62%) से अधिक है, और पिछले दो वर्षों में राज्य में सर्वाधिक वन आवरण की वृद्धि रोहतास और कैमूर जिलों में दर्ज की गई है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? क्लोरोफिल के केंद्र में कौन सा खनिज पाया जाता है? सविनय अवज्ञा आंदोलन के दूसरे चरण, गांधी-इरविन समझौते और तदुपरांत आयोजित गोलमेज सम्मेलनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1931 में संपन्न 'गांधी-इरविन समझौते' के तहत सरकार द्वारा राजनीतिक कैदियों को रिहा करने पर सहमति व्यक्त की गई थी, परंतु जिन कैदियों पर हिंसा (Violence) का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष आरोप था, उन्हें इस आम माफी और रिहाई के दायरे से बाहर रखा गया था। 2. कराची अधिवेशन (1931) में कांग्रेस ने गांधी-इरविन समझौते का अनुमोदन करते हुए पहली बार 'मौलिक अधिकार और राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम' से संबंधित महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए, जिसकी अध्यक्षता सरदार वल्लभभाई पटेल ने की थी। 3. द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने के लिए महात्मा गांधी 'एस.एस. राजपूताना' नामक जहाज से लंदन गए थे, जहाँ ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैमसे मैकडोनाल्ड द्वारा प्रस्तुत 'साम्प्रदायिक पंचाट' (Communal Award) के प्रावधानों पर दलितों के पृथक निर्वाचक मंडल के मुद्दे पर उनका तीव्र मतभेद हुआ। 4. वर्ष 1932 में लंदन में आयोजित तृतीय गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस की ओर से भाग लेने के लिए एक आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल भेजा गया था, जिसका नेतृत्व औपचारिक रूप से पंडित जवाहरलाल नेहरू ने किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? किसने कहा था कि "मैंने रोटी मांगी थी, परन्तु मुझे पत्थर मिला, इंतजार की घड़ियां अब समाप्त हुई"?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.