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BPSC TRE 4.0
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सविनय अवज्ञा आंदोलन के संदर्भ में, गांधी-इरविन समझौता (दिल्ली पैक्ट, 1931) और प्रथम व द्वितीय गोलमेज सम्मेलनों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. गांधी-इरविन समझौते के तहत सरकार ने उन सभी राजनीतिक कैदियों को तुरंत रिहा करने पर सहमति व्यक्त की थी जिन पर हिंसा का प्रत्यक्ष आरोप था और जिन्होंने जेलों में रहते हुए सरकारी दमन का सामना किया था।
  2. 2. प्रथम गोलमेज सम्मेलन (नवंबर 1930 - जनवरी 1931) में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने आधिकारिक रूप से भाग लिया था, जिसकी अध्यक्षता ब्रिटिश प्रधानमंत्री रामसे मैकडोनाल्ड ने की थी और इसमें जिन्ना, तेज बहादुर सप्रू तथा डॉ. भीमराव अंबेडकर ने भी भाग लिया था।
  3. 3. द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (सितंबर-दिसंबर 1931) में महात्मा गांधी ने कांग्रेस के एकमात्र आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया था, किंतु सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व और अल्पसंख्यकों के मुद्दों पर गतिरोध उत्पन्न होने के कारण यह सम्मेलन बिना किसी ठोस परिणाम के समाप्त हो गया।
  4. 4. वर्ष 1932 में लंदन में आयोजित तृतीय गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस ने भाग नहीं लिया था, तथा इसी वर्ष ब्रिटिश प्रधानमंत्री द्वारा 'सांप्रदायिक पंचाट' (Communal Award) की घोषणा की गई थी जिसके विरोध में गांधीजी ने यरवदा जेल में आमरण अनशन किया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि गांधी-इरविन समझौते (5 मार्च 1931) के तहत सरकार ने केवल उन्हीं राजनीतिक कैदियों को रिहा करने पर सहमति दी थी जिन पर हिंसा का आरोप *नहीं* था (हिंसा के आरोपियों को इससे बाहर रखा गया था)। कथन 2 असत्य है क्योंकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने *प्रथम* गोलमेज सम्मेलन का पूर्ण बहिष्कार किया था और इसमें भाग नहीं लिया था; कांग्रेस ने केवल द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया था। कथन 3 और 4 पूर्णतः सत्य हैं। द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में गांधीजी ने कांग्रेस के प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया था जो सांप्रदायिक विवाद के कारण असफल रहा, और तृतीय गोलमेज सम्मेलन (1932) में कांग्रेस शामिल नहीं हुई थी। अधिक अध्ययन और संपूर्ण पाठ्यक्रम के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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