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BPSC TRE 4.0
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सरकारी सांख्यिकी के लिए ‘बिग डेटा और डेटा साइंस पर संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञ समिति’ के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन से सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
समिति का गठन, SDGs की निगरानी का समर्थन, और भारत का शामिल होना (2020), तीनों कथन सही हैं.
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फलों को पकाने के लिए कौन सा हार्मोन उपयोग होता है?
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बंगाल विभाजन (1905) और इसके विरोध में प्रारंभ किए गए स्वदेशी आंदोलन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल विभाजन का निर्णय लॉर्ड कर्ज़न द्वारा 20 जुलाई 1905 को घोषित किया गया था, तथा 16 अक्टूबर 1905 को इसे लागू किए जाने के दिन पूरे बंगाल में 'शोक दिवस' के रूप में मनाया गया, जहाँ लोगों ने उपवास रखा, 'बंदे मातरम' गाया और birbirat (आपसी भाईचारे) के प्रतीक के रूप में एक-दूसरे की कलाई पर राखियाँ बांधीं।
2. स्वदेशी आंदोलन के दौरान बंगाल के राष्ट्रीय शिक्षा परिषद (National Council of Education) की स्थापना 15 अगस्त 1906 को की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य साहित्यिक, वैज्ञानिक और तकनीकी शिक्षा को स्वदेशी नियंत्रण के तहत देना था, तथा सतीश चंद्र मुखर्जी का 'डॉन सोसाइटी' (Dawn Society) इसमें विशेष रूप से सक्रिय था।
3. कांग्रेस के 1905 के बनारस अधिवेशन में, जिसकी अध्यक्षता गोपाल कृष्ण गोखले ने की थी, पहली बार औपचारिक रूप से पूरे ब्रिटिश भारत में स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन का विस्तार करने का प्रस्ताव पारित किया गया था, हालांकि नरमपंथियों और चरमपंथियों के बीच वैचारिक मतभेद इस बात पर था कि यह आंदोलन केवल बंगाल तक सीमित रहना चाहिए या पूरे देश में फैलना चाहिए।
4. स्वदेशी आंदोलन के दौरान आर्थिक बहिष्कार के साथ-साथ रचनात्मक कार्यों (Atmashakti) पर भी बल दिया गया, जिसके तहत आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय ने 'बंगाल केमिकल एंड फार्मास्युटिकल वक्र्स' जैसी स्वदेशी उद्योगों की नींव रखी, और अश्विनी कुमार दत्त ने बंगाल के बरिशाल में 'स्वदेश बांधव समिति' के माध्यम से जन-जागरण का कार्य किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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भारत में आधुनिक शिक्षा के विकास और ऐतिहासिक अधिनियमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वुड का डिस्पेच (Wood's Despatch, 1854), जिसे 'भारतीय शिक्षा का मैग्नाकार्टा' कहा जाता है, ने जन-साधारण की शिक्षा के प्रसार को सरकार का कर्तव्य माना और महिलाओं की शिक्षा तथा व्यावसायिक प्रशिक्षण पर विशेष बल दिया, जिसके परिणामस्वरूप कलकत्ता, बंबई और मद्रास में विश्वविद्यालयों की स्थापना की नींव पड़ी।
2. लॉर्ड मैकाले का मिनट (1835) अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली का प्रबल समर्थक था, जिसका मुख्य उद्देश्य 'निस्यंदन सिद्धांत' (Downward Filtration Theory) के माध्यम से समाज के उच्च वर्ग को शिक्षित करना था ताकि वे ऐसे लोग तैयार कर सकें जो 'रंग और नस्ल से भारतीय हों, किंतु विचारों, रुचियों और नैतिकता से अंग्रेज हों'।
3. हंटर शिक्षा आयोग (Hunter Commission, 1882) की नियुक्ति प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा की प्रगति की समीक्षा के लिए की गई थी, और इसने प्राथमिक शिक्षा का नियंत्रण नवनिर्मित जिला और नगरपालिका बोर्डों को सौंपने की सिफारिश की थी।
4. सैडलर विश्वविद्यालय आयोग (Sadler Commission, 1917-19) ने कलकत्ता विश्वविद्यालय की समस्याओं का अध्ययन करने के साथ-साथ स्कूली शिक्षा को 12 वर्ष का करने, इंटरमीडिएट कक्षाओं को अलग करने और विश्वविद्यालयों में अकादमिक स्वतंत्रता पर विशेष जोर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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कॉमन वील (Commonweal) किसकी पुस्तक/पत्रिका है?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राष्ट्रपति की अध्यादेश निर्माण की शक्ति (अनुच्छेद 123) और राज्यपाल की अध्यादेश निर्माण की शक्ति (अनुच्छेद 213) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रपति या राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश की शक्ति और प्रभाव वही होता है जो संसद द्वारा पारित किसी अधिनियम या राज्य विधानमंडल द्वारा पारित किसी अधिनियम का होता है, किंतु ऐसा प्रत्येक अध्यादेश संसद या राज्य विधानमंडल के पुनर्समेकन (Re-assembly) के ठीक छह सप्ताह बाद स्वतः निष्प्रभावी हो जाता है, यदि उससे पहले ही दोनों सदनों द्वारा उसका अनुमोदन न कर दिया जाए।
2. राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति संसद की विधायी शक्ति के सह-विस्तारित (Co-extensive) है, अर्थात् राष्ट्रपति उस विषय पर भी अध्यादेश प्रख्यापित कर सकता है जिस पर संसद कानून बना सकती है, किंतु संविधान के अनुच्छेद 123 के अनुसार राष्ट्रपति किसी भी परिस्थिति में अपनी इस शक्ति का प्रयोग अपने मंत्रिमंडल की लिखित सलाह के बिना कर सकता है।
3. राज्यपाल को अध्यादेश प्रख्यापित करने के लिए कुछ विशेष मामलों में राष्ट्रपति के पूर्व-निर्देश (Prior Instructions) की आवश्यकता होती है, जैसे यदि राज्य विधानमंडल का ऐसा विधेयक जिसके लिए राष्ट्रपति की संस्तुति आवश्यक होती, उसे कानून बनाने के लिए प्रस्तुत किया जाता, तो राज्यपाल बिना राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति के उस विषय पर अध्यादेश जारी नहीं कर सकता है।
4. अध्यादेश निर्माण की शक्ति कोई 'विवेकशील शक्ति' (Discretionary Power) नहीं है, बल्कि यह कार्यपालिका के प्रमुख के रूप में मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह से प्रयोग की जाने वाली शक्ति है, और न्यायालय द्वारा इस बात की न्यायिक समीक्षा की जा सकती है कि क्या अध्यादेश प्रख्यापित करते समय राष्ट्रपति या राज्यपाल द्वारा mala fide (दुराशय) या असंवैधानिक तरीकों का उपयोग किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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