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भारतीय संविधान के अंतर्गत संघ के नाम एवं राज्य क्षेत्र (अनुच्छेद 1-4) तथा राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित विभिन्न समितियों और आयोगों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 1 में भारत अर्थात 'इंडिया' को 'राज्यों का संघ' (Union of States) कहा गया है, जिसका अर्थ है कि भारतीय संघ राज्यों के बीच किसी समझौते का परिणाम नहीं है और न ही किसी राज्य को संघ से अलग होने का अधिकार है।
  2. 2. भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन की मांग की जाँच के लिए सरकार द्वारा जून 1948 में गठित 'धर आयोग' (SK Dhar Commission) ने भाषा के आधार पर राज्यों के पुनर्गठन की संस्तुति की थी, जिसे बाद में जेवीपी (JVP) समिति द्वारा भी पूर्णतः स्वीकार कर लिया गया था।
  3. 3. राज्य पुनर्गठन आयोग (फजल अली आयोग, 1953), जिसके अन्य सदस्य के.एम. पणिक्कर और हृदयनाथ कुंजरू थे, ने भाषाई आधार को राज्यों के पुनर्गठन का मुख्य आधार तो स्वीकार किया, किंतु 'एक राज्य-एक भाषा' के सिद्धांत को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया।
  4. 4. अनुच्छेद 3 के तहत संसद को किसी भी राज्य के क्षेत्र में परिवर्तन करने, नाम बदलने या नए राज्य के निर्माण की शक्ति प्राप्त है, और इस प्रयोजन के लिए प्रस्तुत विधेयक को संसद में पेश करने से पूर्व संबंधित राज्य विधानमंडल की पूर्व सहमति (Consent) प्राप्त करना अनिवार्य होता है, जिस पर राज्य की असहमति संसद को विधेयक पारित करने से रोक सकती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सत्य है क्योंकि अनुच्छेद 1 में 'राज्यों का संघ' शब्दावली का प्रयोग किया गया है, जो अमेरिकी संघ के विपरीत एक अविभाज्य संघ का निर्माण करता है। कथन 2 असत्य है क्योंकि एस.के. धर आयोग (1948) और जेवीपी समिति (1948-49) दोनों ने भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन का विरोध किया था और प्रशासनिक सुविधा को प्राथमिकता दी थी। कथन 3 सत्य है क्योंकि फजल अली आयोग ने भाषा को एक प्रमुख आधार माना, लेकिन प्रशासनिक एकता, वित्तीय स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 'एक राज्य-एक भाषा' के सिद्धांत को नकार दिया। कथन 4 असत्य है क्योंकि अनुच्छेद 3 के तहत राष्ट्रपति द्वारा राज्य विधानमंडल के पास विधेयक भेजा जाता है, किंतु विधानमंडल के विचार या असहमति संसद के लिए बाध्यकारी नहीं होते हैं। अधिक तैयारी के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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