BPSC TRE 4.0
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राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के दिशा-निर्देशों तथा भारत में पर्यावरण एवं आपदा प्रबंधन रिपोर्टों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत गठित 'राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण' (NDMA) का पदेन अध्यक्ष देश का प्रधानमंत्री होता है, और यह संस्था आपदाओं के प्रति भारत को 'प्रतिक्रियात्मक' (Reactive) से 'सक्रिय और रोकथाम आधारित' (Proactive and Prevention-oriented) दृष्टिकोण की ओर स्थानांतरित करने का कार्य करती है।
- 2. पर्यावरण और वन मंत्रालय तथा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा जारी नवीनतम पर्यावरण रिपोर्टों के अनुसार, भारत में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव स्वरूप चरम मौसमी घटनाओं (Extreme Weather Events) की आवृत्ति में लगातार वृद्धि हुई है, जिसके लिए 'राज्य आपदा मोचन निधि' (SDRF) का 80% तक हिस्सा केवल राहत और पुनर्वास पर ही खर्च किया जा सकता है, रोकथाम पर नहीं।
- 3. भारत के आपदा प्रबंधन ढांचे में 'आपदा जोखिम न्यूनीकरण' (DRR - Disaster Risk Reduction) को बढ़ावा देने के लिए 'सेंडाई फ्रेमवर्क' (Sendai Framework) के लक्ष्यों के अनुरूप राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (NDMP) तैयार की गई है, जिसका उद्देश्य वर्ष 2030 तक आपदा से होने वाले बुनियादी ढांचे के नुकसान और मानव मृत्यु दर में भारी कमी लाना है।
- 4. पर्यावरण रिपोर्टों में उल्लिखित 'पारिस्थितिकीय संवेदनशीलता क्षेत्र' (Eco-Sensitive Zones - ESZs) की नीति के तहत किसी भी संरक्षित क्षेत्र के चारों ओर 10 किलोमीटर तक के दायरे में वाणिज्यिक खनन, बड़े बांधों के निर्माण और प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर पूर्ण प्रतिबंध होता है, जिसका निर्धारण पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के अंतर्गत किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
इस प्रश्न में दिए गए कथनों का विश्लेषण इस प्रकार है: कथन 1 सत्य है क्योंकि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत गठित NDMA के अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं और यह प्रतिक्रियात्मक नीति से हटकर रोकथाम आधारित दृष्टिकोण अपनाती है। कथन 2 असत्य है क्योंकि SDRF और NDRF के नियमों के तहत अब आपदा न्यूनीकरण (Mitigation) और रोकथाम के कार्यों के लिए भी पर्याप्त निधि का आवंटन किया जाने लगा है, केवल राहत तक सीमित नहीं है। कथन 3 सत्य है, NDMP का उद्देश्य सेंडाई फ्रेमवर्क के लक्ष्यों के अनुरूप 2030 तक आपदा हानियों को कम करना है। कथन 4 सत्य है, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत संरक्षित क्षेत्रों के आसपास ESZ घोषित किए जाते हैं जहाँ पर्यावरणीय रूप से हानिकारक गतिविधियों पर प्रतिबंध होता है। अधिक अध्ययन सामग्री के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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बिहार की बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं और उनसे लाभान्वित क्षेत्रों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कोसी परियोजना, जो भारत और नेपाल की एक संयुक्त बहुउद्देशीय परियोजना है, के तहत हनुमाननगर में एक बराज का निर्माण किया गया है, और इसे 'बिहार का शोक' कही जाने वाली इस नदी के नियंत्रण के लिए मुख्य रूप से डिगरा और नेपाल के क्षेत्रों में प्रबंधित किया जाता है।
2. गंडक परियोजना (जिसे वाल्मीकि नगर बराज परियोजना भी कहा जाता है) भारत और नेपाल के बीच एक समझौता है, जिसके अंतर्गत त्रिवेणी घाट पर बराज का निर्माण कर पूर्वी और पश्चिमी गंडक नहर प्रणालियों से बिहार के साथ-साथ उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों को भी सिंचाई क्षमता प्रदान की जाती है।
3. सोन नहर प्रणाली (Sone Canal System) बिहार की सबसे प्राचीन नहर प्रणालियों में से एक है, जिसकी शुरुआत ब्रिटिश काल में डेहरी-ऑन-सोने (रोहतास) में बराज बनाकर की गई थी, और यह सोन नदी के पूर्वी तथा पश्चिमी तटों से भोजपुर, रोहतास, औरंगाबाद और पटना जिलों के कृषि क्षेत्रों को जल उपलब्ध कराती है।
4. बड़ुआ और नर्तकी बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजनाएँ मुख्य रूप से उत्तर बिहार के बाढ़-प्रवण जिलों (जैसे मधुबनी और सीतामढ़ी) में भूजल स्तर को बढ़ाने और जल विद्युत उत्पादन के लिए हाल ही में राष्ट्रीय सिंचाई विकास कार्यक्रम के तहत पूरी तरह से केंद्रीय सहायता से पूर्ण की गई हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत संघ की न्यायपालिका (उच्चतम न्यायालय) और भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 148 के तहत नियुक्त भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक को उसके पद से उसी रीति और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति और जिन आधारों पर उच्चतम न्यायालय के किसी न्यायाधीश को हटाया जाता है।
2. उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों और सीएजी (CAG) दोनों के वेतन, भत्ते और पेंशन भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) पर भारित (Charged) होते हैं, जिन पर संसद के दोनों सदनों में मतदान किया जा सकता है।
3. भारत का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक सेवानिवृत्ति के पश्चात भारत सरकार या किसी भी राज्य सरकार के अधीन किसी भी प्रकार के लाभ के पद (Office of Profit) का पात्र नहीं होता है, जबकि उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश कुछ विशिष्ट शर्तों के तहत मध्यस्थता या आयोगों के अध्यक्ष के रूप में कार्य कर सकते हैं।
4. उच्चतम न्यायालय की आरंभिक (Original) अधिकारिता के अंतर्गत केंद्र और एक या अधिक राज्यों के बीच या दो या अधिक राज्यों के बीच उत्पन्न होने वाले विवाद आते हैं, किंतु इसमें किसी नागरिक द्वारा सरकार के खिलाफ लाए गए संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन के मुकदमे शामिल नहीं होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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प्रकाश के परावर्तन, अपवर्तन तथा इससे संबंधित प्रकाशीय परिघटनाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जब प्रकाश की किरण किसी सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है और आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण (Critical Angle) से अधिक हो जाता है, तो प्रकाश किरण उसी माध्यम में वापस लौट जाती है, जिसे प्रकाश का पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) कहते हैं और इसका उपयोग ऑप्टिकल फाइबर में होता है।
2. उत्तल लेंस (Convex Lens) द्वारा बनने वाला प्रतिबिंब हमेशा वास्तविक और उल्टा होता है, तथा इसका उपयोग कभी भी आभासी प्रतिबिंब बनाने के लिए नहीं किया जा सकता है, चाहे वस्तु को लेंस के सामने किसी भी स्थिति में रखा जाए।
3. प्रकाश के प्रकीर्णन (Scattering of Light) के कारण ही आकाश का रंग नीला दिखाई देता है, क्योंकि वायुमंडल में उपस्थित सूक्ष्म कण (जैसे धूल और गैस के अणु) नीले रंग के प्रकाश को लाल रंग की तुलना में बहुत अधिक प्रकीर्णित करते हैं (रेले प्रकीर्णन का नियम)।
4. पूर्ण आंतरिक परावर्तन की घटना के लिए आवश्यक शर्त यह है कि प्रकाश किरण हमेशा विरल माध्यम से सघन माध्यम की ओर जानी चाहिए तथा आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण से कम होना चाहिए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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हाल ही में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा रक्षा एवं अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में किए गए नूतन विकास और समसामयिक पहलों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. डीआरडीओ द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित 'प्रलय' (Pralay) मिसाइल एक कम दूरी की सतह से सतह पर मार करने वाली सामरिक बैलिस्टिक मिसाइल है, जो अत्यधिक गतिशीलता से लैस है और दुश्मन के रडार से बचने के लिए उड़ान के दौरान अपना मार्ग बदलने (Quasi-ballistic trajectory) की क्षमता रखती है।
2. भारतीय नौसेना के प्रोजेक्ट-75 के तहत फ्रांस के सहयोग से मझगाँव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) में निर्मित स्कॉर्पीन श्रेणी की छठी और अंतिम पनडुब्बी 'आईएनएस वागशीर' (INS Vagsheer) को हाल ही में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया है, जो उन्नत वायु-स्वतंत्र प्रणोदन (AIP) प्रणाली से सुसज्जित है।
3. इसरो द्वारा अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में गगनयान मिशन के लिए विकसित 'विकास' (Vikas) इंजन का संबंध क्रायोजेनिक रॉकेट इंजन तकनीक से है, जिसका उपयोग केवल मानव-रहित परीक्षण उड़ानों के ऊपरी चरणों में किया जाता है।
4. भारत के पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष उड़ान मिशन 'गगनयान' के लिए भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष यात्रा हेतु शारीरिक और मानसिक रूप से प्रशिक्षित करने के लिए बेंगलुरु में 'एस्ट्रोनॉट ट्रेनिंग फैसिलिटी' (ATF) की स्थापना की गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार में भीम बांध वन्यजीव अभ्यारण्य किस जिले में है?
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सूर्य से पृथ्वी तक प्रकाश पहुँचने में कितना समय लगता है?
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