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BPSC TRE 4.0
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हमारे सौर मंडल और ब्रह्माण्ड की संरचना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. सूर्य के केंद्र में उत्पन्न होने वाली ऊर्जा का मुख्य स्रोत नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) है, जिसमें अत्यधिक उच्च ताप और दाब के कारण हाइड्रोजन के चार नाभिक मिलकर हीलियम के एक नाभिक का निर्माण करते हैं।
- 2. क्षुद्रग्रह बेल्ट (Asteroid Belt) मुख्य रूप से मंगल (Mars) और बृहस्पति (Jupiter) ग्रहों की कक्षाओं के बीच स्थित है, जिसमें छोटे चट्टानी पिंड सूर्य की परिक्रमा करते हैं, और इस क्षेत्र का सबसे बड़ा पिंड 'सीरीज' (Ceres) है जिसे बौना ग्रह भी माना जाता है।
- 3. 'ऑर्ट क्लाउड' (Oort Cloud) सौर मंडल की सबसे बाहरी सीमा पर स्थित बर्फीले पिंडों का एक विशाल गोलाकार आवरण है, जिसे दीर्घकालिक धूमकेतुओं (Long-period Comets) का उद्गम स्थल माना जाता है।
- 4. प्रकाश वर्ष (Light-year) समय मापने की एक इकाई है, जो यह दर्शाती है कि प्रकाश निर्वात में एक वर्ष की अवधि में कितनी दूरी तय करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। सूर्य के कोर में अत्यधिक ताप और दाब के कारण हाइड्रोजन का हीलियम में नाभिकीय संलयन होता है, जो उसकी ऊर्जा का स्रोत है। क्षुद्रग्रह पेटी मंगल और बृहस्पति के बीच स्थित है और इसका सबसे बड़ा पिंड 'सीरीज' है। ऑर्ट क्लाउड सौर मंडल की सीमा पर स्थित धूमकेतुओं का स्रोत है। किंतु, कथन 4 असत्य है क्योंकि 'प्रकाश वर्ष' (Light-year) दूरी मापने की इकाई है, समय की नहीं। बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा के पाठ्यक्रम के अंतर्गत भूगोल विषय के लिए यह अवधारणा अति महत्वपूर्ण है।
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जयप्रकाश नारायण (जेपी) और 1974 के छात्र आंदोलन (बिहार आंदोलन) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस आंदोलन की शुरुआत मार्च 1974 में छात्रों द्वारा बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, खाद्यान्न संकट और प्रशासनिक भ्रष्टाचार के विरोध में 'बिहार छात्र संघर्ष समिति' के बैनर तले की गई थी।
2. जयप्रकाश नारायण ने इस आंदोलन का नेतृत्व इस शर्त पर स्वीकार किया था कि आंदोलन पूरी तरह से अहिंसक रहेगा और इसका दायरा केवल बिहार तक सीमित न रहकर 'सम्पूर्ण क्रांति' (Total Revolution) के रूप में पूरे देश में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक बदलाव के लिए होगा।
3. 5 जून 1974 को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में जयप्रकाश नारायण की अध्यक्षता और विशाल जनसमूह की उपस्थिति में 'सम्पूर्ण क्रांति' का आह्वान किया गया, तथा इसी दौरान इंदिरा गांधी सरकार के विरुद्ध संसद मार्च का भी आयोजन किया गया था।
4. जेपी आंदोलन के परिणामस्वरूप ही वर्ष 1977 में केंद्र में पहली बार किसी गैर-कांग्रेस सरकार (जनता पार्टी) का गठन हुआ था, और मोरारजी देसाई देश के पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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शेरशाह की भू-लगान व्यवस्था की निम्नलिखित में से किससे तुलना की जा सकती है?
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बिहार की जलवायु, नदी तंत्र और कृषि पद्धतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बिहार की जलवायु मुख्य रूप से मानसूनी प्रकार की है, जिसमें उत्तर-पश्चिम से आने वाली दक्षिण-पश्चिम मानसून की बंगाल की खाड़ी शाखा राज्य में सर्वाधिक वर्षा कराती है, जबकि सर्दियों के महीनों में होने वाली हल्की वर्षा मुख्य रूप से पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) के कारण होती है।
2. उत्तर बिहार की नदियाँ (जैसे कोसी, गंडक, बागमती और कमला) हिमालयी नदियाँ हैं जो सदाबहार और मार्ग बदलने (प्रवाह परिवर्तन) के लिए कुख्यात हैं, जबकि दक्षिण बिहार की नदियाँ (जैसे सोन, पुनपुन, किउल और अजय) प्रायद्वीपीय पठार से निकलती हैं और मौसमी होने के कारण गर्मियों में प्रायः सूख जाती हैं।
3. बिहार के टाल क्षेत्र (Tal Region) में कृषि पद्धति सामान्यतः 'पायरा' (Paira/Utera) cropping system पर आधारित होती है, जिसके अंतर्गत धान की कटाई से ठीक पहले खेत में ही मटर, मसूर या चना जैसे दलहन की फसलें छिड़क दी जाती हैं ताकि मृदा की बची हुई नमी का सदुपयोग किया जा सके।
4. कोसी बेसिन क्षेत्र में पाई जाने वाली बलसुंदरी मृदा (Balsundari Soil) अत्यधिक अम्लीय प्रवृत्ति की होती है, जो मक्का और जूट की कृषि के लिए बिल्कुल उपयुक्त नहीं मानी जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार की नदियाँ, जलवायु एवं कृषि पद्धतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बिहार की जलवायु मुख्य रूप से मानसूनी प्रकार की है, जहाँ उत्तर-पश्चिम में स्थित सोमेश्वर और दून की पहाड़ियों के आसपास सर्वाधिक वर्षा होती है, जबकि दक्षिण-मध्य बिहार का क्षेत्र (जैसे गया, औरंगाबाद) वर्षा छाया क्षेत्र और अत्यधिक तापीय तापांतर के कारण शुष्क रहता है।
2. उत्तर बिहार की प्रमुख नदियाँ (जैसे कोसी, गंडक, बागमती) हिमालयी नदियाँ होने के कारण सदाबहार हैं और अपने मार्ग परिवर्तन तथा अत्यधिक गाद (Silt) जमा करने के लिए कुख्यात हैं, जबकि दक्षिण बिहार की नदियाँ (जैसे सोन, पुनपुन, किउल) प्रायद्वीपीय पठार से निकलती हैं और मानसूनी वर्षा पर निर्भर होने के कारण ग्रीष्मकाल में प्रायः सूख जाती हैं।
3. बिहार की कृषि पद्धतियों में 'धान-गेहूं-मक्का' फसल चक्र प्रमुख है, किंतु कृषि रोड मैप (Agriculture Roadmap) के अंतर्गत राज्य के उत्तर-पूर्वी जिलों (जैसे पूर्णिया, कटिहार) में मखाने की वैज्ञानिक खेती और दक्षिण-पश्चिम पठारी क्षेत्रों (रोहतास, कैमूर) में 'परंपरागत शून्य जुताई' (Zero Tillage) तकनीक को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया जा रहा है।
4. बिहार में बाढ़ और सूखे की दोहरी समस्या से निपटने के लिए दक्षिण बिहार की सोन और पुनपुन नदियों को जोड़ने वाली 'सोन-गंगा जल संभरण लिंक नहर परियोजना' सबसे बड़ी सिंचाई योजना है, जिसके तहत उत्तर बिहार की अतिरिक्त बाढ़ के पानी को दक्षिण बिहार के सूखाग्रस्त खेतों तक पहुँचाया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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छोटी आंत का मुख्य कार्य क्या है?
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