संवेगात्मक विकास
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केपलर के ग्रहों की गति के नियमों और सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. केपलर का द्वितीय नियम (क्षेत्रीय चाल का नियम) इस बात का परिणाम है कि केंद्रीय बलों के अंतर्गत कोणीय संवेग (Angular Momentum) संरक्षित रहता है, जिसके अनुसार ग्रह सूर्य को मिलाने वाली रेखा समान समयान्तरालों में समान क्षेत्रफल तय करती है।
- 2. यदि पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी वर्तमान दूरी की आधी हो जाए, तो एक वर्ष में दिनों की संख्या घटकर वर्तमान की एक-चौथाई रह जाएगी।
- 3. पृथ्वी की सतह से किसी वस्तु को उसके पलायन वेग (Escape Velocity) से दोगुने वेग से प्रक्षेपित किया जाता है, तो पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र को पार करने के बाद अंतरिक्ष में उस वस्तु का चाल और कुल ऊर्जा दोनों धनात्मक हो जाती हैं।
- 4. भू-स्थिर उपग्रह (Geostationary Satellite) का परिक्रमण काल पृथ्वी के अपने अक्ष पर घूर्णन काल के बराबर होता है, और यह विषुवत वृत्त के तल में पश्चिम से पूर्व की ओर चक्कर लगाता है तथा इसकी पृथ्वी की सतह से ऊंचाई लगभग 36,000 किलोमीटर होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सत्य है क्योंकि केपलर का द्वितीय नियम कोणीय संवेग संरक्षण के नियम पर आधारित है। कथन 2 असत्य है; केपलर के तृतीय नियम ($T^2 \propto R^3$) के अनुसार, यदि त्रिज्या $R$ आधी हो जाए ($R/2$), तो नया आवर्तकाल $T' = T \times (1/2)^{3/2}$ होगा, जो एक चौथाई नहीं बल्कि लगभग 0.35 गुना हो जाएगा। कथन 3 सत्य है क्योंकि पलायन वेग से अधिक वेग ($v > v_e$) से फेंकी गई वस्तु की कुल ऊर्जा धनात्मक हो जाती है और वह अनंत पर भी कुछ गतिज ऊर्जा के साथ गति करती रहेगी। कथन 4 सत्य है क्योंकि भू-स्थिर उपग्रह पश्चिम से पूर्व की ओर पृथ्वी के घूर्णन के समान दिशा में 24 घंटे में एक चक्कर पूरा करते हैं। अधिक अभ्यास के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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Related Questions
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आधुनिक भौतिकी और परमाणु संरचना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नील्स बोर के परमाणु मॉडल के अनुसार, इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर केवल उन्हीं निश्चित वृत्ताकार कक्षाओं में चक्कर लगाते हैं जिनका कोणीय संवेग (Angular Momentum) $h/2\pi$ का पूर्ण गुणक होता है, अर्थात् $L = nh / 2\pi$।
2. रेडियोएक्टिव क्षय के दौरान उत्सर्जित होने वाली 'गामा किरणें' (Gamma rays) उच्च ऊर्जा वाले विद्युत चुम्बकीय विकिरण (Electromagnetic radiation) हैं, जिनका वेग प्रकाश के वेग के बराबर होता है और इन पर कोई आवेश नहीं होता है।
3. द्रव्यमान-ऊर्जा समतुल्यता के सिद्धांत (Mass-Energy Equivalence) के अनुसार किसी नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) या विखंडन (Nuclear Fission) अभिक्रिया में द्रव्यमान की क्षति (Mass defect) ही ऊर्जा के रूप में निर्मुक्त होती है, जिसे आइंस्टीन के समीकरण $E = mc^2$ द्वारा व्यक्त किया जाता है।
4. प्रकाश विद्युत प्रभाव (Photoelectric Effect) की व्याख्या करते समय अल्बर्ट आइंस्टीन ने यह प्रतिपादित किया था कि प्रकाश तरंगों के रूप में न चलकर ऊर्जा के छोटे-छोटे पैकेटों या बंडलों के रूप में चलता है जिन्हें 'फोटॉन' (Photon) कहा जाता है, और एक फोटॉन की ऊर्जा उसकी आवृत्ति के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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यांत्रिकी (Mechanics) के अंतर्गत जड़त्व आघूर्ण (Moment of Inertia) तथा घूर्णन गति के नियमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी पिंड का जड़त्व आघूर्ण उसके द्रव्यमान और घूर्णन अक्ष से द्रव्यमान कणों की दूरियों के वर्गों के गुणनफल का योग होता है, और यह एक अदिश राशि न होकर एक प्राक्षेप (Tensor) राशि है।
2. घूर्णन गति में 'बलाघूर्ण' (Torque) वही भूमिका निभाता है जो रेखीय गति में 'बल' निभाता है, और इसका एसआई मात्रक न्यूटन-मीटर (N-m) होता है।
3. 'कोणीय संवेग संरक्षण का सिद्धांत' इस नियम पर आधारित है कि यदि किसी निकाय पर कुल बाह्य बलाघूर्ण शून्य हो, तो उस निकाय का कुल कोणीय संवेग संरक्षित (Constant) रहता है (जैसे कि घूमते हुए स्टूल पर बैठी नर्तकी का अपने हाथों को सिकोड़ने पर घूर्णन गति का बढ़ जाना)।
4. समानांतर अक्ष प्रमेय (Parallel Axes Theorem) के अनुसार, किसी अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण, उस अक्ष के समानांतर तथा केंद्र से गुजरने वाले अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण और पिंड के कुल द्रव्यमान तथा दोनों अक्षों के बीच की लंबवत दूरी के वर्ग के गुणनफल के योग के बराबर होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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भौतिक राशियों और उनके SI मात्रकों (SI Units) तथा विमीय सूत्रों (Dimensional Formulae) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. श्यानता गुणांक (Coefficient of Viscosity) का SI मात्रक 'पास्कल-सेकंड' (Pa·s) या 'किलोग्राम प्रति मीटर-सेकंड' (kg/(m·s)) होता है, और इसका विमीय सूत्र $[ML^{-1}T^{-1}]$ होता है।
2. प्लांक नियतांक (Planck's Constant) का SI मात्रक 'जूल-सेकंड' (J·s) है, तथा ऊर्जा और आवृत्ति के अनुपात के रूप में इसकी विमाएँ कोणीय संवेग (Angular Momentum) की विमाओं के बिल्कुल समान यानी $[ML^2T^{-1}]$ होती हैं।
3. पृष्ठ तनाव (Surface Tension) का SI मात्रक न्यूटन प्रति मीटर ($N/m$) या जूल प्रति वर्ग मीटर ($J/m^2$) है, और इसका विमीय सूत्र $[ML^0T^{-2}]$ होता है।
4. सार्वत्रिक गैस नियतांक (Universal Gas Constant - R) का मान प्रति मोल के आधार पर व्यक्त किया जाता है, और इसका SI मात्रक 'जूल प्रति मोल-केल्विन' (J/(mol·K)) होता है, जिसकी विमा $[ML^2T^{-2} heta^{-1}mol^{-1}]$ होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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भौतिकी के अंतर्गत यांत्रिकी (Mechanics) के विभिन्न नियमों और सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. केपलर के ग्रहों की गति के द्वितीय नियम (क्षेत्रीय चाल का नियम) के अनुसार, किसी ग्रह को सूर्य से मिलाने वाली रेखा समान समय में समान क्षेत्रफल तय करती है, जो मुख्य रूप से कोणीय संवेग संरक्षण (Conservation of Angular Momentum) के सिद्धांत पर आधारित है।
2. 'बर्नोली की प्रमेय' (Bernoulli's Theorem), जो आदर्श तरल के धाराखीय प्रवाह (Streamline Flow) पर लागू होती है, के अनुसार किसी नली में तरल के बहने पर प्रति एकांक आयतन की कुल ऊर्जा (दाब ऊर्जा, गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा का योग) नियत रहती है, तथा वेग बढ़ने पर दाब कम हो जाता है।
3. 'जड़त्व आघूर्ण' (Moment of Inertia) किसी वस्तु का वह गुण है जो उसके घूर्णन गति में परिवर्तन का विरोध करता है, और इसका मान केवल वस्तु के द्रव्यमान पर निर्भर करता है, उसके द्रव्यमान वितरण या घूर्णन अक्ष की स्थिति पर निर्भर नहीं करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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संवेग p का मात्रक?
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पियाजे के अनुसार, 'संवेगात्मक विकास' (Emotional Development) किस अवस्था में सबसे अधिक सामाजिक होता है?
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