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BPSC TRE 4.0
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भारत के महान्यायवादी (Attorney General for India) और संसद (लोकसभा एवं राज्य सभा) की विधाई प्रक्रियाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 76 के तहत नियुक्त भारत का महान्यायवादी देश का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है, जिसे संसद के दोनों सदनों या उनकी संयुक्त बैठकों में बोलने और भाग लेने का अधिकार तो प्राप्त है, किंतु उसे संसद में किसी भी प्रस्ताव पर मतदान (Voting) करने का अधिकार नहीं होता है।
- 2. लोकसभा के स्थगन (Adjournment) और सत्रावसान (Prorogation) में यह अंतर है कि स्थगन पीठासीन अधिकारी द्वारा सदन की बैठक को कुछ समय या अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करता है, जबकि सत्रावसान राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है जिससे सदन का सत्र समाप्त हो जाता है और सत्रावसान होने पर लोकसभा में लंबित सभी विधेयक (Bills) स्वतः समाप्त हो जाते हैं।
- 3. राज्य सभा एक स्थायी सदन है जिसका विघटन नहीं होता है, और इसके एक-तिहाई सदस्य प्रत्येक दो वर्ष की समाप्ति पर सेवानिवृत्त होते हैं, तथा संविधान में राज्य सभा के सदस्यों का कार्यकाल निश्चित नहीं किया गया है बल्कि यह संसद द्वारा विधि बनाकर तय किया जाता है।
- 4. धन विधेयक (Money Bill) केवल लोकसभा में ही पुनः स्थापित किया जा सकता है, और यदि राज्य सभा इस पर अपनी सिफारिशें देने में 14 दिन की समयावधि से अधिक का विलंब करती है, तो उस विधेयक को दोनों सदनों द्वारा उसी रूप में पारित मान लिया जाता है जिस रूप में उसे लोकसभा ने पारित किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सत्य है क्योंकि महान्यायवादी को अनुच्छेद 88 के तहत संसद के सदनों में बोलने का अधिकार है लेकिन मतदान का अधिकार नहीं है। कथन 2 असत्य है क्योंकि सत्रावसान (Prorogation) होने पर केवल लोकसभा में विचाराधीन 'विधेयक' समाप्त नहीं होते, बल्कि जो विधेयक लोकसभा में लंबित (Pending) हैं वे लैप्स (समाप्त) होते हैं, हालाँकि कुछ विशेष मामलों और राज्य सभा में लंबित विधेयकों पर इसका प्रभाव नहीं पड़ता। कथन 3 सत्य है, संविधान ने राज्य सभा सदस्यों का कार्यकाल तय नहीं किया बल्कि जनप्रतिनिधिता अधिनियम, 1951 के तहत इसे 6 वर्ष किया गया है। कथन 4 सत्य है, धन विधेयक पर राज्य सभा के पास सीमित शक्तियां हैं और 14 दिन की अवधि बीतने पर उसे पारित मान लिया जाता है। ऐसी महत्वपूर्ण शिक्षण सामग्रियों के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
Related Questions
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बिहार के जनजातीय आंदोलनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संथाल विद्रोह (1855-56), जिसे 'हुंड़ विद्रोह' भी कहा जाता है, मुख्य रूप से भागलपुर से राजमहल की पहाड़ियों तक फैले 'दामिन-ए-कोह' क्षेत्र में हुआ था, जिसका नेतृत्व सिद्धू, कान्हा, चाँद और भैरव नामक चार भाइयों ने किया था।
2. बिरसा मुंडा द्वारा चलाए गए 'उलगुलान' (महाविद्रोह) का मुख्य उद्देश्य मुंडा राज की स्थापना करना तथा दिकुओं (बाहरी लोगों, जमींदारों और महाजनों) एवं ब्रिटिश शासन के शोषणकारी बंधुआ मजदूरी (बेगार) प्रथा का अंत करना था।
3. ताना भगत आंदोलन (1914) की शुरुआत उरांव आदिवासियों के बीच जतरा भगत के नेतृत्व में हुई थी, जो मुंडा और संथाल विद्रोह की तरह हिंसक साधनों में विश्वास रखता था और अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष को अपनी मुख्य रणनीति मानता था।
4. वर्ष 1855 के संथाल विद्रोह के परिणामस्वरूप ब्रिटिश सरकार को संथाल परगना टेनेंसी एक्ट (SPTA) पारित करना पड़ा, जिसने संथालों की पारंपरिक भूमि व्यवस्था को कुछ हद तक संरक्षण प्रदान किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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हरित क्रांति की सफलता निम्नलिखित की उपलब्धता पर निर्भर है-
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1757 से 1857 के मध्य भारत में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध हुए अन्य जन आंदोलनों और जनजातीय विद्रोहों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'संथाल विद्रोह' (1855-56) के प्रमुख नेता सिद्धू, कान्हू, चांद और भैरव थे, जिन्होंने राजमहल की पहाड़ियों के क्षेत्र (दामिन-ए-कोह) में महाजनों, साहूकारों और ब्रिटिश अधिकारियों के दमन के विरुद्ध पारंपरिक हथियारों के साथ सशस्त्र संघर्ष किया था।
2. 'पागल पंथी विद्रोह' एक अर्ध-धार्मिक संप्रदाय था, जिसकी स्थापना करम शाह ने की थी, परंतु इस विद्रोह का सर्वाधिक उग्र और व्यापक रूप उनके पुत्र टीटू मीर के नेतृत्व में बंगाल के शेरपुर क्षेत्र में जमींदारों के भारी करों के विरुद्ध देखने को मिला था।
3. 'कोल विद्रोह' (1831-32)छोटा नागपुर क्षेत्र में हुआ एक प्रमुख जनजातीय आंदोलन था, जिसका नेतृत्व बुद्ध भगत, जोआ भगत और मदारा सिंह जैसे नेताओं ने किया था, तथा यह विद्रोह मुख्य रूप से उनकी भूमि पर बाहरी लोगों (दिकुओं) के प्रवेश और लगान वृद्धि के विरोध में था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार में 'सर्वाधिक साक्षरता' वाला जिला कौन सा है?
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जीव जगत के वर्गीकरण (Biological Classification) और मोनेरा जगत (Kingdom Monera) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आर.एच. व्हिटेकर द्वारा प्रतिपादित पाँच जगत वर्गीकरण (Five Kingdom Classification) में प्रोकैरियोटिक जीवों को केवल 'मोनेरा' जगत में रखा गया है, जिनकी कोशिका भित्ति मुख्य रूप से पॉलीसैकेराइड और अमीनो अम्ल से बनी पेप्टिडोग्लाइकान की होती है।
2. मोनेरा जगत के अंतर्गत आने वाले सभी जीव अनिवार्य रूप से परपोषी (Heterotrophic) होते हैं, और इनमें किसी भी प्रकार के स्वपोषी जीव जैसे प्रकाशसंश्लेषी या रासायनसंश्लेषी बैक्टीरिया शामिल नहीं होते हैं।
3. सायनोबैक्टीरिया (नील-हरित शैवाल), जिन्हें मोनेरा जगत में वर्गीकृत किया गया है, में क्लोरोफिल-ए पाया जाता है और ये नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Nitrogen Fixation) करने में सक्षम होते हैं।
4. माइकोप्लाज्मा (Mycoplasma), जिन्हें पी.पी.एल.ओ. (PPLO) भी कहा जाता है, मोनेरा जगत के ऐसे जीव हैं जिनमें कोशिका भित्ति (Cell Wall) पूरी तरह अनुपस्थित होती है और वे बिना ऑक्सीजन के भी जीवित रह सकते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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