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BPSC TRE 4.0
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भारतीय संविधान के अंतर्गत संघ की न्यायपालिका (उच्चतम न्यायालय) और भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के संवैधानिक प्रावधानों, शक्तियों और स्वतंत्रता के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 129 के अनुसार उच्चतम न्यायालय एक 'अभिलेख न्यायालय' (Court of Record) है, जिसका अर्थ है कि उसके सभी निर्णयों, अभिलेखों और कार्रवाइयों को स्थायी साक्ष्य के रूप में संरक्षित रखा जाएगा और किसी भी न्यायालय में उस पर प्रश्न नहीं उठाया जा सकता है, तथा इसके पास अपनी अवमानना के लिए दंडित करने की शक्ति भी है।
- 2. भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) को पद से हटाने की प्रक्रिया और आधार वही हैं जो सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के होते हैं, अर्थात् उसे संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत से पारित समावेदन के आधार पर राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा सकता है।
- 3. अनुच्छेद 148 के तहत नियुक्त CAG अपने पद पर छह वर्ष की अवधि या पैंसठ वर्ष की आयु तक (जो भी पहले हो) रह सकता है, और सेवानिवृत्ति के पश्चात वह भारत सरकार या किसी भी राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य कार्यालय या लाभ के पद का पात्र होता है।
- 4. उच्चतम न्यायालय की प्रारंभिक क्षेत्राधिकार (Original Jurisdiction) शक्ति के अंतर्गत केंद्र और एक या अधिक राज्यों के बीच या दो या अधिक राज्यों के बीच उत्पन्न होने वाले कानूनी विवाद आते हैं, किंतु इसमें संसद या राज्य विधानसभाओं के चुनाव से संबंधित विवाद शामिल नहीं होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 4 पूर्णतः सत्य हैं। अनुच्छेद 129 के तहत उच्चतम न्यायालय एक अभिलेख न्यायालय है। CAG को हटाने की प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान (संसद के विशेष बहुमत द्वारा) होती है, जो उसे स्वतंत्रता प्रदान करती है। उच्चतम न्यायालय का प्रारंभिक क्षेत्राधिकार केंद्र-राज्य या राज्यों के आपसी विवादों तक सीमित है (अनुच्छेद 131)। वहीं, कथन 3 असत्य है क्योंकि अनुच्छेद 148(4) के स्पष्ट प्रावधान के अनुसार, CAG सेवानिवृत्ति के पश्चात भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी पद को धारण करने के लिए अयोग्य (Ineligible) होता है। इस तरह के उच्च स्तरीय बहुविकल्पीय प्रश्नों के अभ्यास के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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मुद्रास्फीति (Inflation), केंद्रीय बैंकिंग नीतियों और भारत में केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों (Fiscal Federalism) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) मौद्रिक नीति समिति (MPC) के माध्यम से 'रिवर्स रेपो रेट' (Reverse Repo Rate) में वृद्धि करता है, तो यह वाणिज्यिक बैंकों को अपनी अतिरिक्त तरलता (Liquidity) आरबीआई के पास पार्क करने के लिए प्रेरित करता है, जिससे अर्थव्यवस्था में मुद्रा आपूर्ति कम होती है और लागत-प्रेरित मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
2. संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत गठित 'वित्त आयोग' (Finance Commission) एक अर्ध-न्यायिक निकाय है, जो केंद्र और राज्यों के बीच करों (Taxes) के शुद्ध प्राप्तियों के वितरण की सिफारिश करने के साथ-साथ राज्यों को संचित निधि से सहायता अनुदान (Grants-in-aid) देने के सिद्धांतों का निर्धारण करता है।
3. माल और सेवा कर (GST) परिषद का गठन भारतीय संविधान के अनुच्छेद 279क के तहत किया जाता है, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करते हैं, और इस परिषद में केंद्र और राज्यों के बीच मतदान के वजन का अनुपात क्रमशः एक-तिहाई (1/3) और दो-तिहाई (2/3) होता है।
4. राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) सरकार की कुल प्राप्तियों और कुल व्यय का वह अंतर है जिसमें उधार को शामिल नहीं किया जाता है, और जब सरकार इस घाटे को पूरा करने के लिए आरबीआई से सीधे ऋण लेती है (मुद्रीकृत घाटा), तो इससे अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति का दबाव कम हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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गिधेश्वर पहाड़ियों के संबंध में कौन से कथन सही हैं?
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