शिक्षा दर्शन एवं शिक्षा चिंतक
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बिहार के इतिहास में 'जयप्रकाश नारायण (जेपी आंदोलन)' और 'छात्र आंदोलन' (1974) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वर्ष 1974 में छात्र आंदोलन की शुरुआत मुख्य रूप से बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, खाद्यान्नों की कमी और शैक्षणिक संस्थानों में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ पटना विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा 'बिहार छात्र संघर्ष समिति' के गठन के साथ हुई थी।
- 2. जयप्रकाश नारायण ने इस आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए दो शर्तें रखी थीं—पहला यह कि आंदोलन पूरी तरह से अहिंसक रहेगा और दूसरा यह कि इसका प्रभाव केवल बिहार तक सीमित न रहकर पूरे देश में 'संपूर्ण क्रांति' (Total Revolution) का रूप लेगा।
- 3. 5 जून 1974 को पटना के गांधी मैदान में आयोजित ऐतिहासिक रैली में जयप्रकाश नारायण ने इंदिरा गांधी की सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए 'समग्र क्रांति' या 'संपूर्ण क्रांति' का आह्वाहन किया था, जिसमें सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिवर्तन का लक्ष्य रखा गया था।
- 4. जेपी आंदोलन के दौरान ही आपातकाल (Emergency) की पृष्ठभूमि तैयार हुई थी, और इसी आंदोलन की प्रतिक्रिया स्वरूप केंद्र सरकार ने वर्ष 1977 के आम चुनावों में भारी बहुमत प्राप्त किया था जिससे जनता पार्टी की पहली गैर-कांग्रेस सरकार केंद्र में बनी थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वर्ष 1974 का छात्र आंदोलन और जयप्रकाश नारायण (जेपी) का 'संपूर्ण क्रांति' आंदोलन भारतीय राजनीतिक इतिहास का एक टर्निंग पॉइंट था। बिहार के छात्रों ने बढ़ती महंगाई और भ्रष्टाचार के विरुद्ध 'बिहार छात्र संघर्ष समिति' बनाई और जेपी से इसका नेतृत्व संभालने का अनुरोध किया। जेपी ने इसे अहिंसक रखने और संपूर्ण क्रांति (सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, नैतिक, शैक्षिक और आध्यात्मिक परिवर्तन) का रूप देने की शर्त पर स्वीकार किया। 5 जून 1974 के गांधी मैदान के ऐतिहासिक भाषण ने देश की राजनीति को हिला दिया, जिसके परिणामस्वूप आपातकाल लगा और 1977 में जनता पार्टी की सरकार आई। अधिक अभ्यास के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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बिहार समसामयिक और प्रशासनिक पहलों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार…
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19वीं शताब्दी के दौरान भारत में हुए सामाजिक एवं धार्मिक…
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व्यक्तित्व (Personality) के शील गुण (Trait) उपागम के संदर्भ में, गॉर्डन ऑलपोर्ट (Gordon Allport) द्वारा वर्गीकृत शील गुणों के तीन स्तरों — कार्डिनल शील गुण (Cardinal Traits), केंद्रीय शील गुण (Central Traits), और द्वितीयक शील गुण (Secondary Traits) — के बीच निम्नलिखित में से कौन सा अंतर उनके मनोवैज्ञानिक प्रभाव और व्यापकता का सबसे सटीक विश्लेषण प्रस्तुत करता है?
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गॉर्डन ऑलपोर्ट (Gordon Allport) के शील गुण (Trait) सिद्धांत के संदर्भ में, व्यक्तित्व के निर्धारण में 'प्रमुख शील गुण' (Cardinal Traits), 'केंद्रीय शील गुण' (Central Traits), और 'गौण शील गुण' (Secondary Traits) के बीच निम्नलिखित में से कौन सा विश्लेषणात्मक वर्गीकरण और अंतर सबसे अधिक सटीक है?
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चंपारण सत्याग्रह (1917) और स्वतंत्रता आंदोलन में बिहार की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजकुमार शुक्ल के विशेष अनुरोध पर महात्मा गांधी चंपारण आए थे, जहाँ 'तीनकथा पद्धति' के अंतर्गत यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों से उनकी कुल भूमि के 3/20वें हिस्से पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करने का अनुबंध कराया जाता था, जिसके विरुद्ध यह सत्याग्रह भारत में गांधीजी का पहला सफल सविनय प्रयोग बना।
2. चंपारण जाँच समिति (Champarana Agrarian Committee) के एक सदस्य के रूप में ब्रिटिश सरकार द्वारा महात्मा गांधी को भी इस आयोग का सदस्य मनोनीत किया गया था, तथा इस समिति की संस्तुतियों के आधार पर 'चंपारण कृषि अधिनियम, 1917' पारित किया गया, जिसके तहत तीनकथा प्रथा को कानूनी रूप से समाप्त कर दिया गया और अवैध रूप से वसूले गए धन का एक हिस्सा किसानों को वापस लौटाया गया।
3. चंपारण सत्याग्रह की सफलता के दौरान महात्मा गांधी के साथ बराज किशोर प्रसाद, राजेंद्र प्रसाद, अनुग्रह नारायण सिंह, आचार्य कृपलानी और मधुलि जैसे स्थानीय प्रबुद्ध वकीलों और नेताओं ने महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया, जिससे बिहार में राष्ट्रीय राजनीति की एक मजबूत नींव पड़ी।
4. वर्ष 1921 में असहयोग आंदोलन के आगमन के समय बिहार में विद्यार्थियों के लिए शिक्षा के वैकल्पिक संस्थानों के रूप में 'बिहार नेशनल कॉलेज' की स्थापना की गई, जिसके प्राचार्य के रूप में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कार्य किया, और इसी काल में सदाकत आश्रम से मजहरुल हक के संपादन में 'द मदरलैंड' अखबार निकाला गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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गॉर्डन ऑलपोर्ट (Gordon Allport) के व्यक्तित्व के शील गुण सिद्धांत (Trait Theory) के अनुसार, शील गुणों को 'कार्डिनल' (Cardinal), 'केंद्रीय' (Central), और 'द्वितीयक' (Secondary) शील गुणों में वर्गीकृत किया गया है। इस वर्गीकरण के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सबसे अधिक सटीक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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19वीं शताब्दी के दौरान भारत में हुए सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आंदोलनों और उनके संस्थापकों/नेतृत्वकर्ताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा वर्ष 1815 में 'आत्मीय सभा' की स्थापना की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य एकेश्वरवाद के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ हिंदू समाज में व्याप्त कुप्रथाओं, जैसे सती प्रथा और बहुविवाह, का विरोध करना था।
2. स्वामी दयानंद सरस्वती ने वर्ष 1875 में बॉम्बे में 'आर्य समाज' की स्थापना की थी, तथा उनके प्रसिद्ध ग्रंथ 'सत्यार्थ प्रकाश' में उन्होंने वेदों की अचूकता और श्रेष्ठता का प्रतिपादन करते हुए 'भारत भारतीयों के लिए है' का राजनीतिक नारा दिया था।
3. ज्योतिराव फुले ने वर्ष 1873 में महाराष्ट्र में 'सत्यशोधक समाज' की स्थापना की, जिसका मुख्य उद्देश्य शूद्रों और अति-शूद्रों को ब्राह्मणवादी वर्चस्व और धार्मिक पाखंडों से मुक्त कराना तथा उनके सामाजिक अधिकारों की रक्षा करना था।
4. एनी विसंेट ने वर्ष 1898 में बनारस में 'सेंट्रल हिंदू स्कूल' की स्थापना की थी, जो आगे चलकर वर्ष 1915 में पंडित मदन मोहन मालवीय के प्रयासों से 'बनारस हिंदू विश्वविद्यालय' (BHU) का केंद्र बना।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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19वीं शताब्दी में भारत में हुए सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आंदोलनों तथा उनके संस्थापकों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'आत्मीय सभा' (1815) और बाद में 'ब्रह्म समाज' (1828) ने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद, पुरोहितवाद और सती प्रथा जैसी कुप्रथाओं का कड़ा विरोध किया तथा एकेश्वरवाद और तार्किक वेदांत दर्शन का समर्थन किया।
2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा वर्ष 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और वेदों को अपौरुषेय तथा अज्ञानता का नाश करने वाला स्रोत माना, किंतु उन्होंने मूर्तिपूजा और जन्मना जाति व्यवस्था का समर्थन किया।
3. ज्योतिराव फुले द्वारा वर्ष 1873 में स्थापित 'सत्यशोधक समाज' का मुख्य उद्देश्य शूद्रों और अति-शूद्रों (निम्न जातियों) को ब्राह्मणवादी वर्चस्व और धार्मिक पाखंडों से मुक्त कराना तथा शिक्षा के माध्यम से उनका सामाजिक सशक्तिकरण करना था।
4. ईश्वर चंद्र विद्यासागर के अथक प्रयासों के कारण वर्ष 1856 में ब्रिटिश सरकार द्वारा 'हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम' (Act XV of 1856) पारित किया गया, जिसने कानूनी रूप से विधवाओं के पुनर्विवाह को मान्यता प्रदान की।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार के छात्र आंदोलन और जयप्रकाश नारायण (जेपी) की संपूर्ण क्रांति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1974 के छात्र आंदोलन की शुरुआत मूल रूप से छात्रों द्वारा बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और शिक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर 'बिहार छात्र संघर्ष समिति' के गठन के साथ हुई थी।
2. जयप्रकाश नारायण ने इस आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए दो मुख्य शर्तें रखी थीं—पहला यह कि आंदोलन पूरी तरह से अहिंसक रहेगा और दूसरा यह कि इसका प्रभाव केवल बिहार राज्य तक ही सीमित रहेगा, राष्ट्रीय राजनीति में इसका कोई हस्तक्षेप नहीं होगा।
3. गांधी मैदान, पटना में 5 जून 1974 को ऐतिहासिक जनसभा के दौरान जयप्रकाश नारायण ने सत्ता परिवर्तन और व्यवस्था परिवर्तन के लिए 'सम्पूर्ण क्रांति' (Total Revolution) का आह्वान किया था, जिसमें सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक बदलाव शामिल थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली, वैदिक काल के गुरुकुल और उत्तर प्रदेश में स्थित प्रमुख प्राचीन शिक्षा केंद्रों व आश्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश के वर्तमान 'बलिया' जिले के समीप स्थित प्राचीन काल में महर्षि भृगु का 'भृगु क्षेत्र' और 'नैमिषारण्य' (वर्तमान सीतापुर जिला) वैदिक काल से ही तपस्या, पुराण कथाओं और शिक्षा के प्रमुख केंद्र रहे हैं, जहाँ महर्षि शौनकादि ऋषियों ने हजारों शिष्यों को शिक्षा प्रदान की थी।
2. वाराणसी (ऋषिपत्तनम/काशी) प्राचीन काल से ही उपनिषद कालीन दर्शन, व्याकरण और बौद्ध शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र रहा है, जहाँ काशी के राजा अजातशत्रु और उपनिषद काल के प्रसिद्ध दार्शनिक गार्गी व याज्ञवल्क्य के संवादों का उल्लेख मिलता है।
3. प्राचीन काल में 'सारनाथ' केवल बौद्ध धर्म का ही नहीं, बल्कि वज्रयान और महायान संप्रदायों से जुड़े शिक्षण का भी एक प्रतिष्ठित केंद्र था, जिसका उल्लेख चीनी यात्री ह्वेनसांग (Hiuen Tsang) के यात्रा वृत्तांतों में भी विस्तार से मिलता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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