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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVII' के अंतर्गत 'राजभाषा' (Official Language - अनुच्छेद 343 से 351) तथा उससे संबंधित प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी, तथा संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग किए जाने वाले अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतरराष्ट्रीय रूप (1, 2, 3...) होगा।
- 2. संविधान के अनुच्छेद 348 के अनुसार उच्चतम न्यायालय और प्रत्येक उच्च न्यायालय में सभी कार्रवाइयाँ अनिवार्य रूप से हिंदी भाषा में ही की जानी चाहिए, और किसी भी न्यायालय में अंग्रेजी भाषा का प्रयोग करने की संवैधानिक अनुमति केवल राज्यपाल की पूर्व अनुमति से ही दी जा सकती है।
- 3. संविधान के अनुच्छेद 351 के तहत यह संघ का कर्तव्य बताया गया है कि वह हिंदी भाषा का प्रसार बढ़ाए, उसका विकास करे ताकि वह भारत की सामासिक संस्कृति के सभी तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके, और इसके विकास के लिए संस्कृत भाषा से शब्द ग्रहण करने को प्राथमिकता दे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: भारतीय संविधान के भाग XVII के अनुच्छेद 343(1) में यह प्रावधान किया गया है कि संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी। संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग किए जाने वाले अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतरराष्ट्रीय रूप (1, 2, 3...) होगा।
कथन 2 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 348 के अनुसार, जब तक संसद विधि द्वारा अन्यथा उपबंध न करे, उच्चतम न्यायालय और प्रत्येक उच्च न्यायालय में सभी कार्रवाइयाँ **अंग्रेजी भाषा** में ही होंगी। इसके अलावा, किसी राज्य का राज्यपाल, राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से, उच्च न्यायालय की कार्यवाही में हिंदी भाषा या उस राज्य के शासकीय प्रयोजन के लिए उपयोग की जाने वाली किसी अन्य भाषा के प्रयोग को प्राधिकृत कर सकता है, न कि इसके विपरीत।
कथन 3 सही है: संविधान के अनुच्छेद 351 में 'हिंदी भाषा के विकास for निर्देशन' का उपबंध किया गया है। इसके तहत संघ का यह कर्तव्य है कि वह हिंदी भाषा का प्रसार बढ़ाए, उसका विकास करे ताकि वह भारत की सामासिक (composite) संस्कृति के सभी तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके और उसकी प्रकृति में हस्तक्षेप किए बिना, मुख्य रूप से संस्कृत से और गौण रूप से अन्य भाषाओं से शब्द-संग्रह कर its vocabulary को समृद्ध करे।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XI' के अंतर्गत 'केंद्र-राज्य विधाई संबंध' (Legislative Relations - अनुच्छेद 245 से 255) तथा 'अवशिष्ट शक्तियाँ' (Residuary Powers) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 248 के अनुसार संसद को किसी भी ऐसे मामले के संबंध में विधि बनाने की अनन्य शक्ति प्राप्त है जो समवर्ती सूची या राज्य सूची में शामिल नहीं है, और इस 'अवशिष्ट शक्ति' (Residuary Power) के अंतर्गत कर लगाने (Taxation) की शक्ति भी संसद में ही निहित है।
2. भारत सरकार अधिनियम, 1935 (Government of India Act, 1935) में अवशिष्ट शक्तियाँ प्रांतीय गवर्नरों के विवेक पर छोड़ी गई थीं, जबकि भारतीय संविधान निर्माताओं ने कनाडा के संविधान का अनुसरण करते हुए अवशिष्ट शक्तियों को केंद्र (संघ) सरकार के अधीन निहित किया है।
3. अनुच्छेद 249 के अनुसार यदि राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से कोई संकल्प पारित कर दे कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक है कि संसद को राज्य सूची में शामिल किसी भी विषय पर विधि बनानी चाहिए, तो संसद पूरे भारत या उसके किसी भाग के लिए उस विषय पर कानून बना सकती है, और ऐसा संकल्प असीमित समय के लिए प्रभावी रहता है जब तक कि संसद स्वयं उसे निरस्त न कर दे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 131' के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय के 'मूल आरंभिक क्षेत्राधिकार' (Original Jurisdiction) तथा इससे संबंधित सीमाओं और प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत उच्चतम न्यायालय को भारत सरकार और एक या अधिक राज्यों के बीच, या एक तरफ भारत सरकार और कोई राज्य या राज्य और दूसरी तरफ एक या अधिक अन्य राज्यों के बीच किसी कानूनी विवाद में मूल आरंभिक क्षेत्राधिकार प्राप्त है।
2. अनुच्छेद 131 के अंतर्गत आने वाले मूल आरंभिक क्षेत्राधिकार में ऐसे किसी भी विवाद को शामिल किया गया है जो किसी राजनीतिक प्रकृति के समझौते, संधि या सनद (Covenant) से उत्पन्न हुआ हो, बशर्ते वह समझौता संविधान लागू होने से पहले या बाद में किया गया हो।
3. 'कर्नाटक राज्य बनाम भारत संघ (1977)' और अन्य मामलों में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि अनुच्छेद 131 के अंतर्गत 'राज्य' शब्द में केंद्र शासित प्रदेश (Union Territories) और स्थानीय प्राधिकारी या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSUs) भी शामिल हैं, यदि उनका केंद्र सरकार के साथ कोई विधिक विवाद उत्पन्न होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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क्रिप्स मिशन (1942) के संबंध में कौन-सा कथन सही है?
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किस संशोधन द्वारा मतदान की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष की गई?
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भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, 'सार्वभौमिक बुनियादी आय' (Universal Basic Income - UBI) की अवधारणा और इसके प्रभावों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सार्वभौमिक बुनियादी आय एक ऐसी सामाजिक कल्याणकारी अवधारणा है जिसमें बिना किसी पूर्व शर्त, कार्य की बाध्यता या साधन-परीक्षण (Means-testing) के, देश के प्रत्येक नागरिक को एक निश्चित अंतराल पर नियमित रूप से नकद हस्तांतरण (Cash Transfer) प्रदान किया जाता है।
2. आर्थिक सर्वेक्षण (2016-17) में UBI को भारत में पारंपरिक लक्षित सब्सिडी प्रणालियों के एक व्यवहार्य विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया गया था, जिसमें यह तर्क दिया गया था कि यह गरीबी उन्मूलन में अधिक प्रभावी हो सकता है और इससे लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (TPDS) या उर्वरक सब्सिडी में होने वाले प्रशासनिक रिसाव (Leakage) को समाप्त किया जा सकता है।
3. UBI के समर्थकों का यह मुख्य दृष्टिकोण रहता है कि यह महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता और सौदेबाजी की शक्ति में सुधार करता है, किंतु आलोचकों का मानना है कि इसके कार्यान्वयन से श्रम आपूर्ति पर प्रतिकूल प्रभाव (Adverse Labour Supply Effects) पड़ सकता है और इसके कारण उत्पन्न होने वाला भारी राजकोषीय बोझ देश के स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे उत्पादक सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण को गंभीर रूप से बाधित कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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