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भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत विकास के संदर्भ में, 'सार्वजनिक वित्त' (Public Finance) और 'राजकोषीय समेकन' (Fiscal Consolidation) के तहत 'राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम, 2003' (FRBM Act, 2003) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. FRBM अधिनियम का मुख्य उद्देश्य देश में वित्तीय अनुशासन को सुनिश्चित करना, दीर्घकालिक समष्टि आर्थिक स्थिरता (Macroeconomic Stability) प्राप्त करना और राजस्व घाटे को समाप्त करके राजस्व अधिप्लव (Revenue Surplus) उत्पन्न करना था।
  2. 2. FRBM अधिनियम के मूल प्रावधानों के अनुसार केंद्र सरकार को यह लक्ष्य दिया गया था कि वह वर्ष 2008-09 तक राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 3 प्रतिशत तक ले आएगी, जिसे बाद में वैश्विक वित्तीय संकट और विभिन्न संशोधनों के कारण कई बार स्थगित करना पड़ा।
  3. 3. एन. के. सिंह समिति (N.K. Singh Committee) की सिफारिशों के आधार पर FRBM अधिनियम में संशोधन करके यह तय किया गया कि केंद्र सरकार वर्ष 2020-21 तक राजकोषीय घाटे को GDP के 3 प्रतिशत तक और वर्ष 2024-25 तक इसे 2.5 प्रतिशत तक सीमित करने का प्रयास करेगी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: FRBM अधिनियम, 2003 का उद्देश्य भारत में राजकोषीय अनुशासन स्थापित करना, राजस्व घाटे को समाप्त करना और मैक्रोइकोनॉमिक स्थिरता लाना था। कथन 2 सही है: मूल अधिनियम के तहत यह लक्ष्य रखा गया था कि केंद्र सरकार वित्तीय वर्ष 2008-09 तक राजकोषीय घाटे को GDP के 3% तक और राजस्व घाटे को 0% तक ले आएगी, हालाँकि वैश्विक मंदी के कारण इसे कई बार टाला गया। कथन 3 गलत है: एन. के. सिंह समिति (जिसे FRBM समीक्षा समिति भी कहा जाता है) ने अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की थी कि केंद्र सरकार वर्ष 2022-23 तक राजकोषीय घाटे को GDP के 3% तक और वर्ष 2020-22 तक कुल ऋण (Debt-to-GDP ratio) को क्रमशः 40% (केंद्र के लिए) तक लाने का लक्ष्य रखे, न कि वर्ष 2024-25 तक 2.5%। अतः कथन 3 असत्य है।
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