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भारतीय इतिहास के संदर्भ में, 'महात्मा गांधी और दलित वर्ग' (Mahatma Gandhi and the Depressed Classes) तथा 'पूना पैक्ट' (Poona Pact, 1932) के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (1931) में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर द्वारा दलित वर्ग के लिए पृथक निर्वाचक मंडल (Separate Electorate) की मांग किए जाने के कारण ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैम्जे मैकडोनाल्ड द्वारा 'साम्प्रदायिक पंचाट' (Communal Award) की घोषणा की गई, जिसके तहत दलितों को अल्पसंख्यकों की श्रेणी में रखते हुए पृथक निर्वाचन का अधिकार प्रदान किया गया।
- 2. साम्प्रदायिक पंचाट में दलितों के लिए पृथक निर्वाचन मंडल के प्रावधान के विरोध में महात्मा गांधी ने सितंबर 1932 में यरवदा जेल (पुणे) में आमरण अनशन शुरू किया, जिसके परिणामस्वरूप डॉ. अम्बेडकर और गांधी जी के समर्थकों के बीच एक समझौता हुआ जिसे 'पूना पैक्ट' कहा गया।
- 3. पूना पैक्ट के तहत दलित वर्ग के लिए प्रांतीय विधानमण्डलों में पृथक निर्वाचन मंडल की व्यवस्था को स्वीकार कर लिया गया, किंतु सामान्य निर्वाचन क्षेत्रों में उनके लिए आरक्षित सीटों की संख्या को मूल साम्प्रदायिक पंचाट की तुलना में काफी कम कर दिया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने दलितों (जिन्हें 'डिप्रेस्ड क्लासेज' कहा गया) के लिए पृथक निर्वाचक मंडल की मांग की थी। ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैम्जे मैकडोनाल्ड ने अगस्त 1932 में 'साम्प्रदायिक पंचाट' (Communal Award) की घोषणा की, जिसके तहत दलितों को भी मुसलमानों, सिखों आदि की तरह पृथक निर्वाचन का अधिकार दे दिया गया।
कथन 2 सही है: साम्प्रदायिक पंचाट में दलितों को हिंदुओं से अलग करने के प्रयास के विरोध में महात्मा गांधी ने 20 सितंबर 1932 को यरवदा जेल में आमरण अनशन शुरू कर दिया। इसके बाद मदन मोहन मालवीय, सी. राजगोपालाचारी और डॉ. अम्बेडकर के बीच बातचीत हुई जिसके परिणामस्वरूप 24 सितंबर 1932 को 'पूना पैक्ट' पर हस्ताक्षर किए गए।
कथन 3 गलत है: पूना पैक्ट के तहत दलित वर्ग के लिए 'पृथक निर्वाचक मंडल' की मांग को **त्याग दिया गया** और इसके स्थान पर प्रांतीय विधानमण्डलों में दलितों के लिए आरक्षित सीटों की संख्या को साम्प्रदायिक पंचाट में तय की गई 71 सीटों से बढ़ाकर **148 सीटें** कर दिया गया, तथा केंद्रीय विधायिका में भी सामान्य सीटों का 18% हिस्सा दलितों के लिए आरक्षित किया गया।
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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण' (National Biodiversity Authority - NBA) और इसके विधिक ढांचे के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) का गठन वर्ष 2003 में 'जैविक विविधता अधिनियम, 2002' के प्रावधानों के तहत एक सांविधिक, स्वायत्त निकाय के रूप में किया गया था, जिसका मुख्यालय चेन्नई, तमिलनाडु में स्थित है।
2. यह प्राधिकरण जैव विविधता अधिनियम के उपबंधों के कार्यान्वयन, संरक्षण और जैविक संसाधनों के सतत उपयोग के लिए केंद्र सरकार को सलाह देने के साथ-साथ विदेशी नागरिकों या कंपनियों द्वारा देश के जैविक संसाधनों और उससे जुड़ी पारंपरिक ज्ञान तक पहुँच को विनियमित करने का विशेष अधिकार रखता है।
3. जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के तहत स्थापित त्रि-स्तरीय प्रशासनिक ढांचे में राष्ट्रीय स्तर पर NBA, राज्य स्तर पर राज्य जैव विविधता बोर्ड (SBB) और स्थानीय स्तर पर जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ (BMC) शामिल हैं, किंतु स्थानीय निकायों (BMC) को जैविक संसाधनों के व्यावसायिक उपयोग पर स्थानीय स्तर पर कर या शुल्क लगाने का कोई कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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मुन्तख़ब-उत-तवारीख़ के लेखक कौन थे?
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भारतीय राजव्यवस्था और भारतीय संविधान के अंतर्गत 'अटॉनी जनरल ऑफ इंडिया' (भारत के महान्यायवादी - अनुच्छेद 76) तथा 'महाधिवक्ता' (एडवोकेट जनरल - अनुच्छेद 165) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार, भारत के महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा ऐसे व्यक्ति को की जाती है जो उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए अर्ह (Qualified) हो, और वह देश का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है, किंतु महान्यायवादी को संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही में बोलने और भाग लेने का अधिकार होने के बावजूद मतदान करने का कोई संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है।
2. 'के.के. वेणुगोपाल बनाम भारत संघ' या संवैधानिक विधि से जुड़े अन्य मामलों में यह स्पष्ट किया गया है कि महान्यायवादी और राज्य के महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) दोनों ही पूर्णकालिक सरकारी कर्मचारी (Full-time government servants) होते हैं, जिन्हें किसी भी प्रकार का निजी वकालत अभ्यास (Private legal practice) करने की सख्त संवैधानिक और विधिक मनाही होती है।
3. राज्य के महाधिवक्ता (अनुच्छेद 165) को उस राज्य की विधानसभा या विधान परिषद (जहाँ विधान परिषद है) की बैठकों में भाग लेने, बोलने और बिना मतदान के उसकी कार्यवाहियों में हिस्सा लेने का अधिकार होता है, तथा उसे राज्य विधानमंडल के किसी भी सदन की समिति का सदस्य भी बनाया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 124(7)' के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों पर लगने वाले निर्बंधनों (Restrictions) और 'अनुच्छेद 128' के अंतर्गत उनकी पुनर्नियुक्ति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत के संविधान का अनुच्छेद 124(7) स्पष्ट रूप से यह उपबंध करता है कि उच्चतम न्यायालय के रूप में पद धारण करने वाला कोई भी व्यक्ति भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर किसी भी न्यायालय या प्राधिकारी के समक्ष pleading या अधिनियमन (act) नहीं करेगा, जिसका अर्थ है कि वे सेवानिवृत्ति के बाद देश के किसी भी उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय में वकालत (Practice) नहीं कर सकते हैं।
2. संविधान का अनुच्छेद 128 भारत के मुख्य न्यायमूर्ति को राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से उच्चतम न्यायालय के किसी भी सेवानिवृत्त न्यायाधीश या उच्च न्यायालय के ऐसे न्यायाधीश को, जो उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने के लिए अर्हित है, उच्चतम न्यायालय की बैठकों में उपस्थित होने और सेवा करने के लिए अनुरोध करने का पूर्ण अधिकार प्रदान करता है।
3. अनुच्छेद 128 के अधीन उच्चतम न्यायालय की बैठकों में उपस्थित होने और सेवा करने के लिए अनुरोध किए गए किसी भी सेवानिवृत्त न्यायाधीश को न्यायालय के न्यायाधीश की सभी अधिकारिता, शक्तियाँ और विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं, तथा उन्हें राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित वेतन और भत्ते दोनों मिलते हैं, भले ही वे पेंशन भी प्राप्त कर रहे हों।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'भूकंपीय तरंगों' (Seismic Waves) और पृथ्वी के आंतरिक भाग की संरचना से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भूकंपीय तरंगें मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं—भूपृष्ठीय तरंगें (Surface Waves) और भूगर्भीय तरंगें (Body Waves), जिनमें 'प्राथमिक तरंगें' (P-waves) अनुदैर्ध्य (Longitudinal) तरंगें होती हैं जो ठोस, तरल और गैस तीनों माध्यमों से गुजर सकती हैं, जबकि 'द्वितीयक तरंगें' (S-waves) अनुप्रस्थ (Transverse) तरंगें होती हैं जो केवल ठोस माध्यम से ही गुजर सकती हैं।
2. 'छाया क्षेत्र' (Shadow Zone) वह क्षेत्र है जहाँ भूकंपीय तरंगें दर्ज नहीं की जाती हैं, और P-तरंगों का छाया क्षेत्र S-तरंगों के छाया क्षेत्र की तुलना में बहुत बड़ा होता है, क्योंकि P-तरंगें पृथ्वी के तरल बाहरी क्रोड (Outer Core) में प्रवेश करते ही पूरी तरह से विलुप्त हो जाती हैं।
3. मोहोरॉविकिच असांतत्य (Mohorovicic Discontinuity) क्रस्ट (Crust) और मेंटल (Mantle) की सीमा पर स्थित होती है, जहाँ भूकंपीय तरंगों की गति में अचानक परिवर्तन होता है, और यह असांतत्य महासागरीय पर्पटी की तुलना में महाद्वीपीय पर्पटी के नीचे अधिक गहराई पर पाई जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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