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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'भूकंपीय तरंगों' (Seismic Waves) और पृथ्वी के आंतरिक भाग की संरचना से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भूकंपीय तरंगें मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं—भूपृष्ठीय तरंगें (Surface Waves) और भूगर्भीय तरंगें (Body Waves), जिनमें 'प्राथमिक तरंगें' (P-waves) अनुदैर्ध्य (Longitudinal) तरंगें होती हैं जो ठोस, तरल और गैस तीनों माध्यमों से गुजर सकती हैं, जबकि 'द्वितीयक तरंगें' (S-waves) अनुप्रस्थ (Transverse) तरंगें होती हैं जो केवल ठोस माध्यम से ही गुजर सकती हैं।
- 2. 'छाया क्षेत्र' (Shadow Zone) वह क्षेत्र है जहाँ भूकंपीय तरंगें दर्ज नहीं की जाती हैं, और P-तरंगों का छाया क्षेत्र S-तरंगों के छाया क्षेत्र की तुलना में बहुत बड़ा होता है, क्योंकि P-तरंगें पृथ्वी के तरल बाहरी क्रोड (Outer Core) में प्रवेश करते ही पूरी तरह से विलुप्त हो जाती हैं।
- 3. मोहोरॉविकिच असांतत्य (Mohorovicic Discontinuity) क्रस्ट (Crust) और मेंटल (Mantle) की सीमा पर स्थित होती है, जहाँ भूकंपीय तरंगों की गति में अचानक परिवर्तन होता है, और यह असांतत्य महासागरीय पर्पटी की तुलना में महाद्वीपीय पर्पटी के नीचे अधिक गहराई पर पाई जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: भूकंपीय तरंगों को दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया जाता है—बॉडी वेव्स (P और S तरंगें) और सरफेस वेव्स (L और Rayleigh तरंगें)। P-वेव्स ध्वनि तरंगों की तरह अनुदैर्ध्य होती हैं और सभी माध्यमों (ठोस, तरल, गैस) से गुजर सकती हैं, जबकि S-वेव्स प्रकाश तरंगों या जल तरंगों की तरह अनुप्रस्थ होती हैं और केवल ठोस माध्यमों से ही गुजर सकती हैं।
कथन 2 गलत है: S-तरंगों का छाया क्षेत्र P-तरंगों की तुलना में बहुत बड़ा होता है। S-तरंगें तरल बाहरी क्रोड से नहीं गुजर सकतीं, इसलिए अधिकेंद्र (Epicenter) से 103° से 180° के बीच का पूरा क्षेत्र S-तरंगों का छाया क्षेत्र बन जाता है, जो पृथ्वी के कुल क्षेत्रफल का लगभग 40% है। इसके विपरीत, P-तरंगों का छाया क्षेत्र 103° से 142° के बीच एक रिंग (Ring) के रूप में होता है क्योंकि तरल क्रोड में प्रवेश करने पर उनका अपवर्तन (Refraction) होता है।
कथन 3 सही है: मोहोरॉविकिच (Moho) असांतत्य क्रस्ट और मेंटल के बीच की सीमा है। महाद्वीपीय पर्पटी (Continental Crust) की मोटाई महासागरीय पर्पटी (Oceanic Crust) की तुलना में अधिक होती है, इसलिए Moho असांतत्य महाद्वीपीय क्षेत्रों में अधिक गहराई (लगभग 30-70 किमी) पर और महासागरों के नीचे अपेक्षाकृत कम गहराई (लगभग 5-10 किमी) पर पाई जाती है।
Related Questions
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'महासागरीय धाराओं' (Ocean Currents) तथा उनके निर्माण और जलवायु पर पड़ने वाले प्रभावों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महासागरीय धाराओं की उत्पत्ति के लिए मुख्य रूप से प्रचलित हवाएँ (Prevailing Winds), पृथ्वी का घूर्णन (कोरिऑलिस बल), और जल के घनत्व में भिन्नता (तापमान और लवणता के कारण) उत्तरदायी होती हैं, जिसमें व्यापारिक हवाएँ और पछुआ हवाएँ प्रमुख भूमिका निभाती हैं।
2. 'एल नीनो' (El Niño) घटना के दौरान, दक्षिणी प्रशांत महासागर में पेरू के तट के पास ठंडी धारा (पेरू या हम्बोल्ट धारा) का प्रभाव अत्यधिक प्रबल हो जाता है, जिससे उस क्षेत्र में जल का तापमान असामान्य रूप से गिर जाता है और भारतीय मानसून पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
3. उत्तरी गोलार्ध में महासागरीय धाराएँ कोरिऑलिस बल के प्रभाव के कारण अपनी दाईं ओर (Clockwise) मुड़ जाती हैं, जबकि दक्षिणी गोलार्ध में वे अपनी बाईं ओर (Counter-clockwise) मुड़ जाती हैं, जो फेरेल के नियम के अनुरूप है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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गंगा की सहायक नदियों का पश्चिम से पूर्व की ओर सही क्रम क्या है?
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सौरमंडल का सबसे छोटा ग्रह कौन-सा है?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 371' (Article 371) के अंतर्गत विभिन्न राज्यों के लिए किए गए विशेष प्रावधानों और उनके उद्देश्यों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 371-A के तहत नागालैंड राज्य के संबंध में विशेष प्रावधान किए गए हैं, जिसके अनुसार संसद का कोई भी अधिनियम नागाओं के धार्मिक या सामाजिक प्रथाओं, नागा रूढ़िगत कानून और प्रथाओं, तथा रूढ़िगत कानून के अनुसार सिविल या आपराधिक न्याय के प्रशासन से संबंधित मामलों में तब तक लागू नहीं होगा जब तक कि नागालैंड राज्य की विधानसभा एक प्रस्ताव द्वारा ऐसा निर्णय न ले।
2. अनुच्छेद 371-D के तहत आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों के संबंध में केंद्रीय विश्वविद्यालयों की स्थापना और शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश तथा राज्य सरकार के सेवाओं में स्थानीय कैडर के आरक्षण के लिए विशेष निर्देश देने की शक्ति राष्ट्रपति में निहित की गई है।
3. अनुच्छेद 371-F के अंतर्गत सिक्किम राज्य के संबंध में यह विशेष प्रावधान किया गया है कि सिक्किम के मूल निवासियों (लेप्चा, भूटिया आदि) के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए राज्यपाल के पास कानून और व्यवस्था के रखरखाव के संबंध में अंतिम और विशेष उत्तरदायित्व है, जिसके लिए वह मंत्रिपरिषद की सलाह से स्वतंत्र होकर कार्य कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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सामान्य विज्ञान और पर्यावरण के संदर्भ में, 'कोरल ब्लीचिंग' (Coral Bleaching) और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर इसके प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कोरल ब्लीचिंग मुख्य रूप से तब होती है जब समुद्री जल के तापमान में असामान्य वृद्धि होती है, जिसके कारण प्रवाल (Corals) अपने ऊतकों में निवास करने वाले सहजीवी शैवाल (Zooxanthellae) को बाहर निकाल देते हैं, जिससे प्रवाल अपना प्राकृतिक रंग खो देते हैं और सफेद हो जाते हैं।
2. प्रवाल विरंजन (Bleaching) का अर्थ यह है कि प्रवाल की मृत्यु हो गई है, और विरंजन की प्रक्रिया शुरू होने के बाद किसी भी स्थिति में प्रवाल पुनर्जीवित (Recover) नहीं हो सकते हैं।
3. जलवायु परिवर्तन और महासागर अम्लीकरण (Ocean Acidification) के अलावा, अत्यधिक पराबैंगनी (UV) विकिरण, तटीय प्रदूषण और एल नीनो (El Niño) जैसी मौसमी घटनाएं भी कोरल ब्लीचिंग के प्रमुख कारकों में शामिल हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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