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सामान्य विज्ञान और पर्यावरण के संदर्भ में, 'हरित गृह प्रभाव' (Greenhouse Effect) और 'जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल' (IPCC) की रिपोर्टों के आलोक में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. प्राकृतिक हरित गृह प्रभाव पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व के लिए अनिवार्य है, क्योंकि इसके बिना पृथ्वी का औसत तापमान वर्तमान +15°C से गिरकर लगभग -18°C तक पहुँच सकता है, जिससे संपूर्ण ग्रह बर्फ से ढक जाता।
- 2. क्योटो प्रोटोकॉल (1997) के तहत कानूनी रूप से बाध्यकारी लक्ष्यों के अंतर्गत केवल कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$), मीथेन ($CH_4$) और नाइट्रस ऑक्साइड ($N_2O$) को ही शामिल किया गया था, जबकि हाइड्रोफ्लुओरोकार्बन (HFCs), परफ्लुओरोकार्बन (PFCs) और सल्फर हेक्साफ्लोराइड ($SF_6$) को इसके दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया था।
- 3. वायुमंडल में जलवाष्प ($H_2O$) सबसे प्रचुर मात्रा में पाई जाने वाली प्राकृतिक हरित गृह गैस है, जिसका योगदान कुल हरित गृह प्रभाव में सबसे अधिक होता है, किंतु मानवीय गतिविधियों (जैसे जीवाश्म ईंधन के दहन) द्वारा इसके उत्सर्जन का प्रत्यक्ष नियंत्रण सीधे तौर पर संभव नहीं है क्योंकि यह मुख्य रूप से महासागरीय वाष्पीकरण और तापमान द्वारा नियंत्रित होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: प्राकृतिक हरित गृह प्रभाव पृथ्वी की सतह को गर्म रखने में मदद करता है। इसके बिना पृथ्वी का औसत तापमान वर्तमान +15 डिग्री सेल्सियस से गिरकर लगभग -18 डिग्री सेल्सियस हो जाता, जिससे जीवन का टिकना असंभव हो जाता।
कथन 2 गलत है: क्योटो प्रोटोकॉल (1997) के अंतर्गत कुल छह ग्रीनहाउस गैसों/समूहों को कानूनी रूप से बाध्यकारी उत्सर्जन कटौती लक्ष्यों के लिए शामिल किया गया था। इनमें कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$), मीथेन ($CH_4$), नाइट्रस ऑक्साइड ($N_2O$) के साथ-साथ हाइड्रोफ्लुओरोकार्बन (HFCs), परफ्लुओरोकार्बन (PFCs) और सल्फर हेक्साफ्लोराइड ($SF_6$) भी शामिल थे।
कथन 3 सही है: जलवाष्प वायुमंडल की सबसे प्रचुर मात्रा में पाई जाने वाली प्राकृतिक ग्रीनहाउस गैस है और कुल प्राकृतिक ग्रीनहाउस प्रभाव में इसका योगदान सबसे अधिक (लगभग 36-72%) है। चूँकि वायुमंडल में जलवाष्प की मात्रा सीधे तौर पर वायु के तापमान (क्लाउसियस-क्लेपेरॉन संबंध) द्वारा नियंत्रित होती है, इसलिए मानवीय गतिविधियों द्वारा इसके सीधे उत्सर्जन का जलवायु नियंत्रण पर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ता है।
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ब्रिटिश भारत में सिविल सेवाओं के विकास और प्रशासनिक नियंत्रण के संदर्भ में, वर्ष 1943 में कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सर मॉरिस ग्वेयर (Sir Maurice Gwyer) की अध्यक्षता में गठित 'ग्वेयर समिति' (Gwyer Committee) या अन्य सेवा समितियों से इतर, वर्ष 1946 में गठित 'अखिल भारतीय सेवा समिति' (All India Services Committee) अथवा 'सप्रे समिति' के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस समिति ने ब्रिटिश भारत और रियासतों (Princely States) के एकीकरण के बाद एक समान अखिल भारतीय प्रशासनिक सेवा के गठन की रूपरेखा तैयार की थी, जिसे सरदार वल्लभभाई पटेल का पूर्ण समर्थन प्राप्त था।
2. इस समिति की संस्तुतियों के आधार पर ही भारत के संविधान के लागू होने से ठीक पहले, वर्ष 1947 में 'भारतीय प्रशासनिक सेवा' (IAS) और 'भारतीय पुलिस सेवा' (IPS) के अधिकारियों के वेतन, भत्ते और सेवा शर्तों को अंतिम रूप देने के लिए 'ग्वेयर-पटेल समझौते' (Gwyer-Patel Agreement) को लागू किया गया था।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, 'हरित बांड' (Green Bonds) और भारत में उनके नियमन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हरित बांड एक प्रकार का निश्चित आय वाला उपकरण (Fixed-income instrument) है, जिसे विशेष रूप से जलवायु-अनुकूल और पर्यावरण के प्रति सकारात्मक परियोजनाओं, जैसे कि अक्षय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, और संधारणीय जल प्रबंधन के वित्तपोषण के लिए पूंजी जुटाने हेतु जारी किया जाता है।
2. भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने 'SEBI (Issue and Listing of Non-Convertible Securities) Regulations, 2021' के अंतर्गत हरित ऋण पत्रों (Green Debt Securities) के लिए विशिष्ट दिशा-निर्देश और प्रकटीकरण मानक निर्धारित किए हैं, जिसके तहत जारीकर्ता को जुटाई गई आय के उपयोग पर स्वतंत्र तृतीय-पक्षीय प्रमाणन (Third-party certification) प्राप्त करना अनिवार्य होता है।
3. भारत सरकार द्वारा संप्रभु हरित बांड (Sovereign Green Bonds) फ्रेमवर्क के तहत जारी किए गए बांडों से प्राप्त होने वाली आय को देश के समेकित निधि (Consolidated Fund of India) में जमा किया जाता है, जिसका उपयोग केंद्र सरकार के सामान्य राजकोषीय घाटे को पाटने के लिए किसी भी सरकारी उद्देश्य हेतु किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (National Green Tribunal - NGT) और उससे संबंधित विधिक प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण की स्थापना वर्ष 2010 में 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम' के तहत की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, वनों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित मामलों का प्रभावी और तीव्र गति से निपटारा करना है।
2. यह अधिकरण सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत निर्धारित सख्त न्यायिक प्रक्रियाओं और नियमों से पूरी तरह बाध्य है, और इसे अपने समक्ष आने वाले मामलों की सुनवाई करते समय 'नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों' (Principles of Natural Justice) का पालन करने की आवश्यकता नहीं होती है।
3. राष्ट्रीय हरित अधिकरण के निर्णयों या आदेशों के विरुद्ध अपील सीधे सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में की जा सकती है, क्योंकि इसके आदेशों को चुनौती देने के लिए देश के उच्च न्यायालयों (High Courts) के अपीलीय क्षेत्राधिकार को पूरी तरह से वर्जित किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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समानता का अधिकार भारतीय संविधान के किन अनुच्छेदों के बीच वर्णित है?
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