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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, समुद्र तल प्रसार (Sea Floor Spreading) और प्लेट विवर्तनिकी (Plate Tectonics) सिद्धांत के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 'समुद्र तल प्रसार' की अवधारणा को सबसे पहले वर्ष 1961 में रॉबर्ट डीट्ज़ (Robert Dietz) द्वारा प्रतिपादित किया गया था, जबकि हैरी हेस (Harry Hess) ने मध्य-महासागरीय कटकों (Mid-Oceanic Ridges) के सहारे महासागरीय पर्पटी के लगातार फटने और नए मैग्मा के ऊपर आकर जमने की प्रक्रिया के रूप में इसे विस्तृत रूप दिया।
  2. 2. पुराचुंबकत्व (Paleomagnetism) के अध्ययन से यह सिद्ध हुआ कि मध्य-महासागरीय कटकों के दोनों ओर चट्टानों में चुंबकीय पट्टियाँ (Magnetic Stripes) एक समान और सममित (Symmetrical) रूप से व्यवस्थित हैं, जो समुद्र तल के प्रसार और महाद्वीपीय विस्थापन के पक्ष में सबसे प्रबल प्रमाण प्रदान करती हैं।
  3. 3. विवर्तनिक प्लेटों के किनारों पर होने वाली गतियों के संदर्भ में, अभिसारी सीमा (Convergent Boundary) पर हमेशा भारी और घनी महासागरीय प्लेट हल्की महाद्वीपीय प्लेट के नीचे क्षैतिज रूप से सबडक्ट (Subduct) होती है, जिसके कारण कभी भी महाद्वीपीय-महाद्वीपीय प्लेट अभिसरण की स्थिति में पर्वतों का निर्माण नहीं होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: 'समुद्र तल प्रसार' (Sea Floor Spreading) की परिकल्पना को सबसे पहले वर्ष 1961 में रॉबर्ट डीट्ज़ ने प्रतिपादित किया था और बाद में हैरी हेस ने मध्य-महासागरीय कटकों के सहारे महासागरीय क्रस्ट के प्रसार और मैग्मा के ऊपर आने के सिद्धांत को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत किया। कथन 2 सही है: महासागरीय कटकों के दोनों तरफ चट्टानों में पाए जाने वाले चुंबकीय खनिजों (जैसे मैग्नेटाइट) के 'पुराचुंबकत्व' (Paleomagnetism) ने यह साबित किया कि कटकों के समानांतर वैकल्पिक चुंबकीय पट्टियाँ पाई जाती हैं, जो समुद्र तल के प्रसार का सबसे पुख्ता प्रमाण हैं। कथन 3 गलत है: अभिसारी सीमाओं पर महाद्वीपीय-महाद्वीपीय प्लेटों (जैसे भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट) के टकराने पर भी अभिसरण होता है, जिससे हिमालय जैसे वलित पर्वतों का निर्माण होता है (जहाँ सबडक्शन अनिवार्य नहीं होता क्योंकि दोनों प्लेटें हल्की होती हैं)। अतः केवल 1 और 2 सही हैं।
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