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सामान्य विज्ञान, पर्यावरण और पारिस्थितिकी के संदर्भ में, 'हरित गृह गैसों' (Greenhouse Gases - GHGs), वैश्विक तापन और अंतरराष्ट्रीय जलवायु पहलों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. क्योटो प्रोटोकॉल (Kyoto Protocol) के अंतर्गत नियंत्रित की जाने वाली प्रमुख हरित गृह गैसों में कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$), मीथेन ($CH_4$), नाइट्रस ऑक्साइड ($N_2O$), हाइड्रोफ्लुओरोकार्बन (HFCs), परफ्लुओरोकार्बन (PFCs), सल्फर हेक्साफ्लोराइड ($SF_6$) के साथ-साथ नाइट्रोजन ट्राइफ्लोराइड ($NF_3$) को भी आधिकारिक रूप से शामिल किया गया है।
- 2. जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) के अंतर्गत 'ग्लोबल वार्मिंग पोटेंशियल' (GWP) किसी गैस की ऊष्मा-अवशोषण क्षमता को एक निश्चित समयावधि (सामान्यतः 100 वर्ष) में कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में मापता है, जिसका अर्थ है कि मीथेन ($CH_4$) का GWP मान कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में अल्पकाल में काफी अधिक होता है।
- 3. वायुमंडल में पाई जाने वाली 'जल वाष्प' (Water Vapour) पृथ्वी की प्राकृतिक हरित गृह प्रभाव में सबसे बड़ा योगदान देती है, किंतु इसे क्योटो प्रोटोकॉल के अंतर्गत किसी legally binding उत्सर्जन कटौती लक्ष्यों में शामिल नहीं किया गया है क्योंकि यह मानवीय गतिविधियों से पूरी तरह स्वतंत्र है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है: क्योटो प्रोटोकॉल के पहले प्रतिबद्धता काल (2008-2012) में छह गैसों (CO2, CH4, N2O, HFCs, PFCs, SF6) को शामिल किया गया था। नाइट्रोजन ट्राइफ्लोराइड ($NF_3$) को क्योटो प्रोटोकॉल के दूसरे प्रतिबद्धता काल (दोहा संशोधन, 2012-2020) में जोड़ा गया था, न कि मूल सूची में। इसके अलावा, कथन में यह दर्शाया गया है कि ये सभी एक साथ मूल सूची में थे, जो तकनीकी रूप से अशुद्ध है। अधिक महत्वपूर्ण रूप से, कथन 3 की तुलना में जल वाष्प संबंधी तथ्य को समझें।
कथन 2 सही है: ग्लोबल वार्मिंग पोटेंशियल (GWP) एक माप है जो यह बताता है कि किसी विशिष्ट गैस ने एक निश्चित समय क्षितिज (आमतौर पर 100 वर्ष) में $CO_2$ के सापेक्ष कितनी ऊष्मा को अवशोषित किया है। मीथेन का GWP $CO_2$ की तुलना में 100 वर्ष की अवधि में लगभग 28-36 गुना अधिक होता है।
कथन 3 गलत है: जल वाष्प पृथ्वी पर सबसे प्रचुर मात्रा में पाई जाने वाली ग्रीनहाउस गैस है और प्राकृतिक ग्रीनहाउस प्रभाव में इसका सबसे बड़ा योगदान है, किंतु यह कहना गलत है कि यह मानवीय गतिविधियों से 'पूरी तरह स्वतंत्र' है। हालांकि प्रत्यक्ष मानवीय उत्सर्जन जल वाष्प के स्तर को सीधे तौर पर बहुत अधिक प्रभावित नहीं करता, फिर भी जलवायु परिवर्तन (तापमान वृद्धि) के कारण वाष्पीकरण बढ़ने से वायुमंडल में जल वाष्प की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे एक सकारात्मक पुनर्भरण लूप (Positive Feedback Loop) बनता है। साथ ही, क्योटो प्रोटोकॉल में इसे शामिल न किए जाने का कारण इसकी प्राकृतिक प्रचुरता और प्रत्यक्ष नियंत्रण की असंभवता है, न कि मानव गतिविधियों से इसकी पूर्ण स्वतंत्रता।
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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (Wildlife Protection Act, 1972) के प्रावधानों और 'राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड' (National Board for Wildlife - NBWL) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के अंतर्गत स्थापित 'राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड' (NBWL) एक संविधिक (Statutory) निकाय है, जिसकी अध्यक्षता देश के प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है, तथा इसके उपाध्यक्ष के रूप में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री कार्य करते हैं।
2. इस अधिनियम की धारा 29 के तहत किसी भी राष्ट्रीय उद्यान (National Park) या वन्यजीव अभ्यारण्य (Wildlife Sanctuary) के भीतर व्यावसायिक खनन या वन्यजीवों के आवास को प्रभावित करने वाली किसी भी गतिविधि की अनुमति केवल और केवल संबंधित राज्य के मुख्य वन्यजीव वार्डन (Chief Wildlife Warden) की लिखित अनुमति से दी जा सकती है, जिसके लिए राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की संस्तुति अनिवार्य नहीं होती है।
3. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की विभिन्न अनुसूचियों (Schedules) में वर्ष 2022 के संशोधन अधिनियम के माध्यम से व्यापक बदलाव किया गया है, जिसके तहत अनुसूचियों की कुल संख्या को घटाकर छह से चार कर दिया गया है, ताकि प्रजातियों के संरक्षण प्रबंधन को अधिक सुगम बनाया जा सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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किस कांग्रेस अधिवेशन में मौलिक अधिकारों का प्रस्ताव पारित किया गया?
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संसद के संयुक्त अधिवेशन का प्रावधान किस अनुच्छेद में है?
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भारत के पहले Greenfield Refinery-Cum-Petrochemical Complex का उद्घाटन कहाँ किया गया है?
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भारतीय अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास के संदर्भ में, 'सार्वभौमिक बुनियादी आय' (Universal Basic Income - UBI) की अवधारणा और इसके सैद्धांतिक व व्यावहारिक प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सार्वभौमिक बुनियादी आय (UBI) के तहत देश के सभी नागरिकों को बिना किसी शर्त के एक निश्चित नियमित आय प्रदान की जाती है, जिसका मुख्य उद्देश्य लक्षित सब्सिडी प्रणालियों की तुलना में प्रशासनिक अक्षमताओं को दूर करना और पूर्ण गरीबी को समाप्त करना होता है।
2. आर्थिक सर्वेक्षण (2016-17) में प्रस्तुत UBI के मॉडल के अनुसार, इसमें यह सुझाव दिया गया था कि UBI को लक्षित और सशर्त कल्याणकारी योजनाओं के पूरक के रूप में लागू किया जाना चाहिए, और इसके कार्यान्वयन के लिए देश की सभी मौजूदा खाद्य सब्सिडी और उर्वरक सब्सिडी को पूरी तरह से समाप्त कर देना चाहिए।
3. UBI के समर्थकों का तर्क है कि यह नागरिकों को अपनी पसंद का काम चुनने और श्रम बाजार में बेहतर सौदेबाजी की शक्ति देता है, जबकि इसके आलोचकों का मानना है कि इससे काम करने की प्रेरणा (Work Disincentive) कम हो सकती है और सरकारी राजकोषीय घाटे पर अत्यधिक दबाव पड़ सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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